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Vartmaan Sahitya ::January, 2007
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बदचलन औरत अलबर्ट कामू
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एक मक्खी न जाने कब से बस में चक्कर लगा रही है, जबकि बस की खिडकियाँ बन्द थीं। वह बस के पिछले हिस्से से अगले हिस्से तक और फिर अगले से पिछले हिस्से तक लगातार चक्कर लगा रही है। जेनिन की नजष्रों ने उसका पीछा करना छोड दिया और दूसरी तरफश् देखने लगी। सर्दी की सुबह हल्की रोशनी थी। लोहे की चद्दर और कीलों के शोर के साथ वाहन लुढक रहा था, रुक रहा था और फिर मुश्किल से आगे बढ रहा था। उसने अपने पति की ओर देखा। संकरे माथे पर नीचे की ओर आ रहे भूरे बालों का गुच्छा, चौडी नाक और पतले चेहरे वाला मार्सेल प्राचीन रोमवासियों के वनदेवता की तरह दिखाई देता है। उसने अपने घुटनों के बीच रखी कैनवस की छोटी सी सूटकेस को मजबूती से पकडा हुआ था। अचानक हवा तेजष् हो गयी, जिससे कंकर-पत्थर बस से टकरा कर आवाज करने लगे। रेत भरा कुहासा बस के आसपास और गहरा हो गया। रेत बस की खिडकियों से ऐसे टकरा रही थीं जैसे सैकडों हाथ रेत को बस की खिडकियों पर फेंक रहे हों। बस धीमी हुई और रुक गयी। हवा भी कम हो गई। कुहरा छँटने लगा और बस ने रफ्तार पकडी। खिडकी से धूल-धूसरित लैंडस्केप दिखाई देने लगा। दो-तीन पाम के छोटे-छोटे पेड दिखाई दिये और ओझल हो गये। क्या देश है? मार्सेल बोला। सूर्य उदय होने के साथ ही सब रेल-रोडलाइन के अंत से चलना शुरू हुई थी और दो घंटे इस सर्द सुबह में पथरीले, निर्जन समतल में आगे की ओर बढ रही है। तभी से यात्राी सो रहे हैं। बस के अन्दर छनकर आती हुई रेत की वजह से उनकी आँखें किरकिरा रही हैं। कभी-कभी वे अपने होंठों पर जम आई रेत को पोंछ लेते हैं। जेनिन! मार्सेल के पुकारने पर उसने देखा। एक बार फिर वह सोचने लगी कि उसके जैसी लम्बी और सुगठित देह की मालकिन किसी भी महिला के लिए यह नाम कितना हास्यास्पद है। मार्सेल जानना चाहता है कि उसका सैम्पल वाला बैग कहाँ रखा है। जेनिन ने अपने पैरों से सीट के नीचे की खाली जगह को टटोला तो उसके पैर उस बैग से टकराए। वह बिना हांफे अपने शरीर को आगे नहीं झुका सकती है, जबकि उसने स्कूल के दिनों में जिम्नॉस्टिक के लिए प्रथम पुरस्कार जीता था। अब तो उसे याद भी नहीं कि उसने जिम्नॉस्टिक क्यों छोडा? क्या वह बहुत पुरानी बात है? बीस साल....। पच्चीस साल नहीं हुए....उसे तो यह कल की बात लगती है। जब वह आजाद जीवन और शादी करने के बीच दुविधा में फँसी थी। बिल्कुल कल ही की बात है, जब वह उत्सुकता से उस समय के बारे में सोचती थी, जब वह अकेली ही बुढापे की ओर बढ रही होगी। आज वह अकेली नहीं है और वह विधि का छात्रा जो हमेशा उसके साथ रहना चाहता था अब उसके पास है। उसने अचानक महसूस किया कि कोई उसे घूर रहा है। वह अरब नहीं है और वह इस बात पर चकित है कि अब तक उसका ध्यान इस तरफश् क्यों नहीं गया?उस व्यक्ति ने सहारा की फ्रेंच रेजिमेंट की यूनीफार्म पहन रखी है। उसका चेहरा लटके चमडे जैसा लंबा और सियार जैसा नुकीला है। सिर पर लिनेन की गंदी-सी टोपी पहन रखी है। उसकी भूरी आँखें जेनिन को लगातार घूर रही हैं। वह शर्माई और अपने पति की ओर देखने लगी। उसने अपने कोट की कॉलर खडी करके अपना चेहरा छिपा लिया उसके बाद भी वह सिपाही को देख पा रही थी। वह इतना दुबला और लंबा था कि चुस्त ट्यूनिक में वह बारीक धातु हड्डी और रेत के मिश्रण से बना ढाँचा दिखाई दे रहा है। जेनिन ने अपना कोट घुटनों तक खींच लिया। वह ज्यादा मोटी तो नहीं लेकिन लंबी और छरहरी भी नहीं है। फिर भी कुल मिलाकर आकर्षक है। जैसे ही किसी पुरूष को वह अपनी ओर देखता पाती है-अपने मासूम चेहरे और चमकीली सरल आँखों से अपने कुछ भारी शरीर को कैसे आकर्षक बनाया जा सकता है -इस ओर सजग हो जाती है। यहाँ कुछ भी ऐसा नहीं, जिसकी कल्पना जेनिन ने की थी। जब मार्सेल ने उसके समक्ष इस सफर में साथ चलने का प्रस्ताव रखा था तब उसने बहुत विरोध किया था। कई दिनों से मार्सेल यहाँ आने की योजना बना रहा था। युद्ध खत्म होते ही खासकर तब से जब से व्यवसाय सामान्यता की ओर बढने लगा था। युद्ध से पहले छोटी-छोटी सूखी चीजषें का व्यापार उसने अपने माता-पिता से विरासत में पाया था, तब जब उसकी कानून की पढाई उसे अच्छा खासा जीवन उपलब्ध करा सकती थी। उन्होंने फिर समुद्र तट पर कई वर्षों तक युवावस्था के खुशनुमा दिन बिताये थे। लेकिन मार्सेल को शारीरिक श्रम ज्यादा पसंद नहीं था और जल्द ही उसने उसे समुद्र तट पर ले जाना बंद कर दिया। जब रविवार को छोटी कार में सवार होकर वे शहर से बाहर जाया करते हैं। बाकी दिनों में वे आधे मूल निवासी और आधे यूरोपियनों के घरों से आच्छादित रास्ते पर बनी अपनी दुकान को रंग-बिरंगे वस्त्राों से भर कर रखना पसंद करता है। वे दुकान के ऊपर अरबी पर्दों, छोटी गैलरी और बार्बस के फर्नीचर से सजे तीन कमरों के मकान में रहते हैं। उनका कोई बच्चा नहीं है। आधे अंधेरे, आधे बंद शटर के पीछे कई बरस यूँ ही गुजर गये। गर्मी समुद्र तट, पर्यटन ये केवल बीते कल की बात हो गयी। मार्सेल को और किसी भी चीजष् में रुचि नहीं है सिवाय व्यापार के। जेनिन ने महसूस किया कि उसने मार्सेल के पागलपन की खोज कर ली है और वह है पैसा। वह उसके इस स्वभाव को पसंद नहीं करती है। बावजूद इसके कि वह जेनिन के प्रति बहुत उदार है। ’यदि मुझे कुछ हो जाय तो तुम्हें कोई मुश्किल नहीं होगी‘-मार्सेल अक्सर कहता है। गर्मी हमेशा ही मुश्किल होती है। जैसा कि गर्मी में होता आया है, युद्ध शुरू हो गया। मार्सेल को बुलाया गया फिर स्वास्थ्य के आधार पर वापस भेज दिया गया। कपडों की आपूर्ति कम होने से व्यवसाय ठप और सडकें सूनी तथा गर्म रहने लगीं। मार्सेल ने गाँव के ऊपरी पठार पर स्वयं कपडे की आपूर्ति करने का निर्णय किया। साथ ही दक्षिण में बिना दलालों के सीधे अरब व्यापारियों को कपडा बेचने का मन बना लिया। वह जेनिन को साथ ले जाना चाहता था। सफश्र जेनिन के लिए हमेशा ही मुश्किल होता है। उसे सांस की तकलीफश् है और वह घर में ही रहना चाहती थी, लेकिन मार्सेल जिद्दी है और उसके साथ जाने की अपेक्षा उसे न जाने के लिए तर्क करने में ज्यादा ऊर्जा लगेगी इसलिए वह मार्सेल के साथ आ गयी। और अब वह यहाँ है। वास्तव में उसने वैसा कुछ भी नहीं पाया जिसकी उसे उम्मीद थी। उसे गर्मी, मक्खियों के झुंड, गंदी और सौंफश् की बदबू से भरे होटलों से डर लगता था। हिम नदी द्वारा जगह-जगह काटे गये इस मैदान में सर्दी और तीखी हवा के बारे में तो सोचा ही नहीं था। उसने खजूर के पेड, हवा और मुलायम रेत की कल्पना की थी, लेकिन फिर भी रेगिस्तान वैसा नहीं है, जैसी उसने कल्पना की थी। हर तरफ केवल पत्थर ही पत्थर है। आकाश धूल और धूल के उडने से पैदा हुई ध्वनि और सर्दी से ढँका है। और वैसे ही जमीन पर पत्थरों के बीच कुछ भी नहीं है सिवाय सूखी घास के। बस एकाएक रुक गयी। ड्राइवर उस भाषा में जोर से चिल्लाया जिसे जेनिन ने सारे जीवन सुना लेकिन कभी समझ नही पायी। ’क्या बात है?‘-मार्सेल ने ड्राइवर से पूछा। उसने इस बार फ्रेंच में कहा कि कारबोरेटर में रेत भर गयी है।एक बार फिर मार्सेल ने इस देश पर लानत-मलामत भेजी। ड्राइवर हँसा और विश्वास दिलाया कि कुछ भी नहीं हुआ है। वह कारबोरेटर को साफ कर देगा और बस चल पडेगी। ड्राइवर ने दरवाजा खोला तो रेत के कणों के साथ ठंडी हवा यात्रिायों के चेहरों पर लगने लगी। ’दरवाजा बन्द करो‘-मार्सेल चिल्लाया। ड्राइवर दरवाजे के पास आया और हँस दिया। उसने डेशबोर्ड से कुछ औजार निकाले और कुहरे में फिर गायब हो गया। मार्सेल ने ठंडी सांस लेकर कहा-’तुम विश्वास करो, इसने अपने जीवन में कभी भी मोटर नहीं देखी है।‘ ’चुप रहो मार्सेल ‘! जेनिन ने कहा। ड्राइवर फिर लौट आया। उसने घोषणा के स्वर में कहा कि हम जल्दी ही चल पडेंगे। उसने दरवाजा बंद किया तो बाहर से हवा आनी बंद हो गयी। बस ने अजीब-सी आवाज की और खामोश हो गयी। ड्राइवर ने स्टार्टर पर एक लंबा प्रयास किया तो स्पार्क हुआ। उसने एक्सीलरेटर को दबाकर बस को रफ्तार दी। जेनिन ने महसूस किया कि वह उनींदेपन से बाहर आने लगी है, तभी उसने अपने सामने एक छोटी पीली डिबिया देखी जो चूसने की गोलियों से भरी हुई थी। सियार जैसा दिखने वाला सिपाही उसकी ओर देखकर मुस्कुराया। जेनिन थोडा हिचकी, फिर एक गोली उठा ली और उसे धन्यवाद दिया। इस बीच जोर से ब्रेक लगने की आवाज आई और बस एक कच्ची ईंटों से बनी गंदी-सी खिडकियों वाले होटल के सामने रुक गयी। जेनिन बस से बाहर आ गयी और डगमगाते कदमों से चबूतरे पर चलने लगी। उसने अपनी बांयी तरफ इस रेगिस्तान का पहला ताड का पेड देखा। मार्सेल सामान उतरवाने में व्यस्त था। जेनिन को अचानक थकान का अनुभव होने लगा। ’मैं अन्दर जा रही हूँ‘-उसने मार्सेल से कहा। वह उत्तेजित होकर ड्राइवर पर चिल्ला रहा था। होटल का मैनेजर एक दुबला और छोटे कद का फ्रांसीसी था, वह जेनिन से मिलने आया। उसने जेनिन को दूसरी मंजिल की बालकनी (जहां से सडक नजर आती है ) और उससे लगे कमरे में ले गया। कमरे में साफ बिस्तर लगा हुआ था और सफेद रंग से पेंट की हुई कुर्सी, बिना परदे का वार्डरोब और शटर वाली खिडकी के पीछे वाशबेसिन था। वह नहीं जानती कि कहाँ वह अपना बैग रखे और कहाँ खुद को....। बैठने पर और खडे रहने पर दोनों ही स्थितियों में वह कंफपा रही थी। वह खडी ही रही। उसने अपना बैग संभाला और छत से लगे छोटे से रोशनदान की तरफ देखने लगी जो आसमान की तरफ खुलता था। उसे इंतजार था....किस चीज का नहीं जानती ....? वह सचेत थी....अपने अकेलेपन, शरीर को भेदने वाली सर्दी और दिल पर महसूस होने वाले बोझ के प्रति....। वह वास्तव में सपना देख रही थी। मार्सेल की गुस्से भरी आवाज सहित सडक से आते शोर की तरफ से लगभग बेखबर वह रोशनदान से आती नदी के बहने और हवा में हिलते ताड के पेड की आवाज के प्रति संवेदनशील हो उठी। उसने इस सबको इतना करीब महसूस किया कि उसे यह सब दिखने लगा। हवा और तेज हो गयी और जेनिन को छोटी-छोटी लहरों के बहने की आवाज सुनाई देने लगी। उसने कल्पना की कि दीवार के उस पार तेज हवा से लहराते, लचकते ताड के वृक्षों का समूह है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था। लेकिन वे अदृश्य लहरें उसकी थकी हुई आँखों को सुकून दे रही थीं। लम्बे लचकते ताड के वृक्षों के सपने देखते वह नवयुवती हो गयी जो वह कभी थी। नहा लेने के बाद वे लोग डाइनिंग रूम में गये। मार्सेल ने होटल मैनेजर से व्यापारियों के बारे में पूछताछ की। एक अधेड उम्र का अरब अपने ट्यूनिक पर सैनिक की सज्जा किए हुए खाना लगा रहा था। मार्सेल ने अपनी पत्नी से पीने के लिए पानी ले लिया-’यह उबला हुआ नहीं है, वाइन ले लो‘। वाइन उनींदा करती है, इसलिए जेनिन को वाईन पसंद नहीं थी। मेनू में सूअर का गोश्त होने के बाद भी मार्सेल ने कहा-’ये लोग सूअर का मांस नहीं खाते हैं, क्योंकि कुरआन में यह वर्जित है। लेकिन कुरआन को यह नहीं पता कि अच्छी तरह से पका हुआ सूअर का गोश्त बीमार नहीं करता है। हम फ्रांसीसी जानते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है। तुम.... क्या सोच रही हो? वह कुछ भी नहीं सोच रही थी। शायद रसोइयों की पैगम्बर पर हुई विजय के बारे में सोच रही थी। मार्सेल ने उस अधेड अरब से जल्दी कॉफी लाने के लिए कहा, वह सिर झुकाये हुए कुछ बुदबुदाया। यद्यपि कॉफी जल्दी आ गयी थी फिर भी ’सुबह धीरे और दोपहर में जल्दी नहीं‘ कहकर मार्सेल हंस दिया। उन्होंने कॉफी पीने में ज्यादा समय नहीं लगाया और जल्दी ही वे धूल भरी ठंडी सडक पर थे। वह लगातार स्वयं को थका हुआ महसूस कर रही थी। लेकिन उसका पति लगातार ज्यादा उमंग में लग रहा था। उसने अपना सामान बेचने की शुरुआत कर ली थी और स्वयं को बहुत उदार महसूस कर रहा था। उसने जेनिन से कहा-’बेबी, यह यात्राा बेकार नहीं जायेगी।‘ दोनों दूसरी तरफ वाले रास्ते से चौराहे की ओर बढ रहे थे। दोपहर ढल रही थी, आसमान लगभग साफ हो चला था। धीरे-धीरे जेनिन इस सबसे ऊबने लगी थी और वह यहाँ से सीधे अपने छोटे से फ्लैट में चली जाना चाहती थी। उसे फिर से होटल के उस ठंडे कमरे में जाने के विचार मात्रा से कोफ्त होने लगी थी....। अचानक उसे याद आया कि होटल के मैनेजर ने उसे बताया था कि किले की छत से रेगिस्तान दिखाई देता है। उसने यह बात मार्सेल को बताई और कहा कि वह बक्से होटल में छोड सकता है। लेकिन वह बहुत थक गया था और रात के खाने से पहले थोडा सो लेना चाहता था। ’प्लीज‘ जेनिन ने उससे अनुरोध किया तो उसने उसकी तरफ प्यार से देखा और कहा-’ऑफकोर्स माई डियर।‘ जब वे किले की सीढयां चढ रहे थे तब पांच बज रहे थे। हवा धीरे-धीरे थमने लगी थी। आसमान बिल्कुल साफ और नीला हो गया था। ठंड के तीखे होने से उसका चेहरा लाल हो उठा था। अभी कुछ ही सीढयां चढे थे कि उनके सामने एक अरब आकर खडा हो गया। वह पूछ रहा था कि क्या उन्हें गाइड की जरूरत है? यद्यपि वे उसे इन्कार कर चुके थे, फिर भी वह वहाँ से नहीं गया। सीढयां लम्बी और ज्यादा थीं और बार-बारे वो चौरस भूमि पर आकर खत्म हो रही थीं। जैसे-जैसे वे ऊपर की ओर बढ रहे थे, वैसे-वैसे क्षेत्रा विस्तृत होता जा रहा था। वे लगातार तीखी ठंड और खुश्क रोशनी की तरफश् बढ रहे थे। जहाँ वे रेगिस्तान से आने वाली प्रत्येक ध्वनि को स्पष्ट सुन पा रहे थे। तीखी हवा उन्हें कंफपा रही थी। जैसे-जैसे वे छत की ओर बढ रहे थे, उनकी निगाह ताड के जंगल के आगे विस्तृत क्षितिज में खोने लगी थीं। जेनिन को ऐसा अनुभव होने लगा था जैसे सारा आसमान तेज धुन में बज रहा है, जिसकी ध्वनि धीरे-धीरे पूरे ब्रह्माण्ड को भर रही है और फिर उसने स्वयं को खामोशी के असीम विस्तार में पाया। पूर्व से पश्चिम को जोडती वकर्ाकृति में बिना किसी अवरोध के उसकी निगाह खो गयी। रेगिस्तान पर खामोशी का इतना विस्तार जितना अंतरिक्ष....। नीरव सन्नाटा और अपने समक्ष फैले इस महाशून्य से स्वयं को अलग कर पाने में सर्वथा असमर्थ जेनिन। उसके बिल्कुल विपरीत मार्सेल एकदम बेचैन हो रहा था। आखिकार यहाँ देखने के लिए था ही क्या? जेनिन थी कि उसकी नजरें क्षितिज से अलग हो ही नहीं पा रही थीं। सुदूर दक्षिण में उस बिन्दु पर जहाँ धरती और आसमान अपने मिलन की स्पष्ट रेखा बना रहे हैं-जेनिन खो रही है ....æ

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