दुनियां की सबसे खूबसूरत इबादत है नूर - ए-ताजमहल,
हसींनों- दीवानों का इक ख्वाब है नूर - ए- ताजमहल,
कितना निर्मल, कितना पावन, कितना सुखद लगता है जैसे चांदनी धवल
जैसे पतझड में खिली हो नई कौंपल, जैसे बिन पानी के बरसे बादल
दिल को छू लेता है, अहसास अपना कराता है पावन - पावन
दर्दे दिल को बयां करता, हर तन को लगता है मनभावन
पत्ते पे गिरी पहली ओंस की बूंद है, नूर -ए- ताजमहल
सीप से निकला मोती है, नूर -ए- ताजमहल
सूरज की पहली किरण है, नूर -ए- ताजमहल
चांद की सी शितलता है, नूर -ए- ताजमहल
दुनियां का अजूबा है, नूर -ए- ताजमहल
दीवानों का सरताज है, नूर -ए- ताजमहल
इक खूबसूरत इमारत है, संगेमरमर की नूर -ए- ताजमहल
इक सबूते बयां है, दीवानों की चाहत का नूर -ए- ताजमहल
अगर नूर -ए- ताजमहल नष्ट हो जाएगा,
बिखर जाएंेगे सबके सपने, प्रेम नष्ट हो जाएगा,
ना रहेगी फिर प्यार की ये हसीं दास्तां
ना रहेगी फिर चेहरे पर किसी के मुस्कां
आज जरूरत है नूर -ए- ताजमहल को बचाने की
प्यार के दीवानों के दिलों में इक अलख जगाने की
प्रण करलो दोस्तों, नूर -ए- ताजमहल को बचायेंगे
वरना महल तो खण्डहर होगा ही , नूर -ए- ताज कहां से लाऐंगे
- अनिल भार्गव(झुन्झुनूंवाला)