राजा नल की कहानी बहुत पुरानी हैं। इस कहानी के जरिए इस बात को कहने की कोशिश की गई है कि जब मनुष्य के मन में लोभ या लालच बढ जाता हैं तो उसकी बुद्धि का नाश होने लगता हैं। वह अपने लोभ पर अंकुश नहीं लगा पाता और राजा नल की तरह बर्बाद हो जाता हैं। लालच की भावना प्रत्येक व्यक्ति के मन में बैठी होती हैं।
राजा नल बडे प्रतापी राजा थे। वे सर्वगुण सम्पन्न, सदाचारी और प्रजा पालक थे। उनकी कृति की गाथा हर दिशा में गाई जाती थी। पता नहीं एक दिन क्या हुआ कि राजा असावधानीवश शौचादि के बाद बिना पवित्र हुए ही संध्या वंदन करने लगे। राजा जैसे ही अपने नियमों के प्रति सुस्त हुए उनकी बुद्धि मंद हो गई। बुद्धि मंद हुई तो उनके निर्णय प्रभावित होने लगें। एक दिन वे अपने भाई और मित्र राजा पुष्कर के साथ बातों-बातों में जुआ खेलनें बैठ गए। वे हारने लगे इौर हारते ही चले गए। हारने के लिए अपनी पत्नी दमयंती के अलावा कुछ भी शेष नहीं बचा। अपनी पत्नी दमयंती को भी दांव पर लगाने ही वाले थे कि अच्छे विचारों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। उन्हें याद आ गया कि यह वहीं दमयंती है जो उनकी धर्मपत्नी हैं। जब उसके साथ विवाह हुआ था तो आशीर्वाद देने के लिए इन्द्र आदि देवताओं को भी आना पडा था। लेकिन जब तक उनके मन में अच्छे विचार आते, तब तक तो वे अपना सर्वस्व खो चुके थें। जुए में सब हारने के बाद अपना भरा-पूरा राजपाट छोड कर दमयंती के साथ महल से बाहर निकल गए।
प्रजा ने उनको जुआ खेलने से बहुत रोका था। लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। पर अब पछताने के अलावा कोई रास्ता नही था। प्रजा भी प्रिय राजा को दयनीय हालत में देख कर काफी दुखी थे। एक गलत निर्णय ने राजा को बर्बाद कर दिया था। इधर राजा पुष्कर ने अपने नगर में घोषणा कर दी थी कि ’जो कोई राजा नल या उनकी पत्नी दमयंती की किसी भी प्रकार मदद करेगा तो उसे फांसी की सजा दे दी जाएगी।‘ इसलिए राजा नल की चाह कर भी उनकी प्रजा ने कोई मदद नहीं की। तीन दिनों तक अपने नगर में भूखे-प्यासें भटकने के बाद वे जंगल की ओर चल पडे।
एक दिन राजा नल ने कुछ खूबसूरत सुनहरे पंखों वाली चिडया का एक झुंड देखा। उन्हें लगा कि वे सभी सोने के पंखों वाली चिडया हैं जिन्हें पकड कर और उनके पंखों को बेच कर धन कमाया जा सकता हैं। लेकिन बिना जाल के पकडना संभव नहीं था। लेकिन लोभ में राजा ने फौरन अपने वस्त्रों को शरीर से उतारा और उसका जाल बना कर चिडया की तरफ फेंका। वे उनको पकड पाते इसके पहले ही वे जाल के साथ आसमान में उड गई। राजा नग्न अवस्था में रह गए। उन्हें अपने ऊपर काफी शर्म आ रही थी। एक प्रतापी राजा की ऐसी मति भ्रष्ट हुई कि वह नग्न हो गया था। उनके पास तन ढकने के लिए वस्त्र नहीं थे। राजा पश्चाताप करने लगें।
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