
एकदिवसीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी ने कहा है कि सौरव के एकदिवसीय टीम में नहीं होने का टीम पर कोई प्रभाव नहीं है। भारत के इस नौसखिया कप्तान ने स्वंय को अनुभवी खिलाडी की श्रेणी में माना है। २००५ से भारतीय टीम के इस नियमित सदस्य ने सौरव के टीम में नहीं होने की कई खामियां गिनाई है परन्तु धोनी यह नहीं जानते है कि सौरव के पास उनसे कई गुना ज्यादा अनुभव है और पिछले एक कलैण्डर साल में एक हजार से भी ज्यादा रन बनाये है जबकि उनका रिकार्ड सौरव से काफी नीचे है। पूरा देश सौरव को धेानी से कहीं ज्यादा बडा नायक मानता है। ट्वन्टी -२० क्रिकेट टीम के हीरो महेन्द्रसिंह धोनी को पूरे भारत ने सफलता के बाद सर आंखो पर बिठाया है परन्तु धोनी साहब ये इंडिया का क्रिकेट है यह जितना तेजी से ऊपर उठाता है उतनी ही तेजी से जमीन पर ला देता है।
इस बात में कोई दोहराय नहीं कि किसी भी टीम के चयन में कप्तान की राय महत्वपूर्ण होती है परन्तु जब कप्तान अपने से अनुभवी खिलाडयों पर अंगुली उठाता है तो उस कप्तान की योग्यता पर संदेह नहीं करने का कोई कारण बचता नहीं है। जैसी खबरे आ रही है उसके अनुसार धोनी ने सौरव की रनिंग बिटवीन और फिल्डिंग पर सवाल खडे किये है। जब एक खिलाडी एक दशक से भी ज्यादा समय से भारत के लिए क्रिकेट खेल रहा हो तो उसकी योग्यता पर सवाल उठाया जाना बचकाना लगता है वो भी उस समय जब वह जबरदस्त फॉम में चल रहा है। इसके बाद भी कप्तान साहब कह रहे है कि सौरव के टीम में नहीं होने से मीडिया को तकलीफ हो रही है। कप्तान साहब यह बता नहीं सकते कि सौरव के खाते में दर्ज रन मीडिया ने बनाया है अथवा सौरव ने बनाये है। धोनी स्वयं का पिछले दस मैचो मे औसत सौरव से काफी नीचे रहा है और महत्वपूर्ण मौको पर रन बनाने में विफल रहे है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में सौरव मैन आफ द सीरीज रहे थे और हमारे एकदिवसीय क्रिकेट टीम के कप्तान कह रहे है कि उन्हे सौरव की जरूरत नहीं है।
सौरव को टीम में जगह नहीं दिये जाने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि यह भविष्य की टीम है। भविष्य की टीम के लिए वर्तमान को खराब करने का काई कारण नजर नहीं आता है। आस्ट्रेलिया जैसी टीम के विरूद्ध युवा शक्ति के साथ साथ अनुभव की भी जरूरत भी ह। सौरव पिछले कई मैचो में टीम को अच्छी शुरूआत दे रहे है जबकि अन्य सलामी बल्लेबाज विफल हो रहे थे। आस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में भी सौरव का प्रदर्शन शानदार रहा है। जहां तक युवा टीम की बात है। नब्बे के दशक में भारत के पास एक सफल टीम थी उस टीम में युवा खिलाडी को तभी जगह मिलती थी जब कोई अनुभवी खिलाडी असफल होता था । इस कारण उस टीम के प्रदर्शन में निरन्तरता थी। परन्तु अब जब टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करने वाले अनुभवी खिलाडी सौरव, राहुल और लक्ष्मण टीम से बाहर है और इस कारण टीम की सफलता संदिग्ध लगती है।
सौरव मामले पर महेन्द्रसिंह धोनी ने अपनी सीमाओ का अतिक्रमण किया है और इस बडबोलेपन का कारण भारतीय क्रिकेट प्रेमियो द्वारा उसे नायक का दर्जा दिया जाना है परन्त धोनी साहब यह नहीं जानते कि यह इंडिया का क्रिकेट है जहां जीतने पर ताली मिलती है और असफल होने पर गाली मिलती है।
Manish Joshi, Bikaner
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Comments to this Article manishji aapke ye udgar cricket jankaro tatha khelpremiyo ko ek bar phir yeh sochne ko majboor karega ki old is gold , kishan kumar purohit kolkata (10/02/2008 20:27:50)
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