KhbarExpress www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now | My Favourites (new)
UniqueIdea.net Softwares SMS Jokes Poems Story Time Pass Facts
Search Photo  
RSS 22 November 2009
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Cartoon | Video News |
Free News on your website
6
Apr
मिट्टी का माधो नहीं है राज्यपाल
Add comment    Mail     Print    Write to Editor

राजस्थान Shyam Narayan Rangaके राज्यपाल एस के सिंह ने जैसलमेर के उप पंजीयक कार्यालय में जाकर यह साबित कर दिया कि राज्यपाल का पद महज संवैधानिक प्रधान का ही नहीं होता बल्कि वास्तव में अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो वह अपनी सकि्रयता से राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्य को बखूबी निभा सकता है। राज्यपाल महोदय ने यह साबित किया है कि सिर्फ राजभवन में आने वाले मेहमानों की आवभगत करना ही उनका काम नहीं है या मंत्रियों व मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने तक का ही दायित्व उसका नहीं है बल्कि वह अपने तंत्र को संभाल कर उसकी खामियों को देख सकता है। एस के सिंह ने जब से राज्यपाल का पद ग्रहण किया है तब से ही उनकी सकि्रयता ने राज्य के लोगों को अहसास करवा दिया था कि वे एक सकि्रय राज्यपाल हैं। सिंह ने राज्य के कईं मुद्दों पर मंत्रीय के बयानों पर बेबाक टिप्पणी की है और अपनी राय को मजबूती से रखा है। राज्यपाल महोदय ने यह साबित कर दिया है कि वे राज्य में हो रहे कार्यों पर लगातार नजर रख रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुडे मुद्दे पर वे खामोश नहीं रह सकते हैं। राज्यपाल महोदय का यह कदम कुंभकर्णी नींद में सो रहे राज्य के प्रशासन पर करारा तमाचा है और एक सीख प्रदान करने वाला कदम है कि अगर जिम्मेवार पदों पर काम करना है तो अपनी जिम्मेवारी निभानी पडेगी। राज्यपाल एस के सिंह ने समय समय पर राज्य के कईं मंत्रीयों को भी अपनी गरीमा याद दिलाई है। राजस्थान के राज्यपाल अपने इस कदम के लिए धन्यवाद व बधाई के पात्र है और महामहिम राज्य की जनता आपसे उम्मीद करती है कि ऐसे कदमों से राज्य तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
समय समय पर भारत के लोकतंत्र में यह आवाज उठती रही है कि आखिर राज्यपाल के पद का क्या महत्व है। संवधान निर्माताओं ने अपने जिस मंतव्य के साथ इस पद को गढा है, ऐसे राज्यपालों ने संविधान निर्माताओं के उस मंतव्य को साफ किया है। पूर्व में मदनलाल खुराना व अंशुमान सिंह जैसे राज्यपालों ने भी अपनी सकि्रयता के कारण राज्यपाल की भूमिका को बताया था। वर्तमान में एस के सिंह महोदय के इस कदम ने भी भारतीय लोकतंत्र के इस पद को गरिमा व मान प्रदान किया है तथा इसकी प्रासंगिकता को सिद्ध किया है।

श्याम नारायण रंगा




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

Be the first to comment on this Article

 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 
Practice Objective Question for GK
Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
Ready for competition exam - test yourself FREE
Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares