फूलों से ही बगियां होगी चमन, बेटियों से ही जग होगा रोशन
मेरी प्यारी बिटियां, है फूलों की एक बगियां,
हंसती है तो लगता है दुनियां की हंसी है वो,
चलती है तो लगता है , हिरण की सी चंचलता है उसमें ,
नन्हीं सी, प्यारी सी, शोख चंचल अदाएं हैं उसकी ।
कभी इठलाना, कभी मचलना,कभी रोना, कभी हंसना, ऐसी अदाएं है उसकी
इक गुलाब की पंखुडी के बीच, अनार के दाने जैसी उन्मुक्त हंसी है उसकी।
उसके आने से ही जिन्दगी मेरी खुशहाल है ।
लेकिन औरत के अस्तित्व के मिट जाने का मलाल है ।
बेटी तो वैष्णोरूपी,बहुरूपी, शक्तिस्वरूपा व सर्वगुणसमपन्न है ,
इसके असित्व को बचाए रखना एक अहम सवाल है ।
वरना मिट जाएगी ये सारी दुनिया,
तबाह हो जाओगे तब सोचोगे अरे ! ये क्या बवाल है?
त्याग, ममता, करूणा, निर्भयता, बलिदान इसके ही नाम हैं ।
फिर बेटी क्यूं जन्म लेने के लिए बदनाम है ।
कहते हैं बेटी अभागी है, पराया धन होती है ।
बदल डालों इन संकीर्ण विचारों को,
क्योंकि बेटी तो अनमोल होती है ।
कहते हैं कि कन्या भ्रूण हत्या पाप है,
समझता वो भी है जो लडकी का बाप है।
लेकिन औरत ही औरत की दुश्मन बन बठी है,
औरत ही अपने अस्तित्व को मिटाने वाली सांप है ।
उठो, जागों ए इन्सानों, हमें बेटी को बचाना होगा,
जग को बताना होगा, जग को बचाना होगा ।
- अनिल भार्गव (झुन्झुनूंवाला)
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