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| RSS | Tuesday, February 14, 2012 |
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Stories
एक बार औरंगजेब आब हवा परीवर्तन के लिए लाहौर गया साथ में उसकी लडकीं जैबुन्निसा भी गई वह बडी खुबसुरत और हसीन थी बुद्धि में भी बडी तेज थी तथा उसे कविता और साहित्य का बडा शौक था
उन दिनों औरगंजेब के राज्य का प्रसिद्ध प्रशासक आलिकखान लाहोर का गर्वनर था औरगंजेब के लाहौर में होने के कारण वह पहरेदारों पर कडी नजर रखता था वह औरगंजेब के सर्वोतम कर्मचारीयों में से एक था तथा औरगंजेब ने अपनी बहादुरी ताकत उंचे खयाल रखता था आकिलखान ने अपनी बहादुरी ताकत तथा दयालु स्वभाव के कारण सबके दिलो को... सन् १७५७ भारत के इतिहा में बडा महत्वपूर्ण वर्ष माना जाता है जब मई के महीन में क्लाइव ने अपनी तटस्थता की संधि को तोडकर अचानक चन्द्रनगर पर कब्जा कर लिया; किन्तु वाल्टर रेनहर्ट ने, जो जर्मन था और फेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी में एक सैनिक की हैसियत से भारत आया था, आत्मसमर्पण करने से इन्कार कर दिया। वह अपने साथियों सहित मुर्शिदाबाद चला गया जहँा उसे बंगाल के नवाब से संरक्षण मिला।
उसके बाद रेनहर्ट ने ग्रेगरी खान के मातहत नौकरी की जो मीर कासिम की सेना में एक आरमीनियम जनरल था। वहंा उसने अपनी विशिष्ट... ‘‘प्रणाम बाबाजी !‘‘
‘‘सुखी रहो, दुर्गावती! भगवान तुझे शूरवीर वर दे !!‘‘ ये वाक्य प्रायः रोज ही दुहराए जाते जब दुर्गावती साधु बाबा से, जो शिवमंदिर के पास एक विशालकाय बड के वृक्ष के नीचे बैठे रहते, मिलती। दुर्गावती प्रतिदिन संध्या समय अपनी दो प्रिय सहेलियों के साथ शिवमंदिर जाती और दर्शन करने के बाद लौटते समय अक्सर बड वृक्ष के नीचे बैठकर विश्राम करती और बाबाजी से शूरवीर राजाओं की कहानियां सुनती।
रहस्यमय साधु
साधु बाबा काफी वृद्ध थे बहादुर राजपूतों और अन्य शूरवीर राजाओं की इतनी कहानियां जानते थे कि दुर्गावती...
भारतीय काफीले की प्रेमगाथाए काबुल के बाजार में आम लोगो की जबान पर रहा करती थी ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार शीत ऋतु के आगमन पर आम लोग उसकी बातें किया करते । सुबह से लेकर शाम तक आलमखान लोधी की जो भारत के बादशाह इब्राहीम लोधी के चाचा सडको पर हुआ करती । भारत की राजनीतिक एंव सामाजिक स्थिती दिन पर दिन खराब हो रही थी। भारत के शांहशाह का हदय खूबसूरत औरतों की जुल्फों मे फंसा हुआ था। उन दिनों भारत की हुकुमत मर्दो के नहीं, बल्कि औरतों के इशारों पर चलती थी। भारत का... अलाउद्दिन अपने काका जलालुद्दीन की हत्या करके दिल्ली की गद्दी पर बैठा। वह खिलजी जाति का था तथा ऐसे कबिले का वंशज था जो सब तरह की दुष्टताओं और विनाश के लिए प्रसिद्व था उनमें से प्रत्येक ने सता प्राप्त करने के लिए खूनखराब किया अलाउदीन ने भी उसी रास्ते को अपनाया और जलालुदीन की हत्या कर तख्त हासिल किया।
सिवाय इसके वह सौन्दर्य का दिवाना तथा खुबसुरत औरतों का बडा शौकिन था खुबसुरत अलाई-दरवाजा बनाने के लिए उसने धन और किमती पत्थर एक राजा को लूटकर इक्टठे किये इसी प्रकार जब किसी खुबसुरत की खबर पाता... उन दिनों अक्सर मुगलों के आक्रमण होते रहते थे। सिकन्दर लोदी और गयासुद्दीन खिलजी ने कई बार ग्वालियर के किले पर धावा किया, पर वे सफल न हो सके। तब उन्होने आसपास के गांवो को नष्ट कर उनकी फसलें लूटना शुरू कर दिया। उन्होने कई मन्दिरों को तोड-फोड डाला और लोगों को इतना तंग किया कि वे हमेशा भयभीत बने रहते। खासकर स्त्रियों को बहुत ही भय रहता। उन दिनों औरतों का खूबसूरत होना खतरे से खाली न रहता। कारण, मुगल उनपर आंखें लगाए रहते थें। गांवों की कई सुन्दर, भोली लडकिंया उनकी शिकार हो चुकी थी। रजिया सुल्ताना का करूण अंत
’’रजिया सुल्ताना एक महान सम्राज्ञी, बुद्धिमान, न्यायप्रिय, उदार, राज्य की भलाई चाहने वाली, सबको समान दृष्टि से देखने वाली तथा अपनीसेना की अगुवा थी; उसमें लिंग को छोडकर बाकी एक राजा के सभी गुण मौजूद थे; और इसी लिंग के कारण उसके सारे गुण लोगों की नजरों में व्यर्थ हो गए।‘‘ संक्षेप में, महिला मुसलमान शासक रजया सुल्ताना का पूरा चित्र यही है। सन् १२६३ में अल्तमश की मृत्यु के बाद, उसके पुत्रों की कम-जोरी एवं नैतिक पतन के कारण उसके राज्य की हालत बहुत बुरी थी। उसका प्रथम पुत्र रुकनुद्दीन फिरोजशाह... |
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