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Nagar Ek - Nazaare Anek ::Souvenir कब तलक लालचंद भावुक संयोजक, राज.प्रगतिषील जन साहित्य संस्थान बीकानेर।
हषती, षोले बताओं, कब तलक बरसाओगे ?
बेषरम होकर इस तरह, कब तलक इतराओगे?
तंग नजदीकी की नही होती है, लम्बी जिन्दगी,
लगाई अपनी आतिष से ही, कब तलक बच पावोगे?
हैरोहरम और चर्च द्वारे, सब अमन के रास्ते है
रास्तो से आदमी को कब तलक भटकावोगे?
यह तुम्हारी बुजदी है, और गाफिल हम नही,
तुम हमारे हौसलों को, कब तलक आजमावोगे?
कुर्बानियाँ जो दे गए है कहता है उनका लहू।
ओ! यजीदों तुम बताओं, कब तलक बच पावेगे?
भाईचारा यह हमारा तवारीख को तसलीम है
बंट की तसवीर लेकर कब तक भरमावोगे?
अब हमारे सब्र का और मत लो इम्तिहान
वार गार हमने किया तो, खाक मे मिल जाओग।
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