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RSSThursday, May 23, 2013




Philosophy

बीकानेर शहर के अभिवादन के तरीके

अभिवादन करना एक सहज बात है। जब एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से मिलता है या कोई दोस्त, कोई रिश्तेदार किसी दूसरे व्यक्ति या रिश्तेदार से मिलता है तो वह अभिवादन से ही अपने बात की शुरूआत करता है। अभिवादन से यह भी पता चलता है कि अभिवादन करने वाले का सामने वाले व्यक्ति से क्या संबंध है। अभिवादन व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान भी कराता है। राजस्थान के शहर बीकानेर में भी भाँति भाँति के अभिवादन प्रचलित है जो बीकानेरवासियों की जीवनशैली और चरित्र की पहचान करवाता है।...

समाज बदलने की मुहिम में जुटी है हजारों महिलायें

8 - मार्च महिला दिवस पर विशेष आबू रोड, जहाँ एक ओर लोग भौतिकता की दौड के साथ नित नये दिन अपनी जीवनशैली में परिवर्तन कर रहे हैं। वहीं पिछले 74 वर्षों से हजारों महिलाये नैतिकता का पाठ पढाते हुए बेहतर समाज की परिकल्पना साकार करने की मुहिम में जुटी हुई हैं। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, विश्व की पहली ऐसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था है जिसका संचालन महिलायें करती हैं। मानव जीवन से बुराईयों को दूर करने तथा मानवीय मूल्यों को आत्मसात करते हुए एक मिसाल कायम की है। ब्रह्माकुमारीज...

Deepawali: The Festival Of Lights

The nights are laden with the intoxicating smell of the white flowers of ‘queen of night’. There is a rosy nip in the morning air, hinting at the approaching winters. The granaries are brimming with the recently harvested rice crop. For many businesses, the traditional (not the official) new financial year is about to begin. So what could be a more auspicious time to worship ‘lakshmi’ the goddess of wealth, and ‘ganesha’ the elephant god who removes all hurdles from our lives, than the festival...

प्यार क्या कहूं क्या नहीं कहूं

प्यार एक एहसास जिस शब्द का लब पर आते ही सारे शरीर का रोम रोम थिरक उठता है। क्या है ये प्यार। किस बला का नाम है प्यार। वास्तव में किसे कहते हैं प्यार। बहुत बार सोचता ह कि आखिर क्या है प्यार। परन्तु उत्तर नहीं मिलता कभी लगता है कि आकर्षण है प्यार कभी लगता है कि खिंचाव है प्यार, लेकिन वास्तव में क्या है प्यार समझने की कोशिश करता ह तो समझ नहीं पाता और समझ भी जाता ह कि क्या है प्यार। आत्मा की गहराई है प्यार आस्था...

सेक्स : भारतीय दृष्टि - डॉ. संतोष आचार्य

भारतीय परम्परा में सेक्स के विषय को लेकर खुली चर्चा करने से परहेज किया जाता रहा है, क्योंकि भारतीय समाज इस पूर्वमान्यता से ग्रसित है कि सेक्स एक ऐसा विषय है जो हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों को आघात पहुंचाता है। वस्तुतः भारतीय समाज सेक्स शब्द को ही पाप, अपराध और गंदगी का सूचक मानता है। यदि कोई दुस्साहस करके इस विषय को स्पष्ट करना या समझना चाहता है तो उन दोनो पर ही  कामुक और अश्लील और पापी की मोहर लगा दी जाती है, जबकि हकीकत यह है कि सेक्स विषय न तो संस्कृति और सांस्कृतिक...

घोटालों की बारात निकाली
खीचड को डॉक्ट्रेट की उपाधि
आवेदकों की सूची चस्पा करने की मांग
महिलाओं का होगा सम्मान
खुले में ले जा रहे कचरा
मंच ने की सुराज के लिए बैठक
पानी आपूर्ति को लेकर हाय तौबा
रेडियोग्राफर्स ने किया कार्य बहिष्कार
जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता 25 को
चिकित्सा योग शिविर 21 मई से
बीकानेर की आवाज पोस्टर का विमोचन
एक दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न
कलक्टर ने किया व्यवस्थाओं का निरीक्षण
पेंशन महा अभियान की समीक्षा
9 कुण्डीय यज्ञ का आयोजन

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