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15 Jun 2008 Add comment Mail
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एक गांव में एक बहुत चतुर महिला रहती थी। उसके दो दामाद थे। बडा दामाद धनवान था जबकि छोटे दामाद के पास खाने के दाने भी नहीं थे। एक बार त्योहार के मौके पर दोनों दामाद ससुराल में इकट्ठे हुए। भोजन के समय दोनों के लिए थाल परोसे गए। अमीर दामाद के थाल में छपपन भोग सजे थे जबकि गरीब दामाद की थाली में दलिया परोसी गई। ये भेद देखकर गरीब दामाद ने अमीर दामाद से कहा- के तो सासू दूसरी, के परोसता भूली। थाने परस्या लाडूआ माने परसी थूल्ली। सास ने यह बात सुनी तो उसने गरीब दामाद की मजाक उडाते हुए बोली-
न तो सासू दूसरी, न परोसता भूली। मुंह देख कर तिलक लगाया, खाओ गटागट थूल्ली। बेचारे गरीब दामाद ने दुनिया की हकीकत समझते हुए थूल्ली खाने में ही अपनी भलाई समझी।
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