KhbarExpress www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now | My Favourites (new)
Search Photo  
RSS 22 November 2009
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Cartoon | Video News |
Free News on your website
20
May
चोरों का दोस्त राजा
Add comment    Mail     Print    Write to Editor

महल पहूंच कर राजा विक्रम भी नहाए-धोए। राजसी वस्त्रों और आभूषणों से सज्जित हो सिंहासन पर बैठे। नगर कोतवाल को तलब किया गया। राजा ने कोतवाल को डांटा- ’सारी रात क्या सोकर ही गुजारते हो? नगर के अंदर कहां क्या चोरी-चकारी होती है, तुम्हें कुछ पता नही चलता। जाओ कलाल के दारू  खाने में चारा चोर शराब ढाल रहे हैं, उन्हें बांध-बूंधकर फौरन ले आओ..‘
कोतवाल चोरों को रस्सी से बांधकर ले आया। उन्हें दरबार में हाजिर किया गया। राजा ने चोरों से पूछा- ’मित्रो, मुझे पहचानते हो?‘
’महाराज‘- चोरों का सरदार हाथ जोडकर बोला ’मैंने तो आपको उसी पल पहचान लिया था, किंतु मेरे साथी गाफिल हैं, इन्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं था। गीदड ने तो ठीक ही कहा था। वह भला क्यों झूठ कहेगा। मेरे ही साथियों की अकल घास चरने चली गई थी। मुझ पर बुद्धूपन का भूत सवार था, सरकार।‘ राजा विक्रमादित्य को इस पर हंसी आ गई। वह बोले- ’दूष्टों, सीधे-सीधे तुम लोग अपना कसूर क्यों नहीं कबूल करते हो? नाहक ही बातों में क्यों उलझा रह हो? अपनी नीयत का खोट नही दिखाई देता?‘
चोर बोले- ’इसमें हमारी नीयत का क्या खोट है, महाराज?‘ राजा ने कहा- ’देखो, तुम हट्टे-फट्ठें हो, बहादुर भी हो, फिर भी चोरी का पेशा अपना रखा हैं तुमने। पकडे जाने पर कैसा बुरा हाल होता है?‘ चोर बोले- ’हां महाराज, इस नीयत ही है।‘ ’तो फिर इस धंधे को तुम छोड क्यों नहीं देते?‘- राजा ने पूछा तो जवाब मिला- ’इसकी जड है गरीबी। यही हमसे ऐसा गंदा काम करवाती है। सारे पापों की उत्पति दरिद्रता से होती है, महाराज! यही लोगों को बुरे काम करने के लिए उकसाती है।‘ दरबार बरखास्त हुआ। रईस का माल रईस को वापस भिजवा दिया गया। चोरों को छुटकारा मिला। चोरों के मुखिया खिसकू को एक गांव की जागीरदारी मिली। बाकी तीनों भी राजा की कृपा से मालदार हो गए। धूमधाम से उनकी विदाई हुई। कुछ वर्ष बीत जानें पर राजा विक्रमादित्य ने सोचाः चोरों के जिस सरदार को मैंने जागीरदार बनाया वह कैसे अपना काम कर रहा है? खोटी नीयत वाला आदमी शासन नहीं चला सकता। जिसकी हाजमा खराब हो वह तर माल नहीं पचाा सकता। सारी बात जानने के लिए राजा ने अपना जासूस भेजा। जासूस हाल-चाल मालूम करके लौट आया।
’कहो!‘ राजा ने पूछा। ’क्या बतलाउं आपसे, महाराज? आपको शायद अच्छा न लगे।‘
’नहीं, नहीं, तुम बतलाओं‘ राजा ने कहा। ’गलत-सलत बतलाए तो जासूस कैसा! सुनिए श्रीमान, आपने तो उस चोर को राजद्दी दे दी, वह तो उसका वैसा का वैसा ही है।
क्या नहीं होता है गांव में? शराबी, जुआरी, उचक्के, बस यही लोग है जिनकी तूती बोल रही है। ’अब क्या करना चाहिए?‘ राजा ने चिंता के साथ पूछा। भेष बदल कर राजा चोर के गांव में पहूंचे। जासूस की सारी बातें सच थी। चोरों का सरदार कुपात्र साबित हुआ। राजा विक्रमादित्य ने उसे देश से निकाल देकर गांव की प्रजा का कष्ट दूर कर दिया। 

Pawan vyas




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

v good story but the king is v kind person there is nothing so good bcouse this is not a reyal story i has been read a many book of king bekramaditay .he is one of kind king in erth., pankaj (27/12/2008 20:25:23)


 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 
Search hindi - English word definition online at PleagianDictionary.com
Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
Low investment, high return invest in property
Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares