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अचानक मौसम में आए बदलाव के कारण राजस्थान प्रांत में फैले आरक्षण नामक रोग का प्रकोप आज भी जारी है । आरक्षण एक संक्रामक रोग है । यह रोग कुछ जातिगत,संकीर्ण विचारों वाले संक्रामक वाईरस के सम्फ में आने से फैलता है जो एक जाति के उत्थान में सिमट कर अन्य लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है । लक्षण ः- आरक्षण नामक रोग में रोगी चिडचिडा हो जाता है । उसकी सहनशक्ति क्षीण हो जाती है। भूख का न लगना, अत्यधिक पसीना बहना, प्यास का न लगना, जीभ का सूखना, मरने - मारने पर उतारू होना, पत्थरों से खेलना व तोड-फोड करना, रास्ता जाम करना, रेल की पट्टरी उखाडना, आग लगाने व मार -काट पर उतारू होने जैसे गम्भीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं । रोकथाम ः- उच्च प्रशासन को चाहिए कि ऐसी बीमारी फैलने से पहले ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर ऐसी भयावह स्थिति से निपटने का इंतजाम करें ताकि जान - माल की क्षति से बचा जा सके और प्रदेश के विकास की ओर ध्यान अग्रसित किया जा सके । आरक्षण नामक बीमारी से बचाव के लिए रोगी को हर छः माह में आर्थिक स्थिति पर आधारित आरक्षण एन्टीबॉडीज ‘‘ एएए ‘‘ का टीका लगवा लेना चाहिए । साथ ही रोगी को समझाईश, आपसी सौहार्द, भेदभाव न करने, सबके हित की सोचने जैसी नामक दवाईयां समय - समय पर लगातार एक अभियान के रूप में पिलाते रहनी चाहिए । अक्सर देखने में आता है कि इस रोग में १५ वर्ष से ७० वर्ष के व्यक्ति ही चपेट में आते हैं । अतः जरूरत है कि इस बीमारी का समय रहते ईलाज किया जाएं वरना धीरे-धीरे हर जाति, वर्ग, समुदाय में फैलकर कैंसर का रूप धारण कर लगी, जिसका ईलाज सम्भव नहीं है और यह बीमारी रोगी को काल के गाल में समा लेती है । साथ ही प्रशासन को हर जिले में इन बेमौसम फैलने वाली बीमारी के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित करना चाहिए । जिससे आमजन में फैली इस भयावय बीमारी के डर को दूर करने व उनमें जागरूकता फैलाने के आवश्यक कदम उठाये जा सके ।
- अनिल भार्गव(झुन्झुनूंवाला)
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