चार दशक पहले तक किरकेट का मतलब टेस्ट कि्रकेट ही होता था। टेस्ट कि्रकेट के उबाउपन को दूर करने के लिए एकदिवसीय किरकेट का जन्म हुआ। यह एक दिनम ें खत्मक होने वाला और परिणाम की गारंटी वाला कि्रकेट था। कि्रकेट के पंरपरावादियों को कि्रकेट का यह रूप नागवार लगा और उन्होने इसे* ’पायजामा‘ कि्रकेट का नाम दिया। ’पायजामा‘ कि्रकेट ने लोकप्रियता के नये आयाम छुए। तेज रफतार की जिंदगी में अब कि्रकेट के लिए समय और कम हो गया है। कि्रकेट को फुटबाल की तर्ज पर तीन घंटे का खेल बनाने के लिए ट्वन्टी-२० कि्रकेट का जन्म हुआ है। परंपरापवादियों ने इसे* ’चड्ढी‘ कि्रकेट का नाम दिया है। ’ चडढी‘ कि्रकेट भी लोकप्रियता की बुलंदियों की ओर बढ रही है। यही कारण है कि ’चड्ढी‘ कि्रकेट ने विश्वकप का सभी कि्रकेट प्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे है। इतिहास ट्वन्टी-२० कि्रकेट का उद्भव यूनाईटेड किंगडम में हुआ जब २००३ में इग्लैण्ड औरवालेस कि्रकेट बोर्ड ने टवन्टी -२० कि्रकेट की ईंटर काउटी चैम्पियनशिप आयोजित की जिसे पूरे ईग्लैण्ड में जोरदार समर्थन मिला। १५ जुलाई २००४ को मिडिल मैक्स और सर्रै के बीच लॉर्डस में खेले गये* २०-२० मैच में २६,५०० दर्शक उपस्थित थे जो १९५३ के बाद किसी भी काउंटी मैच में सर्वाधिक है। फरवरी २००५ को आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड के बीच पहला अधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय २०-२० कि्रकेट मैच इडन पार्क* आकलैण्ड में खेला गया जिसे आस्ट्रेलिया ने जीता। फिर भी टृवन्टी -२० कि्रकेट में अब तक मात्र ३२ अधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले गये है। इसमें सवा्रथ्धक* ६मैच ईग्लैण्ड ने खेले है । एकदिवसीय कि्रकेट में मान्यता प्राप्त टीमों में केन्या और स्कॉटलैण्ड* को छोडकर सभी में ट्वन्टी-२० मैच खेल चुकी है। अब ट्वन्टी विश्वकप में सभी टीमे अपनी ताकत आजमा रही है।
क्या है ट्वन्टी’२० कि्रकेट
ट्वन्टी-२० कि्रकेट में कि्रकेट के आधारभूत स्वरूप* से छेडछाड नहीं की गई है। यह मैच तीन घंटे में पूरा होता है और एक टीम को खेलने के लिए ७५ मिनट का समय* मिलता है। अंपायर अपने विवके से इस समय को बढासकता है। यदि कोई भी टीम निर्धारति ७५ मिनट में २० ओवर पूरे नहीं डालती है तो अंपायर अपने विवके से विपक्षी टीम को प्रत्येक देरी से किए गये ओवर के लिए ६ रन दे सकता है। इसके अलावा मैच के दौरान किसी भी टीम द्वारा जानबझकर की जा रही देरी के लिए अंपायर अपने विवके से विपक्षी टीम को ५ रन अतरिक्त दे सकता है।
किसी भी गेदगाज द्वारा नो बॉल करने पर विपक्षी टीम को दो रन दिये जाते है और अगली* गेंद बल्लेबाज के लिए फ्री हिट होती है जिस पर* बल्लेबाज को केवल रन आउट ही किया जा सकता है। यदि मैच में स्को ’टाई‘ हो जाता है। तो मैच का फेसला ट्राई ब्रेकर के जरिये होगा। ट्राई ब्रेकर में प्रत्येक टीम के पांच गेंदबाज* खाली विकेट पर दो -दो गेंद फेंकते है जो टीम दस गेंदो में ज्यादा विकेट गिराती है वहीं टीम विजयी होती है। इस तरह से कि्रकेट को फुटबाल की तरह तेज और रोमांचक बनाने का प्रयास किया गया है। भारत में ट्वन्टी-२० कि्रकेट
भारत में अभी तक २०-२० कि्रकेट की शुरूआत नहीं हुई है। इस साल में बीसीसीआई के अधिकारिक रूप* से ट्वन्टी-२० कि्रकेट आयोजित करने की घोषणा की है। भारत गत सत्र में दक्षिण अफ्रीका के विरूद्ध अधिकारिक रूप* से एक ट्वन्टी-२० मैच ख्ेाल चुका है। इस मैच में भारतीय टीम का नेतृत्व वीरेन्द्र सेहवाग ने किया था। भारत ने यह मैच जीता था। भारतीय टीम ने* ट्वन्टी-२० कि्रकेट का यह एक मात्र मैच खेला है।
भारतीयो के पास ट्वन्टी-२० कि्रकेट का ज्यादा अनुभव नहीं है परन्तु आने वाले समय में भारत ट्वन्टी-२० कि्रकेट का केन्द्र होगा। बीसीसीआई ने इस साल से अपने कलैण्डर में ट्वन्टी-२० कि्रकेट को शामिल किया है। आईसीएल ने भी अपने लीग की शुरूआत ट्वन्टी-२० कि्रकेट से कर रहा है। जिसमें विश्व के कई नामी खिलाडी हिस्सा ले रहे । और अब विश्वकप कि्रकेट के जानकारो का मानना है कि ट्वन्टी-२० कि्रकेट का विश्पकप समय से पहले आयोजित किया जा रहा है जबकि टेस्ट कि्रकेट खेलने वाले कई देशो में अभी तक प्रारम्भिक स्तर पर भी नहीं खेली जाती है। परन्तु इस विश्व कप आयोजन ट्वन्टी-२० कि्रकेट को लोकप्रिय बनाने के उद्धेश्य से इसका आयोजन किया जा रहा है।
जहां तक विश्वकप में भाग लेने वाली टीमो का सवाल है। आस्ट्रेलिया, ईग्लैण्ड, न्यूजीलैण्ड और दक्षिण अफ्रीका का सबसे अनुभवी है। इन टीमो ने इस प्रकार की* कि्रकेट में पॉच या इससे अधिक मैच खेले है परन्तु ट्वन्टी -२० कि्रकेट में पूर्व रेकार्ड कोई मायने नहीं रखता है।* मैदान में जो बाजी मारता है वहीं सिंकदर कहलाता है। आस्ट्रेंलिया को ट्वन्टी-२० विश्वकप का दावेदार माना जा रहा है । आस्ट्रेलिया इस प्रकार की कि्रकेट का अनुभव तो रखता ही है साथ में आस्ट्रेलिया के सभी दिग्गज खिलाडी इसमें हिस्सा ले रहे है जबकि भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के मुख्य खिलाडी इसमें हिस्सा नहीं ले रहे है। आस्ट्रेलिया को* न्यूजीलैण्ड और इग्लैण्ड से कडी टक्कर मिल सकती है। दोनो ही टीमें ट्वन्टी-२० कि्रकेट में विशेषज्ञ टीम मानी जाती है। इग्लैण्ड के कॉलिंगवुड, फिलटांफ, इयान बेल और एंडरसन इस प्रकार की कि्रकेट के लिए उपयुक्त खिलाडी है।
जहां तक भारत की संभावनाओ का प्रश्न है भारत की युवा टीम अप्रत्याशित परिणाम देने की क्षमता रखती हे। महेन्द्रसिह धोनी* और वीरेन्द्र सेहवाग इस ्रपकार की कि्रकेट में अच्छा प्रदर्शन कर चूके है। सेहवाग ने ट्वन्टी -२० कि्रकेट में भारत का नेतृत्व किया था। नये कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी को सेहवाग के अनुभव का लाभ मिलेगा। दिनेश कार्मिक, युवराजसिंह और जहीर खान ट्वन्टी -२० कि्रकेट में भारत की नैया पार लगा सकते है।
इस प्रकार अब ’पायजामा‘ कि्रकेट का स्थान ’ चड्डी कि्रकेट ‘ लेने जा रही है। कि्रकेट का रोमांच अब सिर चढकर बोलेगा। एक बार फिर कि्रकेट काफी कुछ बदल जायेगी। अब कि्रकेट का बल्ला और गेंद हवा की रफतार के साथ दोडेगे। अब तक लडाई कि्रकेट के ताज के लिए थी अब लडाई रफतार की कि्रकेट की बादशात के लिए होगी।
- मनीष कुमार जोशी