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Vartmaan Sahitya ::January, 2007
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चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा का हिन्दी अनुवाद मधु, नीटी
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चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा एक महान अभिनेता के जीवन का महाकाव्य है और सूरज प्रकाश ने इसका हिन्दी में अनुवाद करके हिन्दी जगत को एक बहुत बडी सौगात दी है। चार्ली ने परदे पर अपने मूक अभिनय के जरिये जो कुछ भी साकार किया वह उनके अपने जीवन का सच था। ट्रैम्प का बाना धारण करके चार्ली मजषक-मजषक में अपनी जिन्दगी के सारे कडवे और मीठे सच हमारे साथ बांटते चलते हैं और हम जान भी नहीं पाते कि चार्ली की इस हँसी ठिठोली के पीछे कितनी करुणा छिपी है। उक्त विचार प्रख्यात साहित्यकार और फिल्मकार वेद राही ने ४ नवम्बर ०६ को मुंबई में भवंस कल्चरल सेंटर की ओर से सूरज प्रकाश द्वारा अनूदित चार्ली चैप्लिन की आत्म कथा के हिन्दी अनुवाद के लोकार्पण के अवसर पर व्यक्त किये। चार्ली के चहेते दर्शकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में अपनी तरह के इस अनूठे कार्यक्रम में श्री वेद राही ने आगे कहा कि चार्ली ने अपना बचपन गरीबी में बिताया, तकलीफें भोगीं लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी भी आंखों से ओझल नहीं होने दिया कि एक दिन उन्हें अभिनेता बनना है। उन्होंने कहा कि चार्ली चैप्लिन की आत्म कथा विश्व की चुनिंदा आत्म-कथाओं में से एक मानी जाती है और हर फिल्मकार और साहित्यकार को इसे जरूर पढना चाहिये। किताब धीरे-धीरे ही सही, हिन्दी जगत में अपनी महत्वपूर्ण जगह बना लेगी। कार्यक्रम की शुरूआत में चार्ली चैप्लिन की बेहद मार्मिक मूक फिल्म-सिटी साइट्स के कुछ अंश दिखाये गये। सूरज प्रकाश ने इस महत्वपूर्ण किताब के अनुवाद से जुडे अपने अनुभव सुनाये। उन्होंने बताया कि चार्ली ने एक बार कहा था कि मैं बरसात में भीगते हुए रोता हूँ ताकि कोई मेरे आंसू ने देख सके। इसी अकेली उक्ति से ही सिद्ध हो जाता है कि दुनिया भर को बरसों बरस हंसाने वाला आदमी दरअसल कितना अकेला था और उसमें कितनी असीम करुणा थी। इस किताब पर बात करते हुए फिल्म समीक्षक और साहित्यकार अजय ब्रह्यात्मज ने सूरज प्रकाश द्वारा बेहद सरस, रोचक और सहज भाषा में किये गये अनुवाद की चर्चा करते हुए चार्ली के राजनैतिक विचारों पर अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि किस तरह से चार्ली को चालीस बरस अमेरिका में बिताने के बाद भी अपने तथाकथित एंटी अमेरिकी स्टैंड की वजह से बेआबरू हो कर वहां से जाना पडा था। उन्होंने इस अनुवाद के प्रकाशक, आधार प्रकाशन, पंचकूला के श्री देश निर्मोही के लिए ये संदेश दिया कि वे इस किताब का संक्षिप्त संस्करण निकालने के बारे में भी सोचें क्योंकि आज के भागमभाग के युग में ५९५ पेज की किताब पढ पाना आसान नहीं रह गया है। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा आत्मकथा के कुछ रोचक अंशों का पाठ। श्रोताओं ने आत्मकथा के अंशों के पाठ पर जम के ठहाके लगाये। डॉ. पुष्पा भारती ने आत्मकथा के दो अंशों का बहुत शानदार पाठ करते हुए कहा कि सूरज प्रकाश ने यह अनुवाद करके बहुत बडा काम किया है। इस तरह का जीवंत और हिन्दी की अपनी गमक लिये हुए अनुवाद एक संवेदनशील रचनाकार ही कर सकता है। अभिनेत्राी और कवयित्राी नेहा शरद ने आत्मकथा के एक अन्य रोचक अंश का पाठ करते हुए कहा कि चार्ली की आत्मकथा एक ऐसी किताब है जिसे कभी भी कहीं से भी पढा जा सकता है। हर रचनाकार के सिरहाने अब तो इसके अंग्रेजी संस्करण के साथ-साथ हिन्दी संस्करण भी होना चाहिए। आत्मकथा में से चार्ली के पाँच बरस की उम्र में पहली बार मंच पर आने के दृश्य को साकार किया सूरज प्रकाश के छोटे बेटे अभिज्ञान ने अपने बेहद सधे हुए पाठ के द्वारा। आत्मकथा के कुछ अंश पढे अभिनेता राजकुमार कनौजिया और विजय पंडित और कवि वागीश सारस्वत ने। कार्यक्रम का अत्यंत कुशल संचालन किया अभिनेता शैलेन्द्र गौड ने। लगभग तीन घंटे तक चला यह कार्यक्रम अपनी अनूठी परिकल्पना और प्रस्तुति के कारण अरसे तक मुंबई के साहित्य जगत में याद किया जायेगा।



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