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भाग्यवान किसान

20 May 2008      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

किसान को परेशान हाल देखकर पत्नी के चेहरे पर हवाइयां उडने लगीं। वह मूर्ख पति की बुद्धिमान पत्नी थी। वह घबराई नहीं। तुरन्त गांव के वैद्य ने किसान की हालत देख कर उसे उल्टी होने की दवा दी। कुछ देर बाद उसे उल्टियां होने लगी। उल्टी में कई लोबिये निकलने लगे। यह देखकर सब किसान मूर्खता पर हंसने लगे। स्वस्थ होने पर किसान ने सबसे छोटी लडकी के यहां जाने का विचार बनाया।
अगले दिन वह गिद्ध दामाद के यहां यल पडा। गिद्ध का घर एक पहाडी पर था। बेटी और दामाद किसान को देखकर बेहद प्रसन्न हुए। गिद्ध ने अपनी पत्नी से कहा कि ससुर जी की हम क्या सेवा कर सकते है? पत्नी ने बताया कि पिताजी ने अपने गांव से बाहर बहुत ही कम दुनिया देखी है। इसलिए उनको सैर करवानी चाहिए। पत्नी का सुझाव गिद्ध को जंच गया। ससुर को अपने पंखों में बैठा कर उडने लगा। अजीबोगरीब दुनिया देखकर किसान के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उसे लगा कि वह जीते जी स्वर्ग पहुंच गया है। गिद्ध रोज ससुर को सैर कराने लगा। किसान ने घर वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की, तो गिद्ध ने तुरन्त उसे अपने पंखों में बैठाया और कुछ ही समय में उसे उसके गांव के पास छोडकर वापस चला आया। घर पहुंच कर पत्नी से डींगे हांकने लगा। जैसा उसने देखा था, वह सब पत्नी को कह सुनाया। यह कह कर उसने पत्नी से कहा कि यदि वह भी वैसी दुनिया देखना चाहती है, तो तैयार हो जाए। पत्नी की खुशी का ठिकाना न रहा। उसने नहा धोकर नए-नए कपडे पहने और जल्दी ही बन-ठन कर तैयार हो गई। किसान ने अपने साथ दो सूप और मजबूत-सी दो रस्सियां ली और पत्नी को साथ लेकर पहाड की चोटी की ओर चल पडा। चोटी पर पहुंच कर किसान ने दानों सूपों को अपनी दोनों बगलों में कसकर बांधा। फिर पत्नी से अपनी पीठ पर चढने के लिए कहा। पत्नी ने वैसा ही किया। पीठ पर पत्नी के बैठते ही किसान ने नीचे छलांग लगा दी। अगले ही क्षण वह पत्नी समेत नीचे गड्ढे में जा गिरा। संयोग से उसी समय गिद्ध उडता हुआ उधर आया। उसकी नजर उन पर पडी। वह अपने सास-ससुर को पहचान गया। उसने तुरन्त बंदर और रीछ को खबर दी। वे दानों भी वहां आ पहुंचे। बंदर कहीं से एक जडी खोद लाया। उन दोनों की सांस चल रही थी। बंदर ने उनको जडी सुंघायी। जडी सूंघते ही दोनों होश में आ गए। फिर रीछ ने एक और जडी ढूंढ निकाली। उसको पानी में घिसकर उनके सारे बदन पर लगाया। कुछ समय में दोनों स्वस्थ हो गए। इस बीच बंदर, रीछ और गिद्ध के शाप की अपधि समाप्त हो गई। तीनों के तीनों खूबसूरत नवयुवकों में बदल गए। वे तीनों भाई एक राजा के लडके तीनों अपने राज्य की ओर चल पडे।


 




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