|
Nagar Ek - Nazaare Anek ::Souvenir सफाई शुल्क, नगरीय पर्यावरण और नगर निगम डा. विट्ठल बिस्सा प्राचार्य,
बीकानेर की नगर परिशद् क्रमोन्नत हो कर नगर निगम बन गई है। यह तथ्य हम नागरिकों को गौरावान्वित करता है। लेकिन नगर की समस्या आज भी वही है। हर नागरिक सफाई चाहता है, प्रकाष व्यवस्था चाहता है, अच्छी सडक और अच्छी गलियां चाहता है। स्वच्छ हवा मे सांस लेना चाहता है। हमारे नगरीय पर्यावरण में जल, हवा और भूमि ही तो सम्मिलित है। इन्ही से हम प्रभावित होते हैं और इन्हे ही हम प्रभावित करते है। हमें इस तथ्य की जानकारी है कि गंदगी मच्छरों और अनेकानेक रोगों का कारण है। इस तथ्य की जानकारी के बावजूद भी हम अपने नगर की नालियों में पॉलिथिन और अन्य कचरा डालने से नही चूकते। परिणाम होता है नालियों का ओवरफ्लों। घर का कचरा बेहिचक गलियों और सडकों पर फैंक देते है। इन सब बातों से हमारे नगर की सडके, गलियां और नालियां ही नही अपितु हमार नगरीय पर्यावरण भी प्रदूशित हो रहा है। गंदी बस्तियों की समस्या भी नगरीय पर्यावरण को दूशित बना रही है। आखिर पर्यावरण तो वही है जो हम निर्मित करते है और वही हमारे चारों और विद्यमान है।
हमारी आदत हो गई है कि हम गंदगी के लिए अपने नगरीय निकाय को कोसते है लेकिन अपनी प्रवृति मे कोई परिवर्तन लाना नही चाहते है। हमने ही अपनी आदतों, लापरवाहियों से नगरीय पर्यावरण को बिगाडा है। हमारे नगरीय निकाय के पास सीमित संसाधन है और निकाय की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ नही है। चुंगी और गृहकर समाप्त हो जाने से नगरीय निकाय की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। अब राज्य सरकार और भी दयनीय हो गई है। अब राज्य सरकार ने सफाई षुल्क का प्रावधान किया है, यदि हम नागरिकों ने सफाई षुल्क देने मे ना-नुकर नही की तो यह निकाय को संबल प्रदान करेगा।
एक नागरिक के नाते आओ हम सभी संकल्प ले कि
१. हम नालियों मे कचरा नहीं डालेंगे,
२. पोलिथिन का प्रयोग नही करेगें,
३. नगरीय पर्यावरण को स्वच्छ बनाने मे अपना हर संभव योगदान देंगे
४. सफाई के लिए नगरीय निकाय को सफाई षुल्क सहृदय देगें।
५. सविंधान मे उल्लिखित पर्यावरण के प्रति अपने मूल कर्त्तव्य का भली भांति निर्वहन करेगें।
Discuss this topic on KhabarExpress Forum
|
|
|