Home > Article >> Inspiration Context | फूल तोडना भी हिंसा है
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21 Feb 2008 Add comment Mail
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गांधीजी एक बार किसी गांव में भाषण देने गये। गांववासियो ने उनके स्वागत के लिए फूलो की माला तैयार कर रखी थी।
गांधीजी ने फूलमालाएं देखी तो भाषण के प्रारंभ मे बोले- यदि आप लोगो ने फूलो के हार पहनाने के बजाय सूत का बना हार मुझे पहनाते तो मै बहुत प्रसन्न होता क्योकि सूत से बाद मे वस्त्र बन सकते थे, जबकि पुष्प व्यर्थ चले जाएंगे। इनकी शोभा तो वृक्षो के संग है इनको तोडना ठीक नही। पुष्पों को तोडना सूक्ष्म हिंसा है।
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