Tuesday, 12 December 2017

राजस्थान मंडप ः हुनरमंद हाथों से निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों का खजाना


समृद्ध इतिहास, कला, संस्कृति का अनूठा संगम राजस्थान मंडप पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगाये जा रहे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में बराबर अपनी धाक जमाये हुए है। राजस्थान पेवेलियन की शान देश विदेश के विभिन्न मण्डपों से अनूठी है। इस व्यापार महाकुंभ में प्रदेश की बहुरंगी कला एवं संस्कृति के विभिन्न पक्षों को बहुत ही जीवंतता के साथ राजस्थान के हुनरमंद शिल्पकारों ने उजागर किया है। अपनी बेजोड़ एवं अनूठी स्थापत्य कला से चमकते-दमकते राजस्थान मंडप को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में अपने सर्वश्रेष्ठ एवं बेहतरीन प्रदर्शन के लिए एक से अधिक बार स्वर्ण , रजत, कांस्य और अन्य पदक मिल चुके हैं।

       नई दिल्ली के प्रगति मैदान में व्यापार मेला को देखने के लिए उमड़ने वाले जन सैलाब में आने वाला लगभग हर व्यक्ति राजस्थान मंडप को देखे बिना व्यापार मेला के अपने सफर को अधूरा मानता है। मण्डप की आभा दर्शकों का मन मोह लेती है और इसका हवेलीनुमा भव्य स्वरूप दर्शकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। मण्डप के बाहरी स्वरूप को संजाने संवारने के लिए राजस्थान की विभिन्न चित्र शैलियों के कलाकार अपने बेजोड़ फन का ऎसा जादू बिखेरते हैं कि दर्शक इन नयानाभिराम चित्रों के दृश्यों को अपलक देखने को मजबूर हुए बिना नहीं रहते। मण्डप के शानदार झरोखे, जालीदार गोखड़े, कलात्मक द्वार के दोनों ओर प्रदेश के हुनरमंद हस्तशिल्पियों की कलाकृत्तियों को प्रदर्शित करने वाले आंगन दर्शकों को मोहित करते हैं।

       प्रगति मैदान में राजस्थान मण्डप की संरचना एक भव्य हवेलीनुमा भवन के रूप में की गई है, जो कि पूरी तरह से प्रदेश की स्थापत्य कला को प्रतिबिम्बित करती है। मण्डप का मुख्य द्वार जो कि जयपुर के आमेर महल के गणेशपाल की प्रतिकृत्ति है, इस प्रवेश द्वार पर जयपुर शैली की चित्रकारी की गई है। मुख्य द्वार के दोनों ओर व्यापार मेला की थीम के अनुरूप पैनल्स प्रदर्शित किए गये हैं। थीम एरिया का प्रमुख आकर्षण भरतपुर के मोतीमहल की कलात्मक झांकी है । जालीनुमा कलाकृत्तियों से विभिन्न रंगों एवं कॉंच की सुनहरी नक्काशी से सजे-धजे मोतीमहल की नयनाभिरामी इस झांकी के आगे खड़े होकर दर्शक फोटो खिचवाते नजर आ रहे हैं।

       मंडप के मध्यभाग में राजस्थान के पर्यटन स्थलों एवं पर्यटन उत्पादों पर केन्दि्रत खूबसूरत झांकी दर्शकों का मन मोह रही है। मण्डप के ऊपरी भाग एवं पृष्ठभाग में राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री के काउंटर हमेशा की तरह आगुन्तकों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। वही पिछले द्वार को भी राजस्थान की परम्परागत चित्र शैली और उदयपुर की सुप्रसिद्ध सहेलियों की बाड़ी प्रांगण के रूप में सजाया गया है। मंडप की जालीनुमा खिडकियां इस भव्य एवं आकर्षण मण्डप की शान बढाती है। अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए प्रगति मैदान में दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बने हुए ‘राजस्थान मंडप’ में राजस्थानी हस्तशिल्प का खजाना समाया हुआ है।

 

 

मण्डप की विषय वस्तु (थीम)

 

भारतीय व्यापार संर्वद्धन प्राधिकरण (आई.टी.पी.ओ.) द्वारा इस वर्ष के लिए रखी गई थीम ’’समावेशी विकास’’ के अनुरूप राजस्थान मंडप को राज्य सरकार की नोडल एजेंसी राजस्थान लघु उद्योग निगम के प्रबंध निदेशक श्री भास्कर चटर्जी और मंडप निदेशक श्री रवि अग्रवाल के मागदर्शन में चिरंजन संस्थान के श्री रंजन खन्ना द्वारा तैयार किया गया है । राजस्थान मंडप हर वर्ष की तरह इस बार भी विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, क्योंकि राजस्थान को हस्तशिल्प के क्षेत्र में देश ही नहीं पूरी दुनियां में अव्वल प्रदेश माना जाता है।

       राजस्थान के विश्व प्रसिद्व हस्तशिल्प उत्पादों को मण्डप में विशेष स्थान दिया गया है। इनमें देश-विदेश में धूम मचाने वाले राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों, राजस्थान प्रिंट की जग प्रसिद्व साड़ियों, राजस्थान की हस्तशिल्प वस्तुओं, कलात्मक खिलौनों, सजावटी सामान, फर्नीचर आदि को प्रमुखता सेे दर्शाया गया है। साथ ही राजस्थान की बहुरंगी कला, संस्कृति, समृद्ध इतिहास और परम्परागत हस्तशिल्प कला के साथ ही पर्यटन उद्योग और सेवा के क्षेत्र में प्रगति को दर्शाया गया है। मण्डप में विशेषकर पंचायतीराज, शिक्षा, तेल एवं खनिज विकास, जयपुर मेट्रो, महिला स्वंय सहायता समूह आदि क्षेत्रों को विशेष रूप से उभारा गया है। राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको) आदि विभागों की प्रदर्शनियाँ लगाई गई हे। मण्डप में राज्य की बेजोड़ पेंटिग्स अपना जलवा बिखेर रही हैं और मंडप में विशेष रूप से बनाये गये शिल्प आंगन में जहां सिद्धहस्त प्रदेश के शिल्पी मौके पर ही अपने हुनर का नायाब प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं प्रदेश के मेवाड़, ब्रज एवं मेवात, शेखावाटी, ढूंढाड़, हाड़ौती, मारवाड़, बीकांणा आदि विभिन्न क्षेत्रों की हस्तशिल्प कला को भी जगह-जगह प्रदर्शित किया गया है राज्य के हस्तशिल्पियों के लिए मण्डप में बनाया गया यह ‘‘शिल्प आंगन’’ इस बार भी राजस्थान मंडप का विशेष आकर्षण है।

       मण्डप में इस बार प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के मोरारका फाउण्डेशन की ओर से ’’आर्गेनिक फूड’’ का प्रदर्शन करने के लिए विशेष स्टॉल लगाये गये हैं। मण्डप में प्रदर्शनी और केंद्रीय स्थल पर पर्यटन विभाग की कलात्मक हवेलीनुमा झॉकी दर्शनीय है। मण्डप के पृष्ठ भाग में राजस्थान के स्वादिष्ट व्यंजनों में मशहूर तिल पापड़ी, बीकानेर की नमकीन-भुजिया-पापड़ के साथ ही अन्य खाने-पीने के स्टॉल्स के साथ ही राजस्थानी गीत एवं संगीत की मधुरता लिए वीणा कैसेट्स का स्टॉल्स दर्शकों को आकर्षित करने वाला है।

       राजस्थान मंडप के निदेशक श्री रवि अग्रवाल बताते हैं कि व्यापार मेले में राजस्थान मंडप के जन आकर्षण का केन्द्र होने का प्रमुख कारण मण्डप का विविधताओं से परिपूर्ण होना है। इसमें राजस्थान की समृद्ध कला,संस्कृति और इतिहास के साथ-साथ हस्तशिल्प कलाओं का भरपूर समावेश है। निगम के प्रबंध निदेशक श्री भास्कर चटर्जी की प्रेरणा से राजस्थान के दूरदराज क्षेत्रोें सेें काफी संख्या में हस्तशिल्पियों एवं उद्यमियों ने मण्डप में भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया है । मंडप में ‘राजस्थानी फर्नीचर’ का आकर्षण भी कम नहीं है। खासकर राज्य का पेंटेट फर्नीचर जिसमें किशनगढ़, बाड़मेर, जोधपुर, शेखावाटी, पतरा फर्नीचर, मेटल प्लेटिंग एवं ब्रास पर महीन कलाकारी और हस्तशिल्प युक्त फर्नीचर, लेदर पर काशीदाकारी और कलात्मकता से भरपूर फर्नीचर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और देश-विदेश के ग्राहकों का दिल जीत रहा है। इन सभी से ऊपर ‘‘राजस्थानी आभूषणाें’’ का आकर्षण है, जिसमें बेशकीमती  एवं सेमी-प्रेशियस, बहुमूल्य पत्थरों से निर्मित आभूषण, कुंदन आर्ट, थेवा कला, कांच एवं चांदी के आभूषण, नाथद्वारा की थे्रड ज्वैलरी के साथ ही चांदी और कुंदन से बनी श्रृंगार सामग्री सभी को आकर्षित कर रही है। जयपुर की ब्ल्यू पोट्री, मोलेला (नाथद्वारा) का टेराकोटा, संगमरमर (मार्बल) की कलाकृत्तियां, कलात्मक मूर्तियाँ और अन्य सजावटी सामान आदि भी दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।

       मंडप में राजस्थान के हस्तशिल्प सामान की अच्छी बिक्री भी हो रही है। विशेषकर हल्के वजन एवं गर्म मिजाज की जयपुरी रजाईयों, राजस्थानी प्रिंट की साड़ियों तथा अन्य वस्त्रों के साथ राजस्थान के मीना एवं लाख की चूड़ियाँ, श्रृगांर के अन्य साजो-सामान और राजस्थानी मोजड़ियों (जूतियाँ) की मांग सबसे अधिक है। इसके अलावा राजस्थान की तिल पापड़ी ,गजक, बीकानेर के मशहूर पापड़, नमकीन- भुजिया, डिब्बा बंद मिष्ठान, चूर्ण, मसाले, सूखी सब्जियां कैर सांगरी और राजस्थानी व्यंजनों आदि के साथ ही जयपुर डेयरी के दुग्ध उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है।

 

 

लाख की चूड़ियाँ का आकर्षण

 

       मंडप के थीम एरिया में लाख की चूड़ियॉं बनाने के जीवंत प्रदर्शन को देख ‘राजस्थान मंडप’ में आने वाली महिलाएं आकर्षित हो रही हैं। साढ़े पांच हजार साल पुरानी महाभारतकालीन मानी जाने वाली ‘लाख कला’ को जयपुर से लेकर आये हस्तशिल्पी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए है। हस्तशिल्पी बताते है कि कौरवों ने पाड़वों को जलाने के लिए जिस ग्रह का निर्माण किया था, वो लाक्षाग्रह ‘लाख’ से ही बना हुआ था। वे बताते है कि लाख की चूड़ी बनाने में सिर्फ लाख का उपयोग किया जाता है। लाख पेड़ से उत्पन्न होती है। इसमें किसी तरह का कोई कैमिकल इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लाख के साथ जूट का उपयोग करके भी आभूषण बनाये जाते है।