|
Vartmaan Sahitya ::January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner मनोहर बाथम की तीन कविताएं
वापसी अपने ही शहर में वारदात करके वो छुपने आया अपने ही घर साथ में दो आदमी और एक महिला दो दिन को ही सही बाप को बेटा माँ को दुलारा बहन को भाई मिला और पत्नी को?? सारी रात उसकी बगल में थी वो महिला आतंकी और पत्नी उतनी ही अकेली जितनी कि दो साल पहले सिसकियों में डूबी थी वो रात और पास उठती वो हँसी जिसका उसे भी रहा इंतजार दो साल तक स अगले शनिवार लाश के अलावा सब सबूत कि वो जिन्दा नहीं हर शनिवार को आती है पार से अब जो ’थार एक्सप्रेस‘ कासिम मियाँ बूढी लकडी के सहारे दूर की नजरों के चश्मे को सम्हाले हर उतरनेवाले में ढूँढते अपना बेटा जब कोई बताता है कि वो अब नहीं तो वो गुस्सा नहीं करते कहते कि अफवाह है यह वो जरूर आएगा अगले शनिवार स ना उम्मीद होना बडे-बुजुर्गों, वालिद-वालदाओं ने लगा के बडी-बडी उम्मीदें इंजीनियर डॉक्टर पायलेट वकील और मास्टर सभी बना डाले इंजीनियर बम बना रहा है डॉक्टर दहशतगर्दों का इलाज पायलेट टकरा रहे मीनारों से वकील चला रहे तंजीमे मास्टरजी सिखा रहे धर्मयुद्ध ऐसी बडी-बडी उम्मीदों से तो अच्छा है ना उम्मीद होना सीमा सुरक्षा बल मुख्यालय, सी.जी.ओ. कॉम्पलेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली दुःख : तीन कविताएँ सुरेन्द्र काले दुःख १ खिलौने से जैसे खेलते हैं बच्चे खेलते-खेलते तोड देते हैं हमसे खेलते-खेलते दुःख हमें तोड देता है दुःख छुपाते हुए हम कहीं से आहत नहीं होते हैं हमारी आँखों में फूलों की नाजुक दुनिया डरावनी हो जाती है मैं माँ के पास गया पता नहीं कब बिना शब्द बिना ध्वनि धीरे से वह माँ के घुटनों में समा गया दुःख बडा नहीं होता उसके आगे हम छोटे हो जाते हैं थके हुए पिता आए मैं कुछ पूछूँ वह कोने में पडी उनकी छडी में समा गया पेड वह सब कर रहा था जितना चुप रह कर हम जीने के लिए करते रहते हैं पेड के पास गया पत्ते झूम-झूम कर उत्सव मना रहे थे आगे-आगे चलता दुःख मुझे देखते ही पेड में समा गया लोग बताते हैं उस दिन के बाद पेड कभी नहीं बोला दुःख २ दुःख की प्रागैतिहासिक कथा है कथा वाचक कहते-कहते कभी नहीं थकता और इस कथा को दुहराता रहता है दुःख ३ माँ की गोद में मैं अकेला नहीं था अगला भी था सूखा स्तन मुँह से लगाए माँ ने दोनों के सर पर आँचल डाल लिया था नवाब कॉटेज, पुर्दिलपुर, गोरखपुर
Discuss this topic on KhabarExpress Forum
|
|
October, 2006 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | March, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | April, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | May, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | | June, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner | | |
|