Home > Article >> Hindu Fast and Festival | शीतला षष्ठी
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17 Aug 2008 Add comment Mail
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यह व्रत माघ मास की कृष्ण की षष्ठी तिथी को रखा जाता है इस दिन स्त्रियाँ ठण्डे ताजे जल मे स्नान करती है । भोजन भी ठंडा ही करा जाता है । इसका महत्व बंगाल प्रान्त में अधिक है । शीतला माता की षोडशोपचार पूजा करके पापो के दमनार्थ प्रार्थना की जाती है ।
कथाः किसी व्यापारी के सात पुत्र थे । सातो विवाहित थे परन्तु सन्तान किसी के भी नही हुई । एक वृ¬द्ध स्त्री कहने पर व्यापारी की पत्नी एव सातो पुत्र बधुओ ने शीतला माता का षष्टी के दिन व्रत किया। शीतला माता के व्रत के प्रभाव से सातो पुत्र बधुएँ पुत्रवती हो गई । अगली षष्टी को व्यापारी की पत्नी शीतला माता का व्रत करना भूल गई और गर्म जल में स्नान कर गर्म भोजन ग्रहण कर लिया । पुत्रवधुओ ने भी ऐसी ही किया । फलस्वरूप रात्रि में उसे स्वप्न आया कि उसका पति स्वर्गवासी हो गया । वह स्वप्न देखकर रोने चिल्लाने लगी । पास पडोस के व्यक्ति रोना चिल्लाना सुनकर उसके घर में एकत्र हो गए । पडोसियो ने उसे पगली करार दे दिया । व्यापारी की पत्नी पगली सी चिखकर वन मे चली गई । वहाँ उसे एक वृद्धा मिली जो उसी की ज्वाला मे तडंप रही थी । वह वृद्धा स्वयं शीतला माता थी वृद्धा ने व्यापारी की पत्नी से ज्वाला शान्त करने के लिए शरीर पर दही मलने को कहा । दही के लेप करने से उसके शरीर कि ज्वाला शान्त हो गई । वह बहुत पश्चाताप् करने लगी और प्रार्थना करने लगी । इस पर देवी ने प्रसन्न होकर उसकी पति को जीवित कर दिया ।
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