भारत का लगभग सारा मीडिया और विशेष रूप से इलैक्ट्राॅनिक चैनल पिछले दो माह से विशेष सुर्खियों के साथ एक मर्डर केस के पीछे लगा हुआ है और देश भर के सारे चैनल इस खबर को दिखाते नहीं थक रहे कि आरूषि की हत्या कैसे हुई होगी और क्या क्या हुआ होगा। इस सारे प्रकरण में पचास दिन पहले आरूषि के पिता को अपनी पुत्री की हत्या के आरोप में नोयडा पुलिस द्वारा गिरफतार किया गया और पिछले पचास दिनों से देश भर के मीडिया ने जमकर आरूषि के पिता डाक्टर राजेश तलवार पर छींटाकसी की । डाक्टर राजेश तलवार को एक दरिंदा व पुत्री का हत्यारा बताया गया और डॉक्टर तलवार के व्यक्तिगत जीवन व चरित्र पर जमकर आरोप लगाए गए । एक टी वी चैनल तो यहाँ तक बता दिया कि एक वहसी बाप ने मासूम पुत्री की हत्या किस प्रकार की।
आज सीबीआई ने दोपहर में आनन फानन में एक प्रेस कॉफ्रेस बुलाकर यह सनीसनीखेज खुलासा किया कि डॉक्टर राजेश तलवार निर्दोंष है और उनके खिलाफ किसी प्रकार का सबूत नहीं मिला है। आज आरूषि के पिता डॉक्टर राजेश तलवार को रिहा कर दिया गया। आज तलवार की रिहाई और सीबीआई द्वारा उनकी बेगुनाही की घोषणा ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक सवालिया निशान लगा दिया है और यह बता दिया है कि इस देश का मीडिया कितना गैर जिम्मेदार है। बिना सोचे समझे सिर्फ शक की बिनाह पर देश भर के मीडिया ने डॉक्टर राजेश तलवार ने पर जमकर आरोप लगाए और एक पिता को पुत्री का हत्यारा साबित करने में कोई कसर नहीं छोडी। किसी ने यह नहीं सोचा की आखिर एक बाप बेटी का हत्यारा क्यों होगा और क्यों करेगा वह यह गुनाह।
मीडिया की इस मार का डॉक्टर तलवार के व्यक्तिगत जीवन पर कितना असर पडा है इसका मूल्यांकन करना नामुमकिन है। मीडिया की भयंकर भूल ने एक व्यक्ति के जीवन व चरित्र को कहीं का नहीं छोडा । आखिर कौन जिम्मेदार है इस गैर जिम्मेदारी का। इस देश का मीडिया इतना गैर जिम्मेदार है कि अपनी टीआरपी रेटिंग बढाने के लिए और खबर को ज्यादा से ज्यादा चटकारेदार बनाने के लिए वह ऐसी ऐसी खबरें गढ देता है जिसका कोई आधार नहीं होता। मीडिया की यह गैर जिम्मेदारी आज खुलकर देश के सामने आ चुकी है। हम देख रहे हैं कि किस तरह से आरूषि के हत्याकांड को इस देश का मीडिया परोस रहा है। इस देश के मीडिया को न तो आरूषि से प्रेम है और नहीं डॉक्टर तलवार से हमदर्दी । इसे फिक्र है सिर्फ अपने टीआरपी रेटिंग की और दिनभर चैनलों के आका यह सोचते रहते हैं कि किस तरह किसी न्यूज को सनसनीखेज बनाया जाए। इस बार उनके हाथ आरूषि लगी। इस न्यूज को तमाम चैनलों ने जमकर परोसा और खुलकर बताया बिना यह सोचे समझे की आखिर सच्चाई क्या है। किसी भी चैनल ने इस बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया कि आखिर एक बाप अपनी बेटी की हत्या क्यों करे। चैनलों में हमेशा यही देखा जाता है कि आज कौनसी खबर सबसे ज्यादा देखी गई और कौन सी खबर की रेंटिंग क्या रही।
किसी जमाने में माना जाता था कि मीडिया समाज का दर्पण है यह समाज व राष्ट्र को उसका आईना दिखाता है। आज इस देश का नागरिक यह पूछना चाहता है कि इस भद्दी और बिगडैल मीडिया को उसका चेहरा कौन दिखाए। इस गैर जिम्मेदार मीडिया को अगर समय रहते नहीं रोका गया तो यह उस मदमस्त हाथी की तरह होगा जो पागल होकर जब निकलता है तो न जाने कितनों की जाने ले लेता है। बात सिर्फ राजेश तलवार की नहीं है आज का मीडिया अपनी लाईन व लेंथ से हट चुका हैं। पत्रकारिता में भी नैतिकता नहीं रही । बाजारवाद के इस दौर ने पत्रकारिता को भी व्यवसाय बना कर रख दिया है। पत्रकार अपने चैलन का सेल्समेन है जो दिनभर ऐसी खबरे गढने में व्यस्त रहता है जो ज्यादा से ज्यादा बिक पाए।
डॉक्टर राजेश तलवार को जो सदमा लगा है, उनके चरित्र को गिराने का जो प्रयास हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा। यह सोच कर दिल दहल जाता जाता है कि जिस बाप की बेटी की चिता की राख भी अभी ठण्डी नहीं हुई है उस पर ही बेटी की हत्या का आरोप लगा कर जेल मे डाल दिया जाता है। उसके चरित्र को गिराने के तमाम प्रयास किए जाते हैं। एक सोच कर देखो क्या गुजरी होगी इस बेगुनाह बाप पर। बेटी की याद में रो भी नहीं सका और अगर रोया तो इस मीडिया ने उसके ऑसुओं को भी घडयाली बताया। मीडिया की यह मार डॉक्टर तलवार ने कैसे सही होगी यह तो डॉक्टर तलवार ही जानते हैं। मीडिया का मारा कहीं का नहीं रहता और ये पचास दिन डाक्टर राजेश तलवार को कोई नहीं दे सकता। भगवान आरूषि की आत्मा को शांति दे और प्रार्थना करूँगा की इस देश की पत्रकारिता को नए आयाम दे ताकि इस मदमस्त हाथी पर अंकुश लगाया जा सके और देश व समाज को मदमस्तता मे कर रहे आतंक से बचाया जा सके अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब यह हाथी अपनों को ही कुचल कर खाक कर देगा।
Article by : Shyam Narayan Ranga
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Comments to this Article Good Artical. I think It's ture that media go for self examination., Anurag (13/07/2008 18:06:13)
Koi bap apni beti ka katal kyu kar sakta hai is bare main abhi kuch bhi kehna jaldbaji hogi kyunki abhi Dr. Talwar ko jamant mili hai na ki rihai. hame itna to nispaksh hona padega.
janha tak media ki jimedari ki bat hai to yanha apki bat sahi hai ki sara mamla TRP ka hai lekin koi dekh raha hai isliye TRP badh rahi hai. Ye dekhne wale kon hai ye muje jyada important lagta hai. isliye kewal media ko dosh dena thik nahi hai. arushi or talwar k sath jo kuch bhi hua hai uske liye hamara pura samaj jimmedar hai. ye Hathi koi ek nahi hai. yanha to pure kue main hi bhang pad gayi hai shayad. thx, gopal singh (13/07/2008 22:25:53)
shayam ji aap ki kalam ma husa sachai bhiri ha mediya wolo ko phala sachai ki tha tak jakar kishi news ko tv pa ya newspaper pa dana chahiya ab usko bahguna kara kardiya ha ha to mediya pa sawaliya nisan banjata ha is liya news reader ko humsa phala sachai jankar hi new ko dana chahiya, shankar (14/07/2008 17:55:00)
now in these days media bicome mafia and mafia coudnot seen it what is correct and what is wrong it wll do his work for its profit, shreekantvyas (16/07/2008 13:15:08)
Really nice post..Hakikat sachi baat ahi, jolly (17/07/2008 21:39:49)
Dear Shyam Ji, Thanks a lot for raising this issue. It is very important to discuss this subject at National Level. Electronic Media is doing blunders after blunders and nobody is there to control it. Every one in power has his/her own wated interests, beurocracy has its own agenda and common is busy with the worries of his both end butter & bread. But it can not be tolerated for a long time. People of India will not ignore much.... Only public can control any media or power. We need to spread awareness among the public and highlight such examples repeatedly so that their hearts may awakened. Keep this spirit up Mr. Shyam, all enlightened people are equally concerned about the role of Media in this particular case. MAATI KAHE KUMHAR SE TU KIT RAUNDE MOHI> EK DIN AISA AAYEGA MAI RAUNDUNGI TOHI>, Dr. Trilok C Sharma (21/07/2008 19:26:21)
article is good but agar media ka itna dabaav na hota to shayad aaj itna investigation huva na hota. , guddi vyas (23/07/2008 19:45:17)
that is true because any saw with interseted har koi yue chatah hai kunki kuch sep.. dekna pasand karte hai yua , prinshu (25/12/2008 19:39:31) |