Home > Article >> Short Stories | शराब के तीन गुण
| |
15 Jun 2008 Add comment Mail
Print Write
to Editor |
एक ठिकाने में ठाकुर साहब रहते थे। उनके एक ही कुंवर था पर वह बडा शराबी था। बीडी, सिगरेट, शराब उसके लिए रोटी-पानी थे। कुछ दिनों के बाद वह शराबखोरी में चलते बीमार पड गया। ठाकुद ने अपने पुत्र की बहुत चिकित्सा कराई, पर बीमारी का कोई अंत नहीं आया। सारी दवाइयां बेकार गई। ऐक दिन उस गांव में अनुभवी हकीम आया। उसने ठाकुर के लडके की चिकित्सा प्रारंभ की।
कुंवरजी ने पूछा- परहेज क्या रखना होगा? हकीम ने कहा-घबराओं मत, तुम्हें शराब नहीं छोडने पडेगी। यह सुनकर कुंवर बडा खुश हुआ। उसने कहा- पहले जितने भी हकीम आए, वे सभी अनाडी थे। उन्होंने दवाई के साथ शराब छोडने को कहा था, पर आप बहुत समझदार और अनुभवी है। कुंवर के मन में हकीम के प्रति गहरा विश्वास हो गया। थोडे दिन के बाद लडके ने हकीम से पूछा- आपने मुझे शराब-सेवन की अनुमति कैसे दी?‘ वैद्य बोला शास्त्रों में शराब के तीन गुण बताए हैं। जो मनुष्य शराबी होता है उसके घर में चोर नहीं आते, उसे पैंदल नही चलना पडता बुढापे का शिकार नही होना होता।
कुंवर ने आश्चर्य से पूछा-कैसे? हकीम बोला- नशेडी को खांसी हो जाने से रात्रि में नींद नहीं आती। वह रात भर खांसता रहता है। अतः चोरों को उसके घर पर जाने की हिम्मत नहीं होती। उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है जिससे पैदल नही चल सकता। इसलिए उसे सवारी का सहारा लेना पडता है। उसकी मृत्यु जवानी में ही हो जाती है, जिससे बुढापे का मुंह नही देखना पडता। हकीम की बातों को सुनकर कुंवर ने शराब सहित सारे व्यसन छोड दिए और धीरे-धीरे स्वस्थ हो गया।
|
| | | Comments to this Article | | v.p.o.Nagoki,dis&Teh Sirsa Hariyana India, shankar lal aalria (2008-08-29 17:21:18) | |
|
|
 |
Latest Articles | |
»
»
»
»
»
| |
|
|
 |
Jain Calendar Launched at Terapanth Bhawan, Gangasahar | | More Photo |
|
|