सुप्रीम कोर्ट ने आज आंध्रप्रदेश के राज्यपाल श्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा एक कांग्रेसी कार्यकर्ता के अपराध क्षमादान के निर्णय को रदद् कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल व राष्ट्रपति को दिया गया क्षमादान का अधिकार उनका विशेषाधिकार नहीं है। न्यायालय उनके द्वारा किए गए फैसले की समीक्षा कर सकेंगे। इन दिनों अफजल को क्षमादान दिए जाने के संवेदनशील मुददे पर पूरे देश में को मत सामने रहे हैं। एक पक्ष का मामला है कि बुद्द,गांधी की इस धरती पर मानवता व करुणा जैसे मूल्यों के प्रसार के क्रम में हमें अफजल को माफ करना चाहिए। जिससे उस जैसे अनेक लोगों में राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता व पश्चात के भाव उत्पन्न होंगे। इस तरह हम गांधी के उस सच को भी अक्षरश: सच साबित कर दिखाएंगे कि पाप से घृणा करो पापी से नही।
लेकिन दूसरा पक्ष "जैसे को तैसे" के सिद्दान्त पर चलने की दुहाई दे रहा है। उनका मानना है कि जहर को जहर से ही काटा जा सकता है। अत: अफजल जैसे अपराधियों को फांसी की सजा से कम द्ण्ड दिया ही नहीं जाना चाहिए। उनको दिया गया क्षमादान मानवता के लिए अभिशाप है।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हमें शुकून देने वाला है। क्योंकी अक्सर क्षमादान अधिकार के साथ दुर्घटना यह होती है कि राजनीतिक या गैर सरकारी संगठनों या विभिन्न प्रकार के दवाब समूह अपनी-अपनी राजनीतिक लाबी के जरिये अपने-अपने चहेतों की कारगुजारियों के बदले इनाम के रुपए में राष्ट्रपति या राज्यपाल से क्षमादान करवा कर व्यापक समाज के हितों की अनदेखी करते हैं। जिससे राजनीति के अपराधीकरण की प्रक्रीया को बल मिलता है। अब जबकि इन पदों पर आसीन व्यक्तियों निर्णय की समीक्षा को सकेगी तो इससे एक फायदा यह् होगा कि क्षमादान का अधिकार 'बंदरबाट' की भांति बंट नहीं पाएगा। राजनीतिक प्रताडना व दुर्व्यवहार से कोई किसी निर्दोष को दोषी भी नहीं बना पाएगा। साथ ही दोषी व्यक्तियों के राजनीतिक सम्पर्क अब उन्हें किसी प्रकार की छूट नहीं दे सकेंगे।
न्यायपालिका का यह निर्णय ऐसे समय पर आया है कि जहाँ राष्ट्र दो राहे पर खडा था। अब रास्ता साफ है। राज्यपाल व राष्ट्रपति इस निर्णय के बाद अपने अधिकार का इस्तेमाल निष्पक्षता पूर्ण तरीके से करने को बाध्य होंगे। क्योंकि निर्णय के पुनर्समीक्षा की तलवार हर समय उनके फैसले पर लटकती रहेगी। यह निर्णय इस तथ्य की भी बानगी है कि जब-जब राष्ट्र अन्तर्द्वन्द्व से घिरता है, तो न्यायपालिका अपने न्याय के जरिये समाज को सही दिशा में कदम बढानें में सहायता करती रही है।