एक किसान था दुर्गादास। वह धनी किसान होते हुए भी बहुत आलसी था। वह न अपने खेत देखने जाता था, न खलिहान। सब काम वह नौकरों पर छोड देता था। उसके आलस से उसके घर की व्यवस्था बिगड गई। उसको खेती में हानि होने लगी। गायों के दूध-घी से भी उसे कोई अच्छा लाभ नह होता था। एक दिन दुर्गादास का मित्र उसके घर आया। मित्र ने दुर्गादास के घर का हाल देखा। उसने यह समझ लिया कि अपने मित्र की भलाई करने के लिए उससे कहा-मित्र! तुम्हारी विपति देखकर मुझे बडा दुःख हो रहा है। तुम्हारी दरिद्रता को दूर करने का एक सरल उपाय मैं जानता हूं। दुर्गादास ने कहा-वह उपाय तुम मूझे बता दो। मैं उसे अवश्य करूंगा।
मित्र ने कहा-सब पक्षियों के जांगने से पहले ही मानसरोवर पर रहने वाला एक सफेद राजहंस पृथ्वी पर आता है। वह दोपहर दिन चढे लौट जाता है। यह तो पता नहीं कि वह कब कहां आएगा। पर जो आदमी उस सफेद हंस के दर्शन कर लेता है, उसको कभी किसी बात की कमी नहीं होती है। आलसी दुर्गादास बोला-कुछ भी हो, मै। उस हंस के दर्शन अवश्य करूंगा। मित्र चला गया। दुर्गादास दूसरे दिन बडे सबेरे उठा। वह घर से बाहर निकला और हंस की खोज में खलिहान में गया। वहां उसने देखा कि एक आदमी उसके ढेर से गेहूं अपनें ढेर में डालने के लिए चुरा रहा है। दुर्गादास को देखकर वह लज्जित हो गया और क्षमा मांगने लगा। खलिहान गाय का दूध दुहकर अपनी पत्नी के लोटे में डाल रहा था। दुर्गादास ने उसे डांटा। घर पर जलपान करके हंस की खोज में वह फिर निकला और खेत पर गया। उसने देखा कि खेत पर अब तक मजदूर आए ही नहीं थे। वह वहां रूक गया। जब मजदूर आए तो उन्हें देर से आने का उसने उलाहना दिया। इस प्रकार वह जहां गया, वहीं उसकी कोई-न-कोई नुकसान होते रूक गया।
सफेद हंस की खोज में दुर्गादास प्रतिदिन सबेरे उठने और घूमने लगा। अब उसके नौकर ठीक काम करने लगे। उसके यहां चोरी होना बंद हो गया। बहले वह रोगी था। अब प्रातः भ्रमण से उसका स्वास्थ्य भी ठीक हो गया। जिस खेत से उसे दस मन अनाज मिलता था, उससे अब पचींस मन मिलने लगा। गोशाला से दूध बहुत अधिक आने लगा। एक दिन फिर दुर्गादास मित्र उसके घर आया। दुर्गादास ने कहा-मित्र! सफेद हंस तो मुझे अब तक नहीं मिला, किंतु उसकी खोज में लगने से मुझे बहुत लाभ हुआ है। मित्र हंस पडा और बोला-परिश्रम ही वह सफेद हंस है। परिश्रम के पंख सदा उजले होते है। जो परिश्रम न करके अपना काम नौकरों पर छोड देता है, वह हानि उठाता हैं और जो स्वयं परिश्रम करता है तथा जो स्वयं अपने काम की देखभाल करता है, वह सम्पति और सम्मान पाता है।