Home > Article >> Short Stories | मूर्खाधिराज
| |
19 May 2008 Add comment Mail
Print Write
to Editor |
एक बार बादशाह अकबर अपने राजमहल में गए। बादशाह को सबसे बडी बेगम उस समय अपनी किसी खास सहेली से बातें कर रही थी। बादशाह अचानक बीच में जाकर खडे हो गए। बेबम हंसती हुई बोली आइए मूर्खाधिराज!
बादशाह को बहुत बुरा लगा, लेकिन बेगम ने इससे पहले कभी बादशाह का अपमान नहीं किया था। बादशाह जानते थे कि बेगम चतुर है। वह बिना किसी मतलब के ऐसी बात नही कह सकती। फिर भी बादशाह यह नहीं जान सके कि बेगम ने आखिर उन्हें मूर्खाधिराज कहा तो क्यों कहा। बेगम से जवाब तलब करना बादशाह को अच्छा नहीं लगाा। थोडी देर वहां रूककर वे अपने कमरे में चल आए।
बादशाह उदास बैठे थे। उसी समय बीरबल उनके पास आए। बीरबल को देखते ही बादशाह ने कहा- आइए मूर्खाधिराज!
बीरबल हंसेर बोले-जी, मूर्खाधिराज! बादशाह ने आंख तरेर कर कहा- बीरबल! तुम मुझे मूर्खाधिराज क्यों कहते हो? बीरबल ने कहा आपने मुझे मुर्ख कहा तो आप हमारे राजा होने से मूर्खाधिराज नहीं तो और क्या हुए। अकबर ने बडी बेगम के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा दिया तो बीरबल ने कहा-जहांपनाह, आदमी पांच प्रकार से मूर्खाधिराज कहलाता है। पहला तो वह जो दो व्यक्ति अकेले में बातें कर रहे हो और वहां बिना बुलाए जा खडा हो। दूसरा वह जो दो व्यक्ति बातचीत कर रहे हो और उसमें तीसरा व्यक्ति बीच में पडकर उनकी बात पूरी हुए बिना बोलने लगे। तीसरा जो कोई किसी को पूरी बात सुने बिना बीच में बोलने लगे। चौथा वह जो बिना किसी गलती के दूसरों को गाली दे और दोष लगाए। पांचवां मूर्खाधिराज वह है जो मूर्ख के पास जाए और मूर्खो की संगत करे। बादशाह बीरबल के उतर से बहुत प्रसन्न हुए। अब उन्हें समझ में आया कि बेगम ने उन्हें मूर्खाधिराज क्यों कहा।
|
| |
|
|
 |
Latest Articles | |
»
»
»
»
»
| |
|
|
 |
Jain Calendar Launched at Terapanth Bhawan, Gangasahar | | More Photo |
|
|