एक जंगल के जलकुंड पर एक मेमना पानी पी रहा था। अभी उसने पानी भी नही पिया था कि एक चीता उधर आया। मेमने को देखकर चीते के मुंह मे पानी आ गया उसने सोचा कैसे न कैसे इस मेमने को खाया जाए। चीता मेमने के पास आया मेमने ने चीते से राम-राम की।
चीते ने गुस्से मे कहा- आज तो तुम मुझसे बच नही पाओगे। मै तो तुम्हें खाऊंगा। मेमने ने कातर स्वर मे कहा-जंगल के राजा मेरा क्या कसूर है जरा बताने की कृपा करे। तुमने १ साल पहले मुझे गाली दी थी चीते ने कहा। पर मै तो ६ महीने का ह मेमने ने कहा।
चीते ने कहा तब तो तुम्हारे बाप ने गाली दी होगी। पर मेरा बाप तो मेरे जन्म के पहले ही लकडबग्गे के हाथो मारा गया।
चीते ने पलटकर कहा- तब तो तुम्हारी मॉ ने गाली दी होगी।
पर मेरी मॉ तो कभी इस जंगल मे आई ही नही वह तो बाडे में बंधी रहती हैं।
चीते ने पलटवार किया फिर भी तुम नही बच सकते क्यो कि मुझे गाली एक भेड ने दी थी तुम भेड के जाए बच्चे हो, इसलिये तुम्हारे जाति भाई की सजा तुम्हे मिलेगी यही जगंलराज का कानून है। मेमना मिमयाता रह गया और चीते ने उसे अपना भोजन बना लिया।
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