www.khabarexpress.com : The news portal of North India
www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In  New user! Sign Up Now | My Favourites (new)
Search Photo  
RSS Feed
23 November 2008
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Election |
Free News on your website
9
Mar
लोक आस्था का प्रतीक: आस्था धाम कैलादेवी

खबरएक्सप्रेस, ९ मार्च, २००७ लोक आस्था का प्रतीक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलादेवी मेला इस वर्ष १६ मार्च से एक अप्रेल, २००७ तक आयोजित होगा। मेला व्यवस्था मंदिर ट्रस्ट कैलादेवी, ग्राम पंचायत एवं करौली जिला प्रशासन के समन्वित सहयोग से की जाएगी। उत्तर भारत के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि वर्तमान में जो कैला ग्राम है वह करौली के यदुवंशी राजाओं के आधिपत्य में आने से पहले गागरोन के खींची राजपूतों के शासन में था। खींचियों के आने से पहले यहां एक छोटा-सा स्थान था जिस पर पीतूपुरा के मीणाओं ने पाटोर चढाकर उसे सन् १११४ में मंदिर का स्वरूप दिया। तब से पीतूपुरा के मीणा परिवार के वंशज देवी का भाव प्रकट करके गोठिया कहलाते हैं। मंदिर के चमत्कार के बारे में सुनकर खींची राजा मुकन्ददास ने सन् १११६ में मंदिर की सेवा, सुरक्षा का दायित्व राजकोष पर लेकर नियमित भोग-प्रसादी और जोत की व्यवस्था करवा दी। खींची राजा रघुदास ने लाल पत्थर से माता का मंदिर बनवाया। कैलादेवी की मुख्य प्रतिमा के साथ जो एक अन्य प्रतिमा विराजमान है वह मां चामुण्डा की है। कैलादेवी का आदिसेवक लांगुरिया को मानते हैं जिसे प्रसन्न कर भक्तजन मां कैला को भी रिझा सकते हैं। लोकगीत लांगुरिया को सम्बोधित करते हुए गाए जाते हैं। काल भैरव जो देवी का गण है को ही लांगुरिया कहा जाता है इसकी प्रतिमा देवी के मंदिर के सामने बनी हुई है। मेले के दौरान महिला एवं पुरूष बडे ही भक्तिभाव से लांगुरिया को रिझाने के लिए गाते हैं- ‘‘चरखी चल रही बड के नीचे रस पीले लांगुरिया’’ । ’’दो-दो जोगनी के बीच घुटवन खेले लांगुरिया‘‘। कैला देवी का अन्य प्रमुख भगत बहुरा भगत है जिसकी प्रतिमा मुख्य मंदिर के सामने स्थापित है। मां कैलादेवी मेले का खास आकर्षण है विभिन्न राज्यों से बडी संख्या में आने वाले पैदल यात्राी। इस अवसर पर छोटा सा कैलादेवी गांव लाखों श्रद्धालुओं से महानगर का रूप धारण कर लेता है। पदयात्राी ध्वज पताकाओं के साथ छोटे-छोटे मंदिर वाहनों पर सजाकर झुण्ड के साथ गाते, बजाते, नाचते, कूदते भावविभोर हकर मां के दरबार में अपनी मुरादें पूरी करने के लिए आते हैं तथा मार्ग में पडने वाले ग्रामवासियों द्वारा पद यात्रिायों की अतिथियों की तरह आवभगत की जाती है। कैलादेवी में यात्रियों की सुविधा के लिए सैकडों धर्मशालाएं बनी हुई हैं तथा २४ घण्टे बिजली, पानी, चिकित्सा, यातायात एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है।




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

Each and every word about astha dham Kaila Devi is correct.But the major problem which every body has to face is power cut and improper water supply in dharamshalas, Shravan Kumar Maheshwari (25/09/2007 20:53:17)


 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 

Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | hindinotes.com