इस समय भारतीय उपमहाद्वीप में शीत का मौसम है और भारत, पाकिस्तान , श्रीलंका और बांग्लादेश ठंड की जकड में है। इस शीत में कश्मीर और आस पास के क्षेत्रा में बर्फ गिरती है। भारतीय उपमहाद्वीप में भारत में ऐसे रमणीक स्थान ज्यादा है जहा बर्फ गिरती है। बर्फ गिरने के सुदंर दृश्य भारत में कश्मीर, शिमला, कोडाईकनाल और हिमालय की तलहट्टी में बसे शहरो और ग्लेशियरो में देखे जा सकते है। यह मौसम होता है शीतकालीन खेलो का । भारत में ऐसे खेलो के लिए स्थान और वातावरण उपलब्ध होने के बावजूद ये खेल परवान नहीं चढ पाये है। स्कीइ्रर्ग जैसे खेलो को फिल्मो में ही ज्यादा देखा जाता है। वास्तविकता में यह केवल शौकिया तौर पर ही खेले जाते है। इस कारण शीतकालीन खेलो में भारत की भागीदारी न के बराबर होती है।
बर्फ के खेल अलग ही रोमांच पैदा करते है। बर्फ गिरने के समय जब बर्फ पर मानव अठखेलियां करता है तो खेलने वाले और देखने वाले दोनो को आनंद आता है। भारत मे ये खेल अभी तक शौकिया स्तर पर ही है। इसे पर्यटन के रूप में लिया जाता है। सर्दियों के मौसम में देशी और विदेशी पर्यटको के लिए सम्बन्धित पर्यटन विभाग और होटलो के समूह द्वारा ये खेल आयोजित किये जाते है। इसमें बडी संख्या में पर्यटक भाग लेते और होटल उद्योग इससे अच्छा खासा लाभ कमाते है जबकि यूरोप में शीतकालीन खेलो को अन्य खेलो की तरह ही लिया जाता है। इसकी अलग से प्रतियोगिताऐं भी आयोजित होती है। शीतकालीन ओलम्पिक को वे ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक की तरह ही महत्व देते है। भारत में ऐसे खेलो की प्रतियोगिताऐं आयोजित तो की जाती है परन्तु ये प्रतियोगिताऐं मात्र पयर्टन के लिहाज से ही आयोजित की जाती है। यदि कही पेशेवर रूप में आयोजित की जाती है तो इसमें भागीदारी बहुत कम होती है और यूरोपियन स्तर से बहुत नीचे के स्तर की होती है। फिर भी यह नहीं कहा जा सकता है कि भारत में शीतकालीन खेल निम्न स्तर पर है। पर्यटन के तौर पर इसे अच्छा खासा समर्थन मिलता है। भारत का उच्च वर्ग शीत के मौसम में हिल स्टेशनो पर शीतकालीन खेलो का आनंद लेने के लिए जाता है। हिल स्टेशनो पर स्नो स्कीईग करते हुए सैकडो लोगो की भीड को देखा जा सकता है। हालांकि ये नियमित खिलाडी नहीं होते है परन्तु इसमें भरपूर उत्साह देखा जा सकता है।
शीत कालीन खेलो में स्कीईग के अलावा, आईस हॉकी, क्लाईम्बिग और जिमनास्टिक आदि के खेल शामिल किये जाते है। इन खेलो में भारत में पेशेवर रूप नहीं लेने का प्रमुख कारण यहां का मौसम है। भारत में इसके लिए हर साल उपयुक्त मौसम नहीं हो पाता है। जबकि आईस हाक्ी जैसे खेलो में बर्फ की पूर्ण उपलब्धता आवश्यक है। भारतीय पेशेवर खिलाडयों को इसके लिए ऊचे ग्लेशियर पर जाना पडता है जो काफी मंहगा साबित होता है। फिर भी भारत के सम्बन्धित संगठनो को थोडा प्रयास कर शीतकालीन ओलम्पिक खेलो में भागीदारी के लिए प्रयास करना चाहिए है। स्नो स्कीईग जैसे खेलो में भारत भाग ले सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए। सबसे बडी बात यह होनी चाहिए कि इन खेलो की लागत कम की जानी चाहिए ताकि मध्यम वर्ग भी इन खेलो से जुड सके। इससे भारत में शीतकालीन खेलो का तेजी से विकास हो सकता है। मध्यम वर्ग रूचि रखते हुए भी इन खेलो का आनंद केवल देखकर ही लेता है क्योंकि वे इसे वहन नहीं कर सकते है। अतः यह ज्यादा से ज्यादा लोगो के लिए सुलभ हो, ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए।
भारत में शीत कालीन खेल भले ही पेशेवर स्तर पर न हो परन्तु जब यहां की वादियों में बर्फ गिरती है तो लोगो का उत्साह देखते ही बनता है। हिल स्टेशनो पर पर्यटक इस मौसम में बर्फ पर अठखेलिया करने के लिए मचल उठते है। वे इस मौसम में खो जाना चाहते है। एक बार फिर कश्मीर और अन्य भारतीय ग्लेशियरर्स की बर्फ भारतीय पर्यटको और शीतकालीलन खेलेा के खिलाडयों को गुलाबी ठंड के रोमांच के लिए आमंत्रित कर रही है और हजारो पर्यटक इस आनंद में खो जाने के लिए तैयारी कर रहे है। संभव है आने वाले दिनो में इन्ही शौकिया खिलाडयों म से कोई पेशेवर खिलाडी निकल कर आये और शीतकालीन ओलम्पिक में भारत के लिए सफल भागीदारी करे।
मनीष कुमार जोशी, सीताराम गेट के सामने, बीकानेर - ०१५१-२५४६३४२