घरेलू मैदान में 1-1 से बराबरी पर छूटी श्रृंखला
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की घरेलू श्रृंखला के पहले मैच में मेहमान टीम के हाथों हारने के बाद टीम इंडिया का लाज और ताज गंवा देने का डर, दूसरे मैच में विजयश्री के बाद खत्म हो गया। टीम के संयुक्त प्रयासों से अफ्रीकी शेरों को पटखनी देकर भारत ने इज्जत और नंबर एक की कुर्सी दोनों को बचा लिया।
टीम के पंसदीदा मैदान, ईडन गार्डन में प्रतिद्वंद्वी टीम को खेल के हर विभाग में पछाडकर टीम इंडिया ने घरेलू मैदानों में सिरमौर होने के रूतबे को भी बरकरार रखा। मार्च 2001 में आस्ट्रेलिया के विरूद्ध फॉलोओन खेलकर जीत हासिल करने के बाद, यह दूसरा बडा मौका था जबकि भारत ने न सिर्फ श्रृंखला में वापसी की बल्कि मेहमान टीम को सीरिज जीतने से दूर रखा। इस बार भारत भलेही श्रृंखला जीत न पाया हो, लेकिन यहां की बराबरी उस जीत से कई गुना बडी थी। कोलकाता के मैदान पर खेले गए मैच के पहले दिन से ही टीम इंडिया ने अपनी पकड बनाए रखी। सहवाग, लक्ष्मण, सचिन और धोनी की शतकों ने विरोधी टीम के सामने रनों का ऐसा पहाड खडा कर दिया कि टीम को उबरने का मौका ही नहीं मिला। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और हैदराबाद के विश्वसनीय बल्लेबाज वी वी एस लक्ष्मण ने एक बार फिर अपना सिक्का जमाया तो बाकी का काम पूरा किया भज्जी पाजी ने। मैच के चौथे दिन वर्षा और रोशनी की खलल से जहां भारतीय प्रशंसकों के दिल की घडकनें बढी रहीं, वहीं दूसरी ओर अफ्रीकियों की हार भी एक दिन के लिए टल गई।
दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी कमजोर टीमों के विरूद्ध एकतरफा जीत हासिल करने के बाद, विश्व की दूसरी सबसे मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर पारी की हार ने सबको चौंका दिया। इसने धोनी की कामयाब कप्तानी पारी और भारत की खेल क्षमता पर प्रश्न चिह्न लगा दिया लेकिन टीम इंडिया के सांझा प्रयास ने टीम को श्रृंखला में वापसी कराई और दो मैचों की सीरिज 1-1 से बराबर रहने के बाद टीम ने नंबर वन का ताज बरकरार रखने में सफलता प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका के विश्वसनीय बल्लेबाज हासिम अमला ने भारत की सांसें रोके रखी तो श्रृंखला में सार्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेजबाज होने का श्रेय भी प्राप्त किया। उसे मैन ऑफ द मैच और सीरिज से नवाजा जाना, उसकी श्रेष्ठता का सम्मान था। दूसरी और स्मिथ और अन्य दूसरे बल्लेबाजों का क्षमतानुरूप प्रदर्शन न कर पाना अफ्रीका के लिए घातक सिद्ध हुआ और बढत के बावजूद वे श्रृंखला अपने नाम नहीं कर पाए।
अंततः भारत ने गद्दी, गदा और ईनामी राशि पर कब्जा बनाए रखने में सफलता प्राप्त कर ली है और यह निःसंदेह धोनी के छोटे कैरियर की बडी सफलता है। धोनी की कप्तानी में अब तक खेले गए 13 मैचों में से यह नौंवी जीत थी जबकि अफ्रीका के खिलाफ ही नागपुर की हार अब तक एकमात्र पराजय। अब इसी टीम के खिलाफ तीन एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला होनी हैं और होनी है एक बार ओर श्रेष्ठता की जंग। यह जंग भलेही कोई जीते मगर भारत में खेली गई क्रिकेट ने दर्शकों का दिल जीत लिया है इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है।
-हरि शंकर आचार्य, सहायक सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी, श्रीगंगानगर |