अपने रिटायरमेंट के पैसों से उसने शहर में तीन कमरो का एक छोटा सा मकान बनवाया था। दो कमरों में उसके बेटे बहू रहते थे। एक छोटा सा कमरा उसके पास था। उसे किताबे पढने का शौक था, इसलिए एक छोटी लाइब्रेरी भी कमरे में बना ली। पिछले चार महीने से वह अपने बेटे बहू के बुरे व्यवहार के कारण गांव के पुश्तैनी मकान में रह रहा था। इस दौरान उसके पास बेटे बहू के कई पत्र आ चुके थे। उनमें एक ही बात बार बार लिखी थी वह शहर का अपना कमरा अब अपने पोते को दे देवें। उसे पोते से प्यार था। वह अब कॉलेज में पढ रहा था। उसने भी लिख दिया था कि वह कमरा उसके पोते के लिए ही हैं।
आज वह शहर के मकान में आया तो स्तब्ध रह गया । उसका कमरा खाली किया जा रहा था। बेटे और बहू ने उसके आने का इंतजार भी नही किया था। सामान बिखरा पडा था। फर्श पर किताबे बिखरी थी। उन पर चिडिया के घोसले के तिनके और धूल जमा थी। उसकी पत्नी को चिडियो से बहुत प्यार था। उसके कमरे में दो घोंसले थे। जब चिडिया के अंडे देने का समय आता तो पत्नी एक जच्चा की तरह उसकी देखभाल करती थी। पत्नी की मृत्यु के बाद उसने भी पत्नी की याद में उन घोंसलों को हटाया नही था, लेकिन आज दोनो घोंसलें जमीन पर पडे थे। एक बिखरा हुआ, दूसरा साबुत। चिडिया चींचीं करती व्याकुल होकर कमरे के चक्कर काट रही थी ।
उसने साबुत घोसलें को उठाया और बाहर लॉन में एक पेड की टहनियो के कोटर में उसे ले जाकर रख दिया। फिर वह किताबों पर बिखरी धूल और तिनकों को साफ कर किताबों का गठ्ठर बनाने लगा। सामने दीवार पर लगे उसकी पत्नी के फोटो को हटाकर एक कने में डाल दिया था। उसके स्थान पर एक अभिनेत्री का अर्धनग्न फोटो लगा था। उससे रहा नही गया। उसने बहू से कहा, ’यह फोटो तुम्हे दीवार पर क्या तकलीफ दे रहा था?‘ बहू ने कहा-’बाबूजी हम कमरे को न्यू लुक देना चाहते हैं। मम्मी का फोटो ओल्ड कॉस्ट्यूम में हैं, मैच नही करता।‘ आगे बात करना व्यर्थ था। अंत में उसने अपनी पत्नी का फोटो को उठाया और चलने को हुआ तो बहू ने कहा ’बाबूजी देख लीजिए। आपका कुछ और तो नही बचा?‘ उसने भरी आंखो से कहा ’नही बहू अब मेरा यहां कुछ भी नही बचा।‘ इतना कहकर वह तेजी से कमरे से बाहर निकल गया।
लॉन में उसने एक दृष्टि पेड पर डाली । घोंसला वहां सुरक्षित था। उसके पास ही चिडिया शांति से बैठी थी। उसने मन ही मन कहा ’मेंरा घोंसला तो उजड गया लेकिन मुझे खुशी हैं कि समय पर आकर मैने तुम्हारा घोंसला बचा दिया।‘ टहनी पर बैठी चिडिया टुकुर टुकुर उसे जाते हुए निहारती रही।
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