१
दुनिया की निगाहों में खयालों में रहेंगे,
जो लोग तिरे चाहने वालों में रहेंगे।
हम लोग बसाएँगे कोई दूसरी दुनिया,
मस्जिद में रहेंगे न शिवालों में रहेंगे।
ऐ वक्त तिरे जुल्मों सितम सहके भी खुश हैं,
हम लोग हमेशा ही मिसालों में रहेंगे।
शैरों में मिरे आज धडकता है मिरा वक्त,
अशआर मिरे कल भी हवालों में रहेंगे।
गुल्शन के मुकद्दर में जो आए नहीं अब तक,
वो नक्श मिरे पाँव के छालों में रहेंगे।
२
बारिशों में बहुत नहाए हैं,
आज हम धूप खाने आए हैं।
लेके माँ की दुआ मैं निकला हूँ,
दूर तक रास्तों में साए हैं।
जिनसे रिश्तों में बँध गया हूँ मैं
लोग अपने नहीं पराए हैं।
कितनी बरसात पी गई धरती,
तब कहीं खेत लहलहाए हैं।
तेरे दामन के मोतियों की कसम,
हमने आँसू बहुत बहाए हैं।
३
कहीं शह मिलेगी कहीं मात होगी,
जहाँ ख्ात्म होंगे शुरूआत होगी।
यूँ ही धूप में खेत जलते रहेंगे,
हवाएँ चलेंगी न बरसात होगी।
उजालों में चलने का वादा किया है,
सफर रोक देंगे अगर रात होगी।
न उम्मीद कोई न सम्भावना है,
अगर भेंट होगी अकस्मात होगी।
कभी हाले-दिल अपना पूछूँगा खुद से,
अगर मुझसे मेरी मुलाकात होगी।
४
ये धुआँ जो के जलते मकानों का है,
सब करिश्मा तुम्हारे बयानों का है।
तुमको जद ही अगर पर कतरने की है,
शौक हमको भी ऊँची उडानों का है।
हों तबाही के कस्से जमीं पर कहीं,
सिल्सिला सब गिरी दास्तानों का है।
जानता हूँ हवा है मुखलिफमिरी,
पर भरोसा मुझे बांदबानों का है।
बाँधकर हम परों में सफर उड चले,
इम्तेहान आज फिर आस्मानों का है।
५
जब खयालों के समन्दर में उतर जाता हूँ,
मैं तिरी जुल्फ की मानिन्द बिखर जाता हूँ।
वक्त की इतनी ख्ाराशें हैं मिरे चहरे पर
आईना सामने आ जाए तो डर जाता हूँ।
ले के उम्मीद निकलता हूँ मैं क्या-क्या घर से
रंग उड जाता है जब शाम को घर जाता हूँ।
पार जाना है तो तूफान से डरना कैसा,
कश्तियाँ तोड के दरया में उतर जाता हूँ।
कितने बेनूर उजाले हैं मिरे चारों ओर
रोशनी चीखती मिलती है जिधर जाता हूँ।