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| RSS | 19 March 2010 |
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मेवाड के महाराणा अपने एक नौकर को सदैव अपने साथ रखते थे। भले ही युद्ध के मैदान हो, चाहे भगवान का मंदिर। एक बार वे अपने इष्टदेव एकलिंगजी के दर्शन करने गए। उस नौकर को भी साथ ले लिया। दर्शन कर वे तालाब के किनारे घुमने गए। उन्हें एक पेड पर ढेद सारे फ आम लगे हुए दिखाई दिए। उन्होंने एक आम लिया और उसकी चार फांक बनाई। एक फांक नौकर को देते हुए कहा- ’बताओ, कैसा स्वाद है?‘ नौकर ने आम खाया और कहा बहुत मीठा है। पर महाराज एक और देने की कृपा करें।‘ महाराणा ने एक फांक और दे दी। नौकर ने कहा- ’पाह क्या स्वाद है! म्जा आ गया। मेहरबानी कर एक और दीजिए।‘ Discuss this article on KhabarExpress Forum Comments to this Article Be the first to comment on this Article |
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