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Vartmaan Sahitya ::January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner दो गजल
माता प्रसाद शुक्ल
१. जब भी नया साल आया है। मुझे उसका ख्याल आया हैड्ड समस्या तो वही है पुरानी। रोटी का सवाल आया हैड्ड वो ठहरा पुराना खिलाडी। अपनी बला टाल आया हैड्ड सुनामी लहरों की शक्ल में। बदनसीबों का काल आया हैड्ड गरीबी पर जब चर्चा हुई। संसद में भूचाल आया हैड्ड
२. हम तो सब भूल-भाल जाते हैं। पता नहीं घर पहुंच कैसे जाते हैंड्ड आजादी के इतने दशकों बाद भी। गरीब आज भी छले चले जाते हैं। उन पर आज भी कानून का जोर नहीं। जो मिलावट करते जाते हैंड्ड हिन्दू-मुसलमाँ गद्दार नहीं होते। गद्दार-गद्दारी करते जाते हैंड्ड हम अंधे युग में किस को समझाएं।
’आशिक‘ चिरागष् जलाए जाते हैंड्ड शिन्दे की छावनी, ग्वालियर-४७४००९ दुःख :: १ ::
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