www.khabarexpress.com : The news portal of North India
www.khabarexpress.com
Google
 
Education Special

Education Directory
Exam Results
Who is Who

Article
Tutorial
Information
Quote

Can't see Hindi ?
Welcome Guest Sign In  New user! Sign Up Now| My Favourites (new)
Search Photo  
RSS Feed
16 May 2008
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City |
Free News on your website

10
Oct
दूध का हो दूध और पानी का हो पानी 
Add comment     Mail     Print     Write to Editor

 

Writer - Nirmal Raniहमारे देश भारत में दूध को सबसे अधिक पवित्र एवं पौष्टिक खाद्य एवं पेय पदार्थ माना जाता है। पीने के अतिरिक्त दूध का प्रयोग सैकडों विभिन्न रूपों में भी किया जाता है। दही, पनीर, छाछ, मक्खन व छेना के अतिरिक्त सैकडों प्रकार की मिठाईयां इसी दूध से तैयार होती हैं। दूध के उत्पादन के स्रोत मुख्यतः गाय व भैंस ही माने गए हैं। परन्तु भारत में बढती हुई जनसंख्या के कारण उत्पाद व खपत में आने वाले बडे अन्तर के परिणामस्वरूप दूध उत्पादन के और भी कई रास्ते वैज्ञानिकों द्वारा तलाश कर लिए गए हैं। जिनमें सोयाबीन से बनने वाला दूध भी एक ऐसा दुग्ध उत्पाद है जोकि जनता द्वारा लगभग स्वीकार किया जा चुका है। परन्तु इसके अतिरिक्त भी आज बाजार में दूध के नाम पर ऐसा बहुत कुछ हो रहा है जिससे जनता पूरी तरह अनभिज्ञ है।
आज भारत में दूध की बेतहाशा बढती खपत का ही परिणाम है कि हमारे देश में जगह-जगह नई-नई कम्पनियों ने अपने मिल्क प्लांट खोल दिए हैं। कई पुराने मिल्क प्लांट ने इस बढती मांग को पूरा करने के लिए अपने नए युनिट अनकों नई जगहों पर स्थापित कर लिए हैं। इन मिल्क प्लांट में आमतौर पर सीधे गांवों में जाकर पशु पालकों से दूध की खरीददारी कर ली जाती है। यहां यह कहा जा सकता है कि अपनी योजना के अनुसार मिल्क प्लांट अपनी जरूरत का कुछ ही प्रतिशत दूध सीधे पशु पालकों से खरीद पाने में सफल हो पाता है। परन्तु यदि हम दूध की कुल खरीद तथा उस दूध से बनने वाले व्यंजन की सभी किस्मों की मात्रा तथा भार पर नजर डालें तो हम देखेंगे कि किसी मिल्क प्लांट में जितनी मात्रा में अथवा जितने वजन में दूध की आमद या खरीद होती है, उससे कई गुना अधिक वजन के दुग्ध उत्पाद इसी मिल्क प्लांट में तैयार किए जाते हैं।
मिल्क प्लांट में तैयार होने वाले उत्पादों में शुद्घ देसी घी, दूध की कई रंगीन स्वादिष्ट व विभिन्न खुशबुओं वाली बोतलें, मीठी व नमकीन लस्सी, मिल्क केक, पेडा, खीर, पनीर, खोया, मक्खन, क्रीम, आईसक्रीम तथा सादे दूध की दो तीन श्रेणियों के अतिरिक्त और भी बहुत कुछ चीजें पाई जाती हैं। यहां प्रश्ा* यह है कि यदि इन मिल्क प्लांट्स में दूध की खरीद ही कुल उत्पादन के वजन एवं मात्रा से काफी कम की जाती है तो उत्पाद के लिए मिल्क प्लांट आखिर दूध के अतिरिक्त और कौन से कच्चे माल का इस्तेमाल करता है? आमतौर पर घरेलू विधि के अनुसार यदि किसी दूध से घी अथवा क्रीम निकाल लिया जाए तो उस दूध की पौष्टिकता लगभग समाप्त हो जाती है। परन्तु यह मिल्क प्लांट ही है जहां उनके पास दूध से देसी घी, दही व पनीर जैसे सभी उत्पादों के तैयार कर लिए जाने के बावजूद बढिया दूध भी उपलब्ध रहता है। बल्कि जितना चाहें और जब चाहें तब उतना ही उपलब्ध रहता है।
यह तो था आम लोगों के सामने प्रतिदिन नजर आने वाला वह रहस्य जिसे न तो जनता सुलझाना चाहती है न ही मिल्क प्लांट की ओर से इन बातों की सच्चाई पर रौशनी डालने की कोशिश की जाती है। दूध की दिनों-दिन बढती हुई राष्ट्रव्यापी खपत ने कुछ तीव्र बुद्घि ठगों को भी दूध बनाने के नए-नए उपाय सुझा दिए हैं। पुलिस द्वारा दिल्ली, पानीपत व उत्तर प्रदेश में कई बार ऐसे गिरोहों का भण्डाफोड हो चुका है जोकि यूरिया खाद, कपडा धोने वाले साबुन में प्रयोग होने वाले कुछ केमिकल्स तथा ऐसी कई अन्य वस्तुओं के मिश्रण से हूबहू दूध जैसा वह घोल तैयार कर देते हैं जोकि   न सिर्फ देखने में शुद्घ दूध सा प्रतीत होता है बल्कि इसी दूध से वह सब कुछ तैयार हो जाता है जोकि असली दूध से तैयार होता है। सवाल यह है कि क्या पुलिस द्वारा ऐसे नेटवर्क का भण्डाफोड किए जाने के बाद अब यह नेटवर्क पूरी तरह बन्द हो चुके हैं या इन्होंने अपने चेहरे व स्थान बदल कर अपना यह जहर, दूध के नाम पर बेचने का व्यवसाय अब भी जारी रखा हुआ है?
कुछ समय पूर्व मुझे यू पी होते हुए बिहार जाने का अवसर मिला। रास्ते में ट्रेन पर मिलने वाली चाय के हर जगह लगभग अलग-अलग स्वाद चखने को मिले। चाय पीने से साफ पता लगता था कि स्टेशन व रेलगाडियों में बिकने वाली चाय में न केवल दूध का स्वाद संदेहपूर्ण है बल्कि चाय की पत्ती व चीनी भी अपने वास्तविक स्वाद के अनुरूप नहीं लगी। इस विषय पर छिडी चर्चा के दौरान अधिकांश मुसाफिर यही कहते मिले कि दूध, चीनी व पत्ती सभी कुछ अविश्वसनीय है। एक व्यक्ति ने तो यहां तक बताया कि जिस प्रकार नकली दूध बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के केमिकल्स तथा यूरिया आदि का इस्तेमाल धडल्ले से किया जा रहा है, उसी प्रकार चाय की पत्ती के नाम पर भी बाजार में वह कुछ बिक रहा है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बात सुनने में अविश्वसनीय तो जरूर लगेगी परन्तु कुछ मुसाफिरों ने तो बडे दावे के साथ यह भी कहा कि नकली चाय की पत्ती तैयार करने में पुराने चमडों का बारीक बुरादा इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रकार चीनी की जगह भी कुछ ऐसी दवाईयां व केमिकल्स प्रयोग हो रहे हैं जो चीनी से कम लागत में चीनी से अधिक मिठास पैदा कर देते हैं।
दीपावली का त्यौहार नजदीक आ रहा है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे देश में लाखों टन मिठाईयों का आदान-प्रदान व खरीद फरोख्त जनता द्वारा की जाएगी। दीपावली के आगमन से पूर्व जनता भले ही अभी स्वयं को नवरात्रों व दशहरा जैसे त्योहारों में व्यस्त क्यों न पा रही हो परन्तु दुग्ध विशेषज्ञों की निगाह अभी से दीपावली की उस रौनक पर पड चुकी है, जिसमें कि लाखों टन नकली दूध दीपावली के बहाने भारत जैसे विशाल बाजार में खप जाया करता है। पिछले दिनों तो एक मालगोदाम में बडी मात्रा में वह मिठाईयां पकडी गईं जोकि दीपावली के लिए बनाकर अभी से कोल्ड स्टोरेज में इकट्ठी की जा रही थीं।
सवाल यह है कि देश की भोली-भाली, सीधी-सादी जनता के साथ ऐसा विश्वासघात कब तक होता रहेगा। जिस दूध की पवित्रता की लोग कसमें खाते हैं तथा सफेदी के लिए जिस दूध के रंग को उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, उस दूध के नाम पर हम जहर कब तक पीते रहेंगे? यहां एक विषय यह भी काबिलेगौर है कि ऐसे धन्धों में लिप्त लोगों के लिए न तो किसी बडी सजा का प्रावधान है न ही वे अधिक समय तक जेल में रह पाते हैं। उधर समाज भी ऐसे समाज विरोधी लोगों को जल्दी ही माफ भी कर देता है। जाहिर है इतनी सहूलियतें पाने के बाद इनके हौसले बुलन्द नहीं तो पस्त क्योंकर होंगे। दूसरी ओर अन्य अनेकों भ्रष्टाचारों की तरह इस नेटवर्क में भी जिम्मेदार लोगों व तथाकथित रक्षकों की संलिप्तता से भी कतई इन्कार नहीं किया जा सकता। क्योंकि इस तरह का जो भी काम होता है, वह कहीं न कहीं आबादी के बीच में ही होता है तथा इस उत्पाद के आवागमन को भी गुप्त नहीं रखा जा सकता। अर्थात् यह नकली माल इन्हीं मुख्य सडकों पर चल फिर कर अपनी मंजिल तय करता है जिस पर कि हम सभी तथा कानून के रखवाले भी आया-जाया करते हैं। लिहाजा जिम्मेदार लोग इस नेटवर्क से अनभिज्ञ हैं, यह बात भी पूरी तरह हजम नहीं होती। कुल मिलाकर जनता को इस विषय पर बहुत चौकस व सचेत रहने की जरूरत है। जनता को यह समझ लेना चाहिए कि सफेद दिखाई देने वाला हर पेय पदार्थ दूध नहीं हो सकता।

Writer -


Nirmal Rani , 1630/11 Mahavir Nagar, Ambala City 134002, Haryana
Phone-098962-93341, E-mail : nirmalrani@gmail.com




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article
Be the first to comment on this Article
  Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 

Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
 
Education Special
Special Edition : Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
All right reserved by Khabarexpress.com ( Bikaner Rajasthan News Website )
Natraj Infosys, C-223, M D Vyas Nagar, Bikaner- 4 (Rajasthan) India Phone: 91-151-2210444,  9351790468, 9829578343
Send your press release at: editor@khabarexpress.com