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12
Feb
तुमसे नाराज नही ... !
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क्ुछ दिनो पहले यह खबर आई थी कि भारत की सुपर सितारा टेनिस खिलाडी सानिया मिर्जा ने ३ मार्च से शुरू होने वाली भारत की सबसे बडी डबल्यू टी ए प्रतियोगिता बंगलोर ओपन में भाग लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह अब भारत में खेलना नहीं चाहती। सानिया मिर्जा अपने ही देश में उससे जुडे विवादो से व्यथित है जिनका संबध उसके खेल से नहीं था। परंतु उसका अपने ही देश में नहीं खेलने के निर्णय से उन खेलप्रेमियो को निराशा हुई जो अपने देश की सुपर सितारा खिलाडी को अपने  ही देश में खेलते हुए देखना चाहते थे। सानिया के इस निर्णय से खेल प्रेमी उससे नाराज नहीं है बल्कि हैरान ह क्योंकि उसके द्वारा उठाये गये सवालो से वे स्वयं परेशान है। निश्चित रूप  से सानिया अपने साथ उठे विवादो से व्यथित है परन्तु वह भी उन भारतीय खिलाडयों में शामिल हो गई है जो अपने देश के लोगो के कारण उत्पन्न समस्याओ के कारण अपने देश में खेलने से इनकार कर चूके है। शतरंज के नंबर एक खिलाडी विश्वनाथन आनंद विश्व शतरंज प्रतियोगिता का फाईनल दौर भारत में खेलने से इनकार कर चूके है और १९८६-८७ में सुनील गावस्कर दर्शको के व्ववहार से क्षुब्ध होकर कोलकता में टेस्ट मैच खेलने से इनकार कर चूके है।

 सानिया मिर्जा के साथ जो विवाद जुडे उसके बार में हर एक की राय अलग हो सकती है परन्तु जब एक खिलाडी से उसके खेल से ईतर विवाद जुडते है तो उसक ेखेल के प्रति एकाग्रता पर प्रभाव पडता है। सानिया मिर्जा जब टेनिस में सफलता के शिखर को छु रही थी तो उसकी पोशाक को लेकर उठे विवाद ने उसके खेल को बुरी तरह प्रभावित किया। पिछले साल एक धर्मस्थल में विज्ञापन फिल्म की शूटिंग को लेकर उठे विवाद में सानिया मिर्जा को सार्वजनिक रूप  से माफी मांगनी पडी थी। कुछ समय पहले ही एक प्रतियोगिता के दौरान खचे गये फोटो को लेकर सानिया मिर्जा पर तिरंगे के अपमान के लिए भोपाल में एक मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में हालांकि सानिया को न्यायालय से राहत मिल गयी परन्तु उसका खिलाडी मन अपने ही देश के लोगो के इस प्रकार के व्यवहार से व्यथित हो उठा और उसने अपने ही देश में नहीं खेलने का निर्णय ले लिया। परन्तु देश के करोडो खेल प्रेमी सानिया द्वारा उठाये गये सवालो से परेशान है और अपने ही देश में सुपर सितारा खिलाडी के नहीं खेलने के निर्णय से हैरान हे। वास्तव में यह सवाल परेशान करता है कि कैसे एक लोकप्रिय खिलाडी अपने ही देश के लोगो से उसका तनाव का रिश्ता बन जाता है।

 सानिया देश की एकमात्र ऐसी खिलाडी नहीं है जिसने अपने ही देश में खेलने का फेसला किया हौ। इससे पूर्व कई अन्य भारतीय खिलाडी भी ऐसे कठोर निर्णय ले चुके है। १९८६-८७ के सत्र में भारतीय कि्रकेट के शिखर पुरूष सुनील गावस्कर अस्सी के दशक में कोलकत्ता के दर्शको के व्यवहार से क्षुब्ध होकर  कोलकत्ता में टेस्ट मैच खेलने से इनकार कर दिया था। सुनील गावस्कर को इस फेसले के कारण पूरे देश में कडी आलोचना का सामना करना पडा था। इसके बाद सुनील गावस्कर कोलकत्ता में कि्रकेट नहीं खेले। विश्व के चोटी के शतरंज खिलाडी विश्वनाथन आनंद एक बार विश्वचैम्पियनशिप के फाईनल दौर में भारत में खेलने से इनकार कर चूके है। विश्वनाथन आंनद अभी स्पेन में अनिवासी भारतीय की तरह निवास करते है और लम्बे समय से भारत में शतरंहज नहीं खेले है। आनंद का तर्क है कि उन्हे भारत में प्रायोजक नहीं मिलते है और भारत में शतरंज के लिए उर्पयुक्त माहोल नहीं है। आनंद के रवैये से देश के लाखो खेल प्रेमी हैरान है।

 देश के लोकप्रिय खिलाडीयो के अपने ही देश के लोगो के व्यवहार से क्षुब्ध होकर देश में नही खेलने फेसेले के पीछे खिलाडयों को अपना तर्क हो सकता है परन्तु इससे उन लाखो खेल प्रेमियों का नाराज होना स्वभाविक है जिनका कोई दोष नहीं है। खिलाडयों को यह समझना चाहिए कि वे सितारा अपने देश और देश की जनता के प्रेम के कारण लोकप्रिय बनते है। अपने देश की जनता ही उन्हे सिर आंखो पर बिठाती है। जहां तक खेल प्रेमियो के खिलाडयो के प्रति रूखे व्यवहार का प्रश्न है, उस सबंध में खिलाडयों को यह स्वीकार करना चाहिए कि खेल में सफलता का  शिखर छुने के बाद वे आम व्यक्ति से अलग हो जाते है। देश का युवा जगत उनका अनुसरण करता है। इस प्रकार सितारा खिलाडयों की एक सामाजित जिम्मेदारी भी बन जाती है। इस कारण देश की जनता सुपर सितारा खिलाडयों से जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार की अपेक्षा करती है और इसमें थोडी सी कमी  होने पर देश की जनता क्षुब्ध हो जाती है। इसके साथ ही खिलाडयों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके द्वारा बडी सफलता हासिल करने पर पूरा देश उन्हे सिर आंखो पर बिठाता है। नाराज खेल प्रेमियाो और दर्शको का दिल अच्छे व्यवहार और खेल से ही जीता जा सकता है। देश में नही खेलने का निर्णय लेकर खिलाडी उन करोडो खेल प्रेमियो का अपमान करते है जो उनसे असीम प्यार करते है।

 नाराज खेल प्रेमियो और दर्शको के व्यवहार से खिलाडयो का क्षुब्ध होना स्वभाविक है परन्तु उन्हे नाराज खेल प्रेमियो का दिल जीतने के लिए जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार करना चाहिए। संभव है खिलाडयों पर अंगुली उठाने वाले गलत हो सकते है, इसके बावजूद सुपर सितारा खिलाडयों से जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। कपिल देव, सचिन तेंदुलकर,विजय अमूतराज , रमेश कृष्णन और पी टी उषा जैसे खिलाडी अपने जिम्मेदार पूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते है। खिलाडी को अपेन खेल हितो के साथ सामाजिक सरोकारो का भी ख्याल रखना चाहिए। खिलाडी और खेल प्रेमियो  के बीच तनाव का नहीं प्यार का रिश्ता होता है। इसी कारण देश के खेल प्रेमी सानिया के देश में नहीं खेलने के निर्णय से उससे नाराज नहीं , हैरान है।


 

Manish Joshi, Bikaner


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