KhbarExpresswww.khabarexpress.com

India Yellow Pages - rajb2b.com

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS Wednesday, February 15, 2012



Vartmaan Sahitya ::January, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner

रंगमंच के लिए चार मुखर आख्यान
विजय पण्डित

More Articles

डॉ. सुरेश शुक्ल ’चंद्र‘ हिन्दी के ऐसे लब्ध प्रतिष्ठित नाटककार हैं, जो लेखन के साथ ही साथ नाटकों के निर्देशन से भी गम्भीरतापूर्वक जुडे हैं। आकाश झुक गया, भस्सासुर अभी जिष्न्दा है-कुत्ते, लडाई जारी है, असरावट, भूमि की ओर, प्रेरणा, बदलते रूप, भावना के पीछे, शादी का चक्कर, बात एक हर्ष की, अर्द्धनारीश्वर इत्यादि उनके प्रकाशित नाटक ह। चूंकि डॉ. चन्द्र मंचन से भी जुडे रहे हैं, इसलिए उनके अधिकांश नाटकों का प्रकाशन मंचन के पश्चात् ही हुआ है। वह इसलिए कि वे अपने नाटकों के प्रकाशन में उतना विश्वास नहीं रखते जितना कि मंचन में। वे इस बात को लेकर सजग और सतर्क रहते हैं कि मंचनोन्मुख नाटकों की रचना की जाय। ’’चार अंतरंग‘‘ उनके चार प्रयोगशील नाटक हैं। साथ ही साथ चारों की विषयवस्तु व विन्यास भी एकदम अलग। चाहे वह कब्रगाह हो, आत्मकथा पाषाणी की, कस्तूरी कुण्डल बसै और एक था महामन्त्राी। ये चारों नाटक अलग विषय वस्तु, अलग प्रयोग और अलग संरचना के उदाहरण हैं। ’कब्रगाह‘ में यद्यपि एक असंगत प्रयोग है, लेकिन यह यथार्थ से मुक्त भी नहीं है। दरअसल यह नाटक कई छोटे-बडे अनुभवों का एक कोलाज है जैसा कि नाटककार ने स्वीकार भी किया है कि सभी अनुभव विभिन्न अवसरों पर विभिन्न लोगों के बीच घटे हैं और अपनी रंगदृष्टि का प्रयोग करते हुए डॉ. चन्द्र ने इसे एक नाटक में तब्दील कर दिया है। नाटक में परिवेश अपने आप निर्मित हुआ है। यद्यपि इसमें न तो चरित्राों का कोई संघर्ष है और न घटनाओं का पूर्व नियोजित क्रम, फिर भी नाटक आन्तरिक रूप से एक सूत्रा में बँधा है। नाटक में दो ही पात्रा हैं और मंच पर संवाद ही कार्य व्यापार का पर्याय बनता है। ’’कब्रगाह‘‘ के दोनों पात्रा मुम्बई की सडकों पर हैं। वे घूम कर दुनिया को देख रहे हैं और अपनी भीतर की दुनिया को लोगों के बीच बाँट रहे हैं उनका देश, समाज और व्यक्ति को लेकर एक अलग अनुभव है। वे बेबाक टिप्पणी करते हैं समाज के विभिन्न व्यक्तियों और प्रतिनिधियों पर इसके साथ ही साथ इनके द्वारा उत्पन्न विसंगतियों पर। यहाँ पर नेता, गुलामी, आजषदी, लोकसभा, पण्डित, धर्मोपदेशक, पुलिस, वेश्या, दलाल, भिखारी, ठेकेदार, वकील, कचहरी, ज्योतिषी, साधू आदि....आदि सभी ह। सब पर नाटककार ने बेबाक टिप्पणी की है। लेकिन इसके साथ ही नाटक मात्रा उपदेशों की थैली बनकर नहीं रह जाता है। संवादों का तीखापन जहाँ पर दर्शकों को जीवन के नंगे सच का बोध कराता है, वहीं उसका व्यंग्य दर्शकों और पाठकों में आगे घटित होने वाली घटनाओं के प्रति उत्सुकता भी बनाये रखता है। ’आत्मकथा पाषाणी की‘ मूलतः एक एकालाप है। यद्यपि यह आत्मकथा पाषाणी की है लेकिन सच तो यह है कि पाषाणी मात्रा एक प्रतीक है-पूरी नारी जाति की। इसमें मानवजीवन के प्रारम्भिक काल से लेकर आज तक की नारी की मनः स्थितियों का मार्मिक चित्राण है। वह खुद की साक्षी है और साक्षी है-जीवन संघर्षों की और आरोपों-प्रत्यारोपों के साथ ही साथ उससे जूझने की व्यथा की भी। यहाँ मात्रा एक चरित्रा है। मंच पर अपने भीतर वह तमाम नारियों के दुख-दर्द को परत-दर-परत समेटे हुए है। पूरा नाटक चूँकि एक ही पात्रा पर केन्दि्रत है इसलिए किसी भी अभिनेत्राी के लिए पूरे समय तक मंच पर इतने लम्बे संवादों के साथ अपनी उपस्थिति बनाये रखना निश्चित रूप से एक चुनौती भरा कार्य है। ’कस्तूरी कुण्डल बसै‘ कबीर के जीवन पर केन्दि्रत है। सवाल यह उठता है कि कबीर पर वैसे ही पूर्व में भी कई नाटक आ चुके हैं यथा-भीष्म साहनी कृत कबिरा खडा बाजषर में, महावीर अग्रवाल कृत काशी का जुलाहा, सुरेन्द्र वर्मा कृत इकतारे की आंख आदि। फिर इस नाटक की क्या जष्रूरत आन पडी? एक तो यह नाटक एक मोनोलोग की शैली में है, दूसरे इसमें नाटककार ने वर्तमान संदर्भों के साथ जोडकर एक प्रयोग किया है। समाज में जो विकृतियां कबीर के समय में थीं, वही आज भी विद्यमान हैं। ऐसी स्थिति में वे पहले की अपेक्षा आज अधिक प्रासंगिक हो गये हैं। इसमें सूत्राधार कहें, नाटककार कहें या उद्घोषक, वहीं सीधे दर्शकों से मुखातिब होता है, बीच-बीच में अलग-अलग घटनाएं घटती जाती हैं और कबीर उससे बाबस्ता होते जाते हैं। बीच-बीच में कबीर के पद कबीर को और भी प्रामाणिक बनाते जाते हैं। करीब-करीब एक पूर्ण मंचीय सम्भावनाओं से युक्त एक पूर्ण नाटक और अन्तिम नाटक-एक था महामन्त्राी। कभी डॉ. चन्द्र ने अक्षयवट नाटक लिखा था जिसने उन्हें बतौर नाटककार स्थापित किया था। मात्रा छः पात्राों का लघु नाटक। यह नाटक शौकिया रंगकर्मियों के साथ-साथ विद्यालयों-विश्वविद्यालयों में बडे ही रंग-कौशल के साथ मंचित किया जा सकता है। यह नाटक चाणक्य के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को छूता है जिन्हें डॉ. चन्द्र अक्षयवट में शामिल कर पाये थे। यह आज की राजनीतिक व्यवस्था और विशेषकर शासन तन्त्रा के लिए एक ऐसा दर्पण है जिसमें उसे झाँककर देखने की जष्रूरत है। डॉ. चन्द्र के चारों नाटक मूलतः सामाजिक कुरूपता और उसके विरूद्ध लडाई के लिए हस्तक्षेप करते हैं। वे चाहे कब्रगाह के दोनों मुसाफिर हों, आत्मकथा पाषाणी की नायिका, कस्तूरी कुण्डल बसै के कबीर हो या एक था महामन्त्राी के चाणक्य लेकिन वे मात्रा, उपदेश की शैली में नहीं हैं। इसमें कई रंग प्रयोग भी है-मोनोलाग, असंगतता, यथार्थ और ब्रेख्त का एलियनेशन। पात्राों की सीमित संख्या और सरल मंच विधान जहां रंगकर्मियों को मंचन के लिए प्रेरित करेगा। वहीं पर नये नाटकों को करने के लिए एक चुनौती भी देगा। अगर फिर भी इस पर रंगकर्मियों का ध्यान नहीं जाता तो उनका यह रुदन अनावश्यक ही माना जायेगा कि हिन्दी में नये नाटक नहीं हैं। हाँ, अगर इन नाटकों को मंचित करने में कहीं भी किसी को स्क्रिप्ट में निर्देशकीय हस्तक्षेप या परिवर्तन करने की जष्रूरत भी पडती है तो उसके लिए डॉ. चन्द्र कहां पीछे हटने वाले हैं?



Discuss this topic on KhabarExpress Forum 

Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 


October, 2006 <br> Sponsered by : Decor Home, BikanerOctober, 2006
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
January, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJanuary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
February, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerFebruary, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
March, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMarch, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
April, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerApril, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
May, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerMay, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 
June, 2007 <br>Sponsered by : Decor Home, BikanerJune, 2007
Sponsered by : Decor Home, Bikaner
 

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares