चीन के प्रसिद्व दार्शनिक चेगंचुंग बहुत बीमार थें । उनके बचने की आशा नही थी । उस समय शिष्य माओत्से ने उन्हे कहा-मुझे कुछ ज्ञान देने की कृपा करे ।
चेंगचुंग ने अपना मुंह खोला और कहा - क्या मेरे दांत हैं ?
नही । माओत्से ने जबाब दिया ।
और जीभ ? दार्शनिक ने पूछा ।
हां ।
दांत गिर गए पर जीभ मौजूद हैं क्या
तुम इसका मतलब जानते हो ?
नही ।
दांत कठोर हैं, और जीभ कोमल हैं । चेंगचुंग ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा जो आदमी अपने जीवन में कोमल और नम्र रहता हैं वह सदा सफल होता हैं ।
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