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कबीर हमारे समय की मांग हैं - सुकदेव सिंह

06 Mar 2007      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

ShukdevJiहमारे समय के कबीर मर्मज्ञ पिछले दिनों प. अक्षय चन्द्र शर्मा स्मृति समारोह के आयोजन में बीकानेर आए हुए थे। कबीर पर सर्वाधिक अनुसंधान कराने वालों में पं. शुकदेव शास्त्री अग्रणी हैं। वे अब तक भए कबीर कबीर, कबीर बीजक, कबीर] और भगताई पंथ, कबीर चौथ कबीर] दल कबीर साहित्य] की प्रासंगिकता आदि पुस्तकें व पत्र पत्रिकाओं का लेखन व संपादन कर चुके हैं। दुनिया के कोने कोने में कबीर पर व्याख्यान भी दे चुके हैं।  नाम कबीरा वन वन फिरो उदासी पर तो सीरियल भी बना है तथा वह १६ भाषाओं में प्रकाशित हुआ हैं। पं. शुकदेव सिंह  कबीर मर्मज्ञ के साथ साथ लोक अध्येता, दलितों पर भी काम करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कबीर पर देश में ही नही वरन् विदेश  में भी अनुसंधान करवाये और करवा रहे हैं। हर वर्ष २० से २५ विदेशी शोधार्थियों को कबीर साहित्य के अनुसंधान की दिशा देने का काम आप करते रहे हैं। कबीर चौरा के ३५३ मठ पूरे विश्व में है। कबीर चौटा के साथ साथ कबीर से संबंधित हस्तलेखों का संग्रह भी तैयार कर चुके है। पेश है खबरएक्सप्रेस के साथ हुई बातचीत के कुछ संपादित अंश :-
- इन दिनों कबीर पर क्या काम कर रहे हैं ?
उतर - कबीर के पाठ पर नए सिरे से काम कर रहा हूँ । अपनी पुरानी गलतियों का परिहार कर रहा हूँ।  कबीर बीजक का परिष्कृत संपादन कर पुनः प्रकाशन में लगा हूँ। जो विदेश में छपेगी।
- आप कबीर को कैसे कवि के रूप में देखते हैं?
उतर - देखिए, कबीर मृत्यु के रूपको की कविता करने वाले कवि हैं। इसलिए मैं  उन्हें इसलिए पसंद करता हूँ कि हमारा समाज मंदिर मस्जिद धर्म में नही वरन् व मृत्यु संबंधी आस्थाओं से बंधा है। मरने पर जातीय कर्म होते हैं। कबीर ने इस जडता पर प्रहार किया । मृत्यु संबंधी थोथी मान्यताओं एवंम् आस्थाओं पर प्रहार किया । वे अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं इसलिए वे बडे कवि हैं।
- वर्तमान परिस्थितियों में कबीर की प्रासंगिकता को आप किस तरह उपयुक्त पाते हैं?
उतर - कबीर  इस तरह के कवि हैं कि वे उसी समय में पढे जाते हैं जबकि उनकी जरूरत ज्यादा होती ह। सांप्रदायिक माहौल, विषम परिस्थितियों , असमानता और स्थापित मानदण्डों  के परिष्कार में कबीर हमारे लिए वे आगीवान का काम करते है। इसलिए आज के माहौल में उनकी अनिवार्यता बढ रही है।
- इन दिनों दुनिया में कबीर को लेकर क्या हलचल हैं ?
उतर - दुनिया के प्रायः सभी विकसित राष्ट्रों में कबीर कविता का अध्ययन - अध्यापन हो रहा है। फ्रेंकफर्ट में पुस्तक मेला हुआ । वहाँ बहुत सारा कबीर साहित्य बिका और देखने में आया। जर्मनी, जापान, में तो और जेनवाद के साथ कबीर की कविता को जोड कर अध्ययन हो रहे हैं।
- हमारे युवाओं के लिए कोई विशेष बात जो आप कहना चाहेंगे ?
उतर - मेरा मानना है कि हमारी  संस्कृति में आई विकृति हमारी अपनी देन है। हमें इसी रूप में इसके निराकरण की ओर ध्यान देना चाहिए। हमारा अपना नीति शास्त्र है अपनी मर्यादाएं है। उन्हीं  को साथ लेकर चिंतन मनन के द्वारा आगे बढने की आवश्यकता है। कबीर इस पथ पर हमारे बडे हो सकते है। वे सहयोगी हमारे समय की मांग




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