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Vartmaan Sahitya ::October, 2006 Sponsered by : Decor Home, Bikaner तेलुगू कविताएँ
श्री एन.आर.वेंकटेशम तथा सुश्री एन.शैलजा तेलुगू के चर्चित रचनाकार ह।
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तीसरी आँख
एन आर वेंकटेशम
तब
जब तुम सूरज की आँख बचाकर गुजरते थे
मैं उसके प्रचण्ड किरणों में जलाता रहता था
बरसात की रिमझिम तुम्हें दूर से सुनाई पडती थी
बूँदा-बूँदी में भी मैं पसीना बहाता रहता था
तुम जाडे के हाथ बिना फँसे घूम-फर सकते थे
जमाते जाडे-पाले में भी मेरा खून भाप बन जाता था
अपनी नसों से ताकत खींचकर
मैं तुम्हारे लिए सुख-सुविधाओं का सृजन करता था
ऐश-आराम के आसमान में बेरोक-टोक तुम्हें उडाने के लिए
पसीना बहाती मेरी बाँहें ही तुम्हारे पँख बनते थे
अब
काल ज्ञान मेरी आँखों की रोशनी बनी
तुम्हारे दिल को धडकाने वाले सवाल
मेरी नजरों से लटक रहे हैं
पीढयों की मेरी सहिष्णुता में से
तीसरी आँख खुल रही है।
मुझे एक गौरैया ला दो
एन शैलजा
मुझे एक गौरैया ला दो!
नहीं चाहिए मुझे दुर्लभ बाघ
पोलार भालू भी नहीं
चाहिए नहीं सोने का हिरन
अंतरिक्ष का चन्द्रयान भी नहीं!
चाहिए मुझे
एक सजीव गौरैया जो
मन के बन्द किवाडों को
अपनी चोंच से खटखटाकर
मुझे जगाती हैं।
दुपहर की तनहाई के समय
उडते हुए आकर
अपनी चहचहाहट से
कुशल-क्षेम पूछने वाला
गौरैया का वह स्वर चाहिए मुझे।
बूढे माथे की झुर्रियों को
विस्मद मोद का विकास चाहिए।
नजर भले ही क्षितिज पार करे
लापता प्रवास ही तो है जीवन!
दिल में घोंसले में चहकनेवाले गौरैये के लिए
है नहीं थोडी-सी भी जगह!
सच है
जिस घर की ओलती न हो
है वह मेहमानदारी से अनभिज्ञ मन!
जहाँ तक नजर जाती
लम्बी शीशों की गगनचुम्बी इमारतें
जगह नहीं चिडया के घोंसले के लिए
मुट्ठी भर मन के लिए!
अगोचर एस एम एस लहरों के जाल में, फन्दे में फँसकर
घुटते दम की बेचारी भोली गौरैया
है या नहीं पता नहीं
फिर दिखाई पडेगी या नहीं मालूम नहीं!
अपने भीतर हम भी झाँकते तब न
जब हमें मिले फुरसत
कब मिले वह फुरसत कि
हम सोच ले मन टटोलकर
बेचारी गौरैया क्यों गायब है?
जिस घर पर गौरैया नहीं बैठे
वह ऐसे ओंठ-सा है, जैसे
मुस्कुराहट का गीलापन कभी छूता तक नहीं
वह सूखकर दरार पडे तालाब-सा है, जो
प्रवास पक्षी के चले जाने पर गला फाड-फाडकर रोता है
गलत मत मानो
करो पूरी मेरी एक छोटी-सी माँग
मान के बखार पर बैठकर
दाने-दाने को अपनी चोंच से उधेडकर खानेवाले
गौरैयों के समूह को मुझे एक बार दिखा दो!
उडते हुए जीवन के दो क्षणों को
मुझे याद करने दो!
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