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फोटोग्राफी का शौक बन गया पैशन
बनवारी लाल सिंगला ने फोटोग्राफी को न केवल अपना प्रफेशन बनाया बल्कि उसे अपना जुनून भी बना लिया। उनके इसी जुनून की वजह से शहर के लोग जब कभी गुडगांव में हुए पुराने आयोजनों की याद ताजा करना चाहते हैं, तो सीधे उनके पास चले आते हैं। ओल्ड गुडगांव के सिंगला पिछले साठ सालों से फोटोग्राफी से जुडे हुए हैं। उनके पास न केवल पुराने फोटो का अच्छा खासा कलेक्शन है बल्कि पुराने कैमरों का भी काफी अच्छा... गांधी मेला - महात्मा गांधी को समर्पित दशकों पुराना एक अनूठा मेला..... संदर्भः 12 फरवरी 2010 हर साल 12 फरवरी को गांधीवादियों का अनुष्ठान राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के सरहदी आदिवासी बहुल दक्षिणांचल के गांधीवादियों के लिए 12 फरवरी का दिन किसी उत्सव से कम नहीं होता। बांसवाडा और डूंगरपुर जिले के मध्य समन्वय और सौहार्द का उद्घोष करने वाले माही, सोम और जाखम सलिलाओं के पवित्र जल संगम तीर्थ बेणेश्वर पर दशकों से हर वर्ष 12 फरवरी को यह एक ऐसा अनूठा मेला जुटता...संदर्भ - जयंती 23 जनवरी 2010
23 जनवरी 1897 की सायंकाल उत्कल प्रांत की कटक नामक नगरी में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ । उनके पिता जानकीदास बोस थे व माता का नाम था श्रीमती प्रभावती देवी । पाँच वर्ष की आयु में बालक सुभाष का अक्षरारंभ संस्कार संपन्न हुआ । वे कटक के मिशनरी स्कूल मे पढते थे । ग्यारह वर्ष में उन्होने आर. कालेजियट स्कूल में प्रवेश लिया । यहीं उनका अपने शिष्य बेनी प्रसाद जी से सम्फ हुआ । इनके राष्ट्रीय विचारों और व देशभक्ति से... Yes, that is what Prabha Chaturvedi (resident of D-2/4 Paper Mill Colony, Lucknow) is lovingly known as in the circle of her friends and well wishers. A very socially committed person, she started an anti-garbage movement in 1993, with the support of a small group of women volunteers and her husband. During the course of her crusade for removal of roadside garbage, cleaning and de-silting of overflowing drains, she became a familiar figure at the local municipal office. She would often bang at their doors, forcing them to do their duty sometimes. At other times her complaints... प. दीनदयाल उपाध्याय के विचार में राष्ट्र के विकास में सास्कृतिक राष्ट्रवाद की भुमिका पुण्यतिथि विशेष विलक्षण बुद्धि, सरल व्यक्तित्व एवं न्ातृत्व के अनगिनत गुणों के स्वामी , प. दीनदयाल उपाध्याय जी की हत्या सिर्फ 52 वर्ष की आयु में 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय के पास रेलगाडी म यात्रा करते समय हुई थी। उनका पार्थिव शरीर मुगलसराय स्टेशन के वार्ड में पडा पाया गया। भारतीय राजनीतिक क्षितीज के इस प्रकाशमान सूर्य ने भारतवर्ष में सभ्यतामूलक राजनीतिक विचारधारा का प्रचार एवं प्रोत्साहन करते हुए अपने प्राण राष्ट्र को समर्पित कर दिया। अनाकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी दीनदयालजी उच्चकोटि के दार्शनिक थे।किसी...समाज सेवा में अहर्निश जुटे हैं स्वतंत्रता सेनानी मास्टर सूरजमल 92वें जन्म दिवस ( 20 अप्रेल 2008) पर विशेष स्वतंत्रता सेनानियों की गरिमापूर्ण श्रृंखला में एक महत्त्वपूर्ण शख्सियत हैं, जनजातीय अंचल बांसवाडा के मास्टर सूरजमल। बहुत ही सामान्य परिवार में जन्मे मास्टर सूरजमल में राष्ट्रीय चेतना का विस्तार पिता शंकरलाल एवं उनके मित्रों की आपसी चर्चा सुन-सुन कर होता गया। शिक्षा सुविधा के अभाव में केवल मिडिल तक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद वैचारिक क्रांति की लहरे अल्प आयु में ही उन्हें आँदोलित करने लगी। जलियाँवाला बाग काण्ड और भगत सिंह, राजगुरु तथा चंद्रशेखर आजाद को फांसी दिये जाने की खबर ने आग में घी...शरद टाक
जहां मीरां की वजह से मेडता विश्व विख्यात है वहीं यहां के जाये-जन्में निर्माता-निदेशक के.सी. बोकाडिया ने देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई। इसी कडी में मेडता के रहवासी एस अमन ने अपनी जादुई आवाज से देश भर में अपनी पहचान स्थापित की है। हर मंच के माध्यम से अमन का संदेश आम जन तक पहुंचाना अमन के लिए एक पवित्र मिशन की तरह है।
जिस तरह सोना आग में जलकर भी अपनी कीमत नहीं खोता है बल्कि निखर कर कु न्दन बन जाता है। ठीक उसी तरह...
Born in Calcutta on 16th November 1952, Dr. Om Kumar Harsh possesses three research degrees, namely Ph.D, D.Sc. (Physics) and Master of Electronics Engineering by research from Australia. He has also completed three Masters Degrees namely in Physics, Engineering (Australia by research as mentioned) and Computer Science (Australia). He also holds a post graduate diploma in Instrumentation from Australia. In addition, Dr. Harsh has also guided half... मंजिले उनको मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता, हौंसलों से ऊँची उडान होती है।
ये पंक्तियाँ बीकानेर की रश्मि दवे पर चरितार्थ होती है। चाँद रतन दवे और अरूणकला दवे की पुत्री रश्मि बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी थी और लगन की पक्की थी। जिद्दी रश्मि के मन में जो काम करने की इच्छा हो जाती उसे पूरा करके ही दम लेती थी। रश्मि अपनी कक्षा में हमेशा से ही प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुई है।... बीकानेर की इस धरती को इसका गर्व है कि यहां क्रान्तिकारी कॉ. शौकत उस्मानी जैसे क्रान्तिकारी पुरूष ने जन्म लिया। मनुष्य की पहचान उसके कर्मों से होती है और इस कसौटी पर शौकत उस्मानी एक असाधरण और साथ ही उद्देश्यपूर्ण व्यक्ति सिद्ध होते हैं। वे अडिग स्वतंत्रता सेनानी, सतत् संघर्षशील, अक्टूबर क्रान्ति को बचाने वालों में अग्रिम पंक्ति के योद्धा, सर्वहारा-चिंतन के दार्शनिक और हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार थे। जिस उपनिवेशवाद में कानून की शह पर ही हर जुल्म पलता था, उसे नेस्तानाबूद करने...
युवा अवस्था में चार बार हज करने का मौका मिला और चारों बार भारतीय चिकित्सा दल के मुख्य संयोजक के तौर पर सेवाऍं दी।
भ्रष्टाचार से सीधा सामना हुआ और राज्य स्तरीय सम्मान के लिए तीस प्रतिशत की मांग की गई।
१५ अगस्त २००४ को बीकानेर के जिला प्रशासन द्वारा श्रेष्ठ डॉक्टर के रूप में करणीसिंह स्टेडियम में सम्मानित हुए।
डॉ बी डी कल्ला के हाथों से बीकानेर रत्न अवार्ड मिला।
विभिन्न... जनकवि से तात्पर्य है जो जन के अनुभव रूपी भव को साहित्यिक जन ही नहीं वरन् आम जन की वाणी में जन के हितार्थ ही प्रयोग करे। हिन्दी साहित्य के इतिहास में जनकवि की पदवी से विभूषित कविगणों की सूची अधिक लम्बी नहीं है।
जनकवि हरीश भादाणी उन विरल कवियों में शुमार है जिन्हें समूचा साहित्य संसार इस पदनाम के साथ स्वीकार करता है।
११ जून १९३३ के दिन बीकानेर में जन्मे हरीश भादाणी का बचपन असामान्य वातावरण में गुजरा । क्योंकि जन्म के बाद पिता ने सन्यास... पिछले सदी का पाँचवा दशक(1950-60) देश मे विकास के दौड की शुऊआत थी। आजादी के बाद देश मे योजनाबंध विकास का माहौल बना था।
इस नये वातावरण मे सरकार के साथ अन्य संगठन ने तथा भिन्न विचारधारा के चिन्तको ने भी अपना योगदान प्रारंभ कर दिया था। सरकार से भिन्न सरकार के सहयोग से विकास के कार्य को आगे बढाने वालो मे गांधी विचार से जुडे व्यक्तियो एव संस्थाओ की प्रमुख भूमिका थी।
यदि नाम गिनाना चाहे तो आचार्य विनोबा भावे एव श्री जयप्रकाश नारायण का नाम सबसे ऊपर है। इनसे जुडे रचनात्मक सस्थाओ की...
डॉ नन्द किशोर आचार्य
जन्मः ३१ अगस्त १९४५
शिक्षाः एम.ए. इतिहास एवं अंग्रजी साहित्य, पीएच.डी.इतिहास
व्यवसायः एवरीमेंस वीकली में पत्राकारिता। स्कूल में अध्यापन एवं प्रौढ शिक्षण के बाद १९७६ से २००२ तक रामपुरिया कॉलेज, बीकानेर में इतिहास विभाग के अध्यक्ष।
साहित्यिक पत्राकारिताः ‘चिति’ कविता द्वैमासिक का सम्पादन, ‘नया प्रतीक’ में सहायक सम्पादक। पाक्षिक ‘अरूभरू’ और...
Nand Kishore Acharya
Writer
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खीचड को डॉक्ट्रेट की उपाधि घोटालों की बारात निकालीआवेदकों की सूची चस्पा करने की मांग महिलाओं का होगा सम्मान पानी आपूर्ति को लेकर हाय तौबा खुले में ले जा रहे कचरा मंच ने की सुराज के लिए बैठक रेडियोग्राफर्स ने किया कार्य बहिष्कार जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता 25 को चिकित्सा योग शिविर 21 मई से बीकानेर की आवाज पोस्टर का विमोचन एक दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न कलक्टर ने किया व्यवस्थाओं का निरीक्षण पेंशन महा अभियान की समीक्षा9 कुण्डीय यज्ञ का आयोजन |