दुनिया मे प्रत्येक धर्म मे अपने विष्वास और आस्था के अनुरूप उस सर्वषक्तिमान जिसे ईष्वर, अल्लाह, वाहेगुरू इत्यादि नामों से जाना जाता है कि इबादत के लिए इबातगाहों का निर्माण किया जाता है। जहां उस धर्म का अनुयायी पूर्ण मनोयोग से अपने मालिक को याद करता है।
5- इस्लाम में अल्लाह तआला को याद करने और उसकी इबादत करने के लिए बने विषेश स्थान को मस्जिद कहते है जहां नमाजी दिन मे पांच बार नमाज अदा करते है और खुदा के समक्ष अपने को समर्पित करते है। मस्जिद वो खास जगह है जहां सूकून और इत्मीनान के साथ पूरी तल्लीनता के साथ नमाजी दिन में पांच बार नमाज तो अदा करते ही है, कुआर्न की तिलावत भी करते है। मस्जिद को अल्लाह का घर कहा जाता है।
6- बीकानेर षहर जिसे पूरी दुनिया में आपसी भाईचारे और सद्भाव की अनूठी मिसाल के रूप मे जाना जाता है मे रियासत काल से मस्जिदों का अस्तित्व देखने को मिलता है। बीकानेर षहर मे स्थि मस्जिदों की फेहरिस्त बनाने व कुछ मस्जिदों के विशय में सतही जानकारी बहुत कम समय मे जुटाने की बहुत छोटी सी कोषिष अपने स्तर पर की है। अतःइस प्रयास को पूरा नही कहा जा सकता क्योंकि यह कार्य दरअस्ल षोधपरक है तथा प्रमाणित तथ्य जुटाने के लिए बुजुर्ग व्यक्तियों से बातचीत और ऐतिहासिक दस्तावेज के अवलोकन की दरकार होती है और जाहिर है कि इन सबके लिए बहुत अधिक वक्त की जरूरत होती है। अतः इस आलेख को सतही जानकारी परक कहना ज्यादा मुनासिब होगा।
7- यद्यिप इसी दरम्यान यह महत्वपूर्ण जानकारी भी हासिल हुई कि बीकानेर के जनबा मोहम्मद फयाज अब्बासी साबह बीकानेर की मस्जिदों और दरगाहों पर षोधपरक जानकारी एकत्रित कर ‘तवारीखें मसाजिद बीकानेर‘ नामक किताब षाया करने की दिषा में प्रयासरत है। जनबा फयाज साहब तथा अन्य स्त्रोतो से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीकानेर मे स्थित मस्जिदों के नाम 8- जामा मस्जिद, मोहल्ला व्यापारियान, बीकानेर
9- मोहल्ला चूनगरान मस्जिद, बीकानेर
10- मोहल्ला न्यारियान मस्जिद, बीकानेर
11- मोहल्ला कुरैषियान मस्जिद, बीकानेर
12- हाजी दीदार बक्षजी मस्जिद, डीडू सिपाहियान, बीकानेर
13- डीडू सिपाहियान मस्जिद, नया षहर, बीकानेर
14- तेलियान मस्जिद, तेलीवाडा, बीकानेर
15- मदीना मस्जिद, मोहल्ला भिष्तियान
16- मर्कजी मस्जिद, मोहल्ला तेली लोहारान,
17- मोहल्ला छींपान मस्जिद,
18- मोहल्ला दमामियान मस्जिद,
19- चूडीगरान मस्जिद,
20- उस्तो की पुरानी मस्जिद मोहल्ला उस्तान,
21- उस्तो की नई मस्जिद मोहल्ला उस्तान,
22- चढवों की मस्जिद, बीकानेर
23- साबरी मस्जिद घोबी तलाई
24- हैदरी मस्जिद गोपेष्वर बस्ती
25- ईदगाह परदेसियों की मस्जिद सादुल कॉलोनी,
26- मस्जिद औधोगिक क्षेत्र
27- मस्जिद बज्मे अदब व्यास कॉलोनी
28- मोहल्ला खटीकान मस्जिद
29- लालगढ वर्कषाप मस्जिद
30- मुस्तफा मस्जिद सर्वोदयबस्ती
31- मुस्तफा मस्जिद बंगला नगर
32- मोहल्ला गुजरान मस्जिद
33- हुसैनी मस्जिद चौखूटी
34- नूरानी मस्जिद रानीसर बास
35- तेलीयान नई मस्जिद फड बाजार
36- गैरसरियान मस्जिद
37- मोहल्ला पजाबगिरान मस्जिद
38- मोहल्ला पजाबगिरान नई मस्जिद
39- भुट्टों की मस्जिद, भुट्टों का बास, बीकानेर
40- म्दानी मस्जिद, भुट्टा कोरियान, कब्रिस्तान एफसीआई गोदाम के पास
41- रामपुरा बस्ती मस्जिद
42- मुक्ता प्रसाद मस्जिद
43- अरबियान मस्जिद
44- सिलावटों की मस्जिद सर्वोदय बस्ती
45- नाइयों की मस्जिद, सुभाशपुरा
46- घडसीसर मस्जिद
47- खान कॉलोनी मस्जिद
कायम नगर मस्जिद
अहमदिया मस्जिद प्रताप बस्ती
कायमखानी मस्जिद कुचीलपुरा
नई मस्जिद इन्द्रा कॉलोनी
कोरियों का बास मस्जिद
षेखों की मस्जिद
देसवाली तेलिसान मस्जिद
पठानों की मस्जिद
मस्जिद तिलक नगर
चौपदारों की मस्जिद
महावतान मस्जिद
फरासान मस्जिद
सिपाही माहवतान मस्जिद दाऊजी मंदिर
मस्जिद ब्रान्दा बास
मस्जिद रंगरेजान
हमालों की मस्जिद
लोहार कॉलोनी मस्जिद
तयब मस्जिद चूगी चौकी
ख्याजा कॉलोनी मस्जिद
मस्जिद कादरी कॉलोनी
बिसायतियों की मस्जिद गुलजार बस्ती
हिरण बाजो की मस्जिद
मस्जिद मदरसा सुलेमानिया रहमानिया सब्जी मण्डी
मस्जिद करमीसर
मस्जिद गुजरान कब्रिस्तान
सिपाहियों की मस्जिद, बीदासर बारी
पटटी पेडा सिलवटों की मस्जिद रानीबाजार
यह स्वाभाविक है कि कुछ मस्जिदों के नाम यहां दर्ज होने से रह गये हो कुछ ऐतिहासिक मस्जिदों की संक्षिप्त जानकारी तहरीर करना भी मुनासिब होगा।
जामा मस्जिद -
यह मस्जिद बीकानेर की पुरानी मस्जिद में षुमार होती है इस मस्जिद का निर्माण आज से लगभग २००-२५० वर्श पूर्व माना जाता है। यह मस्जिद लाल पत्थर की खूबसूरत इमारज है। लाल पत्थर दुलमेरा मे लाए थे।इस मस्जिद में एक बडा मीनार है। इस मस्जिद के पहले इमाम दीतूमियां साहब थे। वर्तमान में जनबा मौलाना गुलाम अहमद फरीदी साहब इस मस्जिद के इमाम है। जो पीढी दी पीढी परम्परागत रूप से इस फर्ज की अदायगी कर रहे है।
मस्जिदयह मस्जिद भी बीकानेर की पुरानी मस्जिदों में गिनी जाती है। जिसका निर्माण काल लगभग दो सौ पचास वर्श पूर्व माना जाता है। यह मस्जिद सुनहरी मस्जिद के नाम से भी जानी जाती है। मस्जिद में हजरत पीर महबूब बख्ष चिष्ती (र.अ.) का मजार भी है। इस मस्जिद के पहले इमाम जनबा पीर इमामुदीन साहब थे। वर्तमान मे पीर हकीम पीर बख्ष चिष्ती साहब इस मस्जिद के पिछले साठ वर्शो से इमाम है। इस मस्जिद मे भी इमामत परम्परागत रूप से पीढी दर पीढी है।देषवाली तेलियान मस्जिद तेलीवाडा -रियासत काल में यह मस्जिद चार सौ साल पहले कसाईयों की मस्जिद के नाम से जानी जाती थी लेकिन रियासत काल मे उन्हे परकोटे से बाहर विषाल जमीन आंवटित की गई जहां उन्होने अपना पृथक मोहल्ला बसाया जिसे मोहल्ला व्यापारियान के नाम से जाना जाता है। इन चार सौ सालों के दरम्यान ही देषवाली तेली तेलीवाडा में आकर बसे थे उसके बाद इस मस्जिद को देषवाली तेलियान तेलीवाडा के नाम से जाना जाने लगा।
उस्ता की मस्जिद -उस्ता जाति के लोग अपने आपको मुल्तानी लुहार भी कहते है। इनका मानना है कि इनके पूर्वज राव बीकाजी के साथ आये थे। इसलिये उस्तों का मोहल्ला भी बडा बाजार मे स्थित है क्योंकि नगर का निर्माण ही यहां से हुआ है।
उस्ता जाति के लोग हस्त कला में काफी निपुण है। यह भी पुरानी ऐतिहासिक मस्जिदो में षुमार होती है।
चौबदारों की मस्जिद -यह भी परकोटे में स्थित है। इस मस्जिद को कुछ लोग पुरानी मस्जिद के नाम से जानते है। यह जाति बहादुर सिपाही जाति कहलाती है। चोबदारों की मस्जिद ६ मोहल्लों की मस्जिद कही जाती थी।
अरबियों की मस्जिद -यह मस्जिद भी पुरानी मस्जिद मे आती है। ऐसा माना जाता है कि कुछ व्यापारी घोडे बेचने के लिए बीकानेर आते थे। यह मस्जिद उनके द्वारा बनाई गई थी।
मदीना मस्जिद
यह मस्जिद मोहल्ला भिष्तियान में स्थित है। बीकानेर की प्रसिद्ध मस्जिद है। यह षहर में स्थित है। मस्जिद में घंटाघर लगा हुआ है चार मीनार व तीन गुम्बज बने हुए है। मस्जिद में पाचों वक्त की नमाज का वक्त बताने वाली ऑटोमेटिक घडी भी लगी हुई है। लोग अनके जगह से इस मस्जिद को देखने आते है। इस मस्जिद को बने २५० वर्श हो गये है।
मर्कजी मस्जिद ः
यह मस्जिद मोहल्ला तेली लोहारान में स्थित है। यह मस्जिद भी पुरानी मस्जिदों में गिनी जाती है। इस मस्जिद का निर्माण १८३५-३७ के लगभग हजरत बहाब साहब ने किया।
अपनी बात को पूरी करने से पहले यह गुजारिष करना फिर से मुनासिब जान पडता है कि इस आलेख में दर्ज जानकारियों से भी इतर महत्वपूर्ण जानकारियां तथा बीकानेर की मस्जिदों के सबंध मं बहुत से तथ्य उपलब्ध हो सकते है किन्तु समयाभाव के कारण आलेख को विस्तृत फलक प्रदान नही किया जा सकता अतः उम्मीद है कि पाठकगण इसे अन्यथा नही लेग।
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