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सैयद मुहम्मद असलम की दो गजले
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(१) भागने से तो कुछ न पाओगे कब तलक जिष्न्दगी से भागोगे। हर कोई जब गष्मों का मारा हो, किससे गष्म का हिसाब मांगोगे? बात सच्ची है, ये बुजुर्गों की, जैसा बोओगे वैसा काटोगे। मेरी सादा-दिली के बारे में, एक दिन तुम जष्रूर सोचोगे। भारी कशीमत चुकाओगे इसकी दिल जो मजष्लूम का दुखाओगे। ख्वाब क्या था तुम्हारा, सुन लेंगे, नींद से तुम कभी तो जागोगे।
(२) रंग लायेगी शायरी इक दिन आएगी प्यार की सदी इक दिन सुनके पुरवाई की कहीं कोई बात मस्त झूमेगी हर कली इक दिन दिल परीशाँ है सोचकर तेरी मार डालेगी बेरुख्ाी इक दिन दोस्तों से यही गुजषरिश है हो न शर्मिन्दा दोस्ती इक दिन सुन के फश्रमान सब शहीदों के दूर खुद होगी बेबसी इक दिन।
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