Saturday, 23 November 2019
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मीडिया की गैर जिम्मेदारीः जिम्मेदार कौन


Shyam Narayan Rangaभारत का लगभग सारा मीडिया और विशेष रूप से इलैक्ट्राॅनिक चैनल पिछले दो माह से विशेष सुर्खियों के साथ एक मर्डर केस के पीछे लगा हुआ है और देश भर के सारे चैनल इस खबर को दिखाते नहीं थक रहे कि आरूषि की हत्या कैसे हुई होगी और क्या क्या हुआ होगा। इस सारे प्रकरण में पचास दिन पहले आरूषि के पिता को अपनी पुत्री की हत्या के आरोप में नोयडा पुलिस द्वारा गिरफतार किया गया और पिछले पचास दिनों से देश भर के मीडिया ने जमकर आरूषि के पिता डाक्टर राजेश तलवार पर छींटाकसी की । डाक्टर राजेश तलवार को एक दरिंदा व पुत्री का हत्यारा बताया गया और डॉक्टर तलवार के व्यक्तिगत जीवन व चरित्र पर जमकर आरोप लगाए गए । एक टी वी चैनल तो यहाँ तक बता दिया कि एक वहसी बाप ने मासूम पुत्री की हत्या किस प्रकार की।
Arushi and Rajesh Talwarआज सीबीआई ने दोपहर में आनन फानन में एक प्रेस कॉफ्रेस बुलाकर यह सनीसनीखेज खुलासा किया कि डॉक्टर राजेश तलवार निर्दोंष है और उनके खिलाफ किसी प्रकार का सबूत नहीं मिला है। आज आरूषि के पिता डॉक्टर राजेश तलवार को रिहा कर दिया गया। आज तलवार की रिहाई और सीबीआई द्वारा उनकी बेगुनाही की घोषणा ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक सवालिया निशान लगा दिया है और यह बता दिया है कि इस देश का मीडिया कितना गैर जिम्मेदार है। बिना सोचे समझे सिर्फ शक की बिनाह पर देश भर के मीडिया ने डॉक्टर राजेश तलवार ने पर जमकर आरोप लगाए और एक पिता को पुत्री का हत्यारा साबित करने में कोई कसर नहीं छोडी। किसी ने यह नहीं सोचा की आखिर एक बाप बेटी का हत्यारा क्यों होगा और क्यों करेगा वह यह गुनाह।
मीडिया की इस मार का डॉक्टर तलवार के व्यक्तिगत जीवन पर कितना असर पडा है इसका मूल्यांकन करना नामुमकिन है। मीडिया की भयंकर भूल ने एक व्यक्ति के जीवन व चरित्र को कहीं का नहीं छोडा । आखिर कौन जिम्मेदार है इस गैर जिम्मेदारी का।  इस देश का मीडिया इतना गैर जिम्मेदार है कि अपनी टीआरपी रेटिंग बढाने के लिए और खबर को ज्यादा से ज्यादा चटकारेदार बनाने के लिए वह ऐसी ऐसी खबरें गढ देता है जिसका कोई आधार नहीं होता। मीडिया की यह गैर जिम्मेदारी आज खुलकर देश के सामने आ चुकी है। हम देख रहे हैं कि किस तरह से आरूषि के हत्याकांड को इस देश का मीडिया परोस रहा है।  इस देश के मीडिया को न तो आरूषि से प्रेम है और नहीं डॉक्टर तलवार से हमदर्दी । इसे फिक्र है सिर्फ अपने टीआरपी रेटिंग की और दिनभर चैनलों के आका यह सोचते रहते हैं कि किस तरह किसी न्यूज को सनसनीखेज बनाया जाए। इस बार उनके हाथ आरूषि लगी। इस न्यूज को तमाम चैनलों ने जमकर परोसा और खुलकर बताया बिना यह सोचे समझे की आखिर सच्चाई क्या है। किसी भी चैनल ने इस बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया कि आखिर एक बाप अपनी बेटी की हत्या क्यों करे। चैनलों में हमेशा यही देखा जाता है कि आज कौनसी खबर सबसे ज्यादा देखी गई और कौन सी खबर की रेंटिंग क्या रही।
किसी जमाने में माना जाता था कि मीडिया समाज का दर्पण है यह समाज व राष्ट्र को उसका आईना दिखाता है। आज इस देश का नागरिक यह पूछना चाहता है कि इस भद्दी और बिगडैल मीडिया को उसका चेहरा कौन दिखाए। इस गैर जिम्मेदार मीडिया को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो यह उस मदमस्त हाथी की तरह होगा जो पागल होकर जब निकलता है तो न जाने कितनों की जाने ले लेता है। बात सिर्फ राजेश तलवार की नहीं है आज का मीडिया अपनी लाईन व लेंथ से हट चुका हैं। पत्रकारिता में भी नैतिकता नहीं रही । बाजारवाद के इस दौर ने पत्रकारिता को भी व्यवसाय बना कर रख दिया है। पत्रकार अपने चैलन का सेल्समेन है जो दिनभर ऐसी खबरे गढने में व्यस्त रहता है जो ज्यादा से ज्यादा बिक पाए।
डॉक्टर राजेश तलवार को जो सदमा लगा है, उनके चरित्र को गिराने का जो प्रयास हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा। यह सोच कर दिल दहल जाता जाता है कि जिस बाप की बेटी की चिता की राख भी अभी ठण्डी नहीं हुई है उस पर ही बेटी की हत्या का आरोप लगा कर जेल मे डाल दिया जाता है। उसके चरित्र को गिराने के तमाम प्रयास किए जाते हैं। एक सोच कर देखो क्या गुजरी होगी इस बेगुनाह बाप पर। बेटी की याद में रो भी नहीं सका और अगर रोया तो इस मीडिया ने उसके ऑसुओं को भी घडयाली बताया। मीडिया की यह मार डॉक्टर तलवार ने कैसे सही होगी यह तो डॉक्टर तलवार ही जानते हैं। मीडिया का मारा कहीं का नहीं रहता और ये पचास दिन डाक्टर राजेश तलवार को कोई नहीं दे सकता। भगवान आरूषि की आत्मा को शांति दे और प्रार्थना करूँगा की इस देश की पत्रकारिता को नए आयाम दे ताकि इस मदमस्त हाथी पर अंकुश लगाया जा सके और देश व समाज को मदमस्तता मे कर रहे आतंक से बचाया जा सके अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब यह हाथी अपनों को ही कुचल कर खाक कर देगा।

 


Article by :  Shyam Narayan Ranga