Home > Article >> Short Stories | व्यापारी की पत्नी
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22 Feb 2010 Add comment Mail
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एक नगर में एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी बहुत संदर थी। एक दिन पति-पत्नी अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे गांव जा रहे थे। सफर की दूरी कम होने से वे दोनों पैदल ही चल दिए। मार्ग में एक गाडीवान किसान ने व्यापारी की पत्नी को देखा। उसके मन में पास का सांप जग गया। वह व्यापारी से बोला - महाशय ! आप कहां जाएंगे ? व्यापारी ने गांव का नाम बता दिया।
किसान गांव का नाम सुनकर बोला - मैं भी उसी गांव में जा रहा हूं। आप अपनी पत्नी को मेरी गाडी में बिठाना चाहे तो बिठा दे। व्यापारी ने अपनी पत्नी को गाडी में बिठा दिया। खुद पैदल चल दिया। किसान ने गाडी में जुते बैलों को तेज-तेज दौडाना शुरू किया। व्यापारी गाडी के पीछे-पीछे भागने लगा। मार्ग में किसान ने उसकी पत्नी को अपनी बातों के जाल फंसाकर वश में कर लिया। जब वे उस गांव के निकट पहुंचे, तो व्यापारी ने किसान को आवाज दी - भाई ! ठहर जाओ, हमारा गांव आ गया है, पत्नी को उतार दो।
भाई! हमारा गांव तो आगे है और यह स्त्री मेरी पत्नी है। यह सुनकर व्यापारी दौडकर गाडीवान के पास पहुंचा और चिल्लाने लगा कि यह गाडी वाला मेरी पत्नी को नहीं उतार रहा है। व्यापारी की बात सुनकर आसपास के राहगीर खडे हो गए लेकिन कोई फैसला नहीं कर सका कि वह स्त्री किसकी पत्नी है। इसलिए वे दोनों राजा के दरबार में पहुंचे।
राजा ने उन दोनेां की बातें सुनकर मंत्री से इस बात का निर्णय करने के लिए कहा। मंत्री ने उस स्त्री को अपने पास बुलाया और उससे पूछा - क्या बात है ? औरत चुप रही, वह कुछ नहीं बोली। मंत्री उलझन में फंस गया। थोडी देर सोचने के बाद उसने उस औरत को स्याही की दवात देकर कहा-इसमें पानी डालकर ले आओ। मंत्री की यह बात सुनकर औरत खडी हुई और दवात में पानी डालकर ले आई। मंत्री ने दवात से स्याही लेकर एक कागज पर दो-चार शब्द लिखकर देखें। स्याही में पानी सही अनुपात में डाला गया था। मंत्री ने व्यापारी से कहा-तुम अपनी पत्नी को ले जाओ, यह स्त्री तुम्हारी है।
उसके बाद किसान को झूठ बोलने और गलत आचरण करने पर सजा दी। यह देखकर राजा ने मंत्री से पूछा-तुम्हें यह कैसे पता चला कि वह औरत व्यापारी की है ? मंत्री बोला - राजन् ! मैंने उस औरत से दवात में पानी डालने को कहा। उसने उतना ही पानी डाला, जितनी स्याही के लिए जरूरी था। इससे मुझे पता चल गया कि वह औरत किसान की नहीं है। व्यापारी स्याही में पानी अवश्य डलवाता होगा। उसे स्याही में पानी डालने की आदत थी, अतः स्याही में जितने पानी की जरूरत थी वह उतना ही पानी डालकर ही लाई। यदि वह किसान की स्त्री होती, तो अनाडीपन से कम या अधिक मात्रा में पानी भर लाती। राजा ने मंत्री की चतुराई की तारीफ की और सही सही न्याय करने के लिए उसे पुरस्कृत किया।
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| | | Comments to this Article | It's very good story to do justice. , Jitendra Tyagi (2010-07-24 19:10:47) | | | good 286 patel marg road gzb, Dilbag Singh (2010-09-30 09:51:55) | | | Very Good, Arvind Kumar (2011-01-30 11:13:13) | | | Very Nice I like these kind of stories..., Manish Pandey (2011-03-15 04:42:44) | |
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