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05 July 2008
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10
Oct
पत्राकारिता की नैतिकता  
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Dr. Nand Kishore Acharyaपत्रकारिता क्या है? मुद्रण - माध्यम हो या वैद्युतिक श्रव्य - दृश्य माध्यम - पत्रकारिता क मूल प्रयोजन अपने समय और परिवेश में जो कुछ घटित होता है, उसे एक व्यापक जन-समूह तक सम्प्रेषित करना होता है। लेकिन सम्प्रेषण का यह कर्म केवल सम्प्रेषण मात्र नहीं रहता क्योकिं यह प्रत्यक्ष जिवन्त और अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण नहीं है जिसमें एक किसी अन्य को आमने-सामने कुछ बता रहा होता है। यन्त्र के हस्तक्षेप और उस के लिए आवश्यक ससाधनों को जुटाने की जरुरत ने पत्रकारिता को - कहें की सम्प्रेषण-कर्म को-एक आर्थिक और प्रबंधकीय क्रीयाशीलता भी बना दिया है। इसलिए पत्रकारिता अब केवल सम्प्रेषण का व्यव्साय हो चली है - घटित हो रहे होने के सम्प्रेषण का व्यवसाय। लेकिन घटित होना केवल घटित होना नहीं होता। क्या घटित हुआ है, यह जानना भी कोई निरपेक्ष जानना नहीं है। हर जानना सापेक्ष जानना है क्योंकि हम जिस माध्यम से और जहाँ से जान रहे होते है, वह हमारे जानने को न केवल प्रभावित बल्कि अक्सर निरुपित भी करता है। इसलिए कोई तथ्य केवल तथ्य नहीं होता बल्कि जब तक हम उसे किसी परिपेक्ष्य में नहीं देखते। किसी भी तथ्य की अर्थवत्ता उस में अन्तर्निहित सत्य में होती है और सत्य तथ्य की व्याख्या है - अर्थात् तथ्य को किसी कोण विशेष से देखना। लेकिन घटित होना केवल घटित होना नहीं होता। क्या घटित हुआ है, यह जानना भी कोई निरपेक्ष जानना नहीं है। हर जानना सापेक्ष जानना है क्योंकि हम जिस माध्यम से और जहाँ से जान रहे होते है, वह हमारे जानने को न केवल प्रभावित बल्कि अक्सर निरुपित भी करता है। इसलिए कोई तथ्य केवल तथ्य नहीं होता बल्कि जब तक हम उसे किसी परिपेक्ष्य में नहीं देखते। किसी भी तथ्य की अर्थवत्ता उस में अन्तर्निहित सत्य में होती है और सत्य तथ्य की व्याख्या है - अर्थात् तथ्य को किसी कोण विशेष से देखना। हम किसी चिकित्सा - संस्थान से यह अपेक्षा नहीं करते की वह स्वस्थ करने के बजाय बीमार रहना उस के व्यवासयिक हित में है। पत्रकारिता को व्यवसाय मानने में कोई आपत्ति नहीं हो सकती यदि वह अपनी व्यावसायिक नैतिकता का निर्वाह करती रहे- यानी तथ्यों की तटस्थ प्रस्तुति और लोकतांत्रीक मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में उनकी व्याख्या करती रहे।


डा नन्द किशोर आचार्य




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Comments to this Article
I am completely agree with this thought, can we hope more from this renowned Hindi Writer of India., Guest (18/05/2007 23:42:15)
very nice and knowledgeble., gopal joshi (28/06/2007 04:35:41)
VERY NICE AND KNOWLEDGEBLE DETAILS MENTIONED BY WRITER., YKGUPTA - CORRESPONDENT  (25/07/2007 00:01:11)
i am agree with this article and a i want to say something like that a journalist may be a flase person.
, tariq sabri (10/08/2007 18:01:27)
,  (11/01/2008 10:34:22)
patrkarita per apke vichaar samagr evam saargarvit hain. patrakarita jese jatil vishe ko saral bhasha main viyakt karna saral karya nahi.
dhayavaad..
Dr.Zulfiqar D-64 medical colony A.M.U.Aligarh 202002, zulfiqar (08/05/2008 20:45:52)
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