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Vartmaan Sahitya ::January, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner वंचित एवं कमजोर वर्ग के हितों की वकालत करती हैं ’सफेद जनतंत्रा‘ की कविताएँ
लीना
हिन्दी कविता का वर्तमान अपने समय, चेतना और परिवेश के तल्ख्ा यथार्थ को साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में अधिक प्रखरता से व्यक्त कर रहा है।‘ ये विचार बिहार के मानव संसााधन विकास मंत्राी वृशिण पटेल ने विगत १९ नवम्बर २००६ को पटना के रिपब्लिक होटल में चर्चित कवि शिवनारायण के सद्यः प्रकाशित काव्य-संग्रह ’सफेद जनतंत्रा‘ को लोकार्पित करते हुए व्यक्त किये। श्री पटेल ने कहा कि बाजारवाद के नृशंस दबाव को झेलते हुए भारतीय समाज के मध्यवर्ग की बनावट में जो परिवर्तन हो रहे हैं, उसे शिवनारायण की कविताएँ मुखर करती हैं। इनकी कविताएँ दलित, वंचित एवं कमजोर वर्ग के हितों की वकालत करते हुए विश्व आर्थिक उदारीकरण को भारतीय जनता के खिलाफ घोषित करती हैं। दस्तक साहित्य परिषद् और विशाल पब्लिकेशन की ओर से आयोजित लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता बिहार सरकार के पूर्व गृह सचिव जियालाल आर्य ने की। संचालन डॉ. राधाकृष्ण सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में समालोचक डॉ. अमर कुमार सिंह ने ’सफेद जनतंत्रा‘ की कविताओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि शिवनारायण राजनीतिक चेतना के सम्पन्न कवि हैं। इनकी कविताएँ पूँजी संस्कृति के अनैतिक विकास से उत्पन्न सामाजिक विकृतियों पर प्रहार करती हैं तथा जन-पक्षधरता का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। पूर्व राज्य मंत्राी श्री संजय पासवान ने इस अवसर पर कहा कि शिवनारायण ने बिहार के राजनीतिक यथार्थ को पकडते हुए उसपर जो कटाक्ष किया है, वह समकालीन राजनीति की पीडा को भी व्यक्त करता है। प्रेमकुमार मणि ने शिवनारायण को उपेक्षित-वंचित वर्ग का मुखर वक्ता बताते हुए कहा कि उनकी कविताओं में समय-समाज और तिरस्कृत वर्ग की पीडा का मार्मिक आख्यान है। डॉ. राधाकृष्ण सिंह ने कहा कि डॉ. शिवनारायण बहुआयामी मेधा के सर्जक हैं। बिहार सरकार ने भी अपने सर्वोच्च काव्य सम्मान ’नागार्जुन पुरस्कार‘ से इन्हें सम्मानित किया। डॉ. खगेन्द्र कुमार ने कहा कि शिवनारायण की कविता प्रतिपक्ष की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए आम आदमी के दुख-दर्द, संघर्ष और पीडा को अभिव्यक्त करती है। समारोह के आरम्भ में डॉ. रामशोभित प्रसाद सिंह ने स्वागत भाषण के क्रम में कहा कि डॉ. शिवनारायण ने कविता के साथ-साथ समीक्षा और आलोचना के क्षेत्रा में भी गम्भीर लेखन किया है। समारोह में प्रसिद्ध समाजसेविका शीला सिन्हा, कृष्णानन्द, संजय कुमार, अरुण कुमार, शिल्पी सिंह, सिद्धेश्वर सहित बडी संख्या में साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित थे। डॉ. सतीशराज पुष्करणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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