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Vartmaan Sahitya :: February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner |
वर्तमान साहित्य द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता
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वर्तमान सहित्य द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में लगभग सौ कहानियाँ प्राप्त हुई। अंतिम चक्र में २२ कहानियाँ चुनी गई। इनमें से कुछ कहानियाँ वरिष्ट कहानीकारों की है और अधिकांश कहानियाँ अपेक्षाकृत नवोदित कहानीकारों की है। कई कहानियाँ तो ’कहानी‘ बन ही नही पाई। ये कहानियाँ निजी अनुभव, वैचारिक उधेडबुन, जीवन की किसी घटना तक ही सिमटकर रह गई। जीवन के व्यापक अनुभवों, सामाजिक सरोकार, भाषा आदि की दृष्टि से ये कमजोर कहानियाँ है। कुछ कहानियों में जीवन के अंतर्विरोधों की पकड और प्रौढता दिखाई देती है जो कि प्रतियोगिता की श्रेष्ठ कहानियाँ कहीं जा सकती है। संवेदनात्मक धरातल के स्तर पर ये कहानियाँ महत्वपूर्ण प्रभाव छोडती है जिसमें कमल की कहानी ’प्रोजेक्ट आक्सीजन‘, सुषमा मुनीन्द्र की ’शो फ्लॉप‘, रामदेव शुक्ल की ’हिंसा और अहिंसा‘, अनवर सुहैल की ’तिलचट्टे‘, दिनेश पालीवाल की ’यथास्थिति‘ तथा मोहम्मद हनीफ गदार की कहानी ’बंद कमरे की रोशनी‘ प्रमुख हैं। इसके अलावा जिन अन्य कहानियों ने प्रभावित किया, उनमें ’बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स की मुराली‘-राजेन्द्र चंद्रकांत राय, ’जिन्दा आदमी की शवयात्राा‘-मुरारी शर्मा, संजीव जायसवाल ’संजय की कहानी, ’उसकी रोटी‘, ’कोहरा‘ डॉ. अनुपम माथुर, ’कुछ न कुछ छूट ही जाता है‘-डॉ. रजनी गुप्त, है। एक कहानी ’रूको... यहाँ भी एक जिन्दगी है‘ सुदूर दक्षिण, केरल की छात्राा, निशा रवीन्द्रन की प्राप्त हुई। प्रोत्साहन हेतु उसे भी अपनी सूची में शामिल कर रहे हैं। ये सभी बारह कहानियाँ ’वर्तमान साहित्य‘ के आगामी अंकों में प्रकाशित की जाएँगी। श्री कमलेश्वर द्वारा प्रदत्त थे। इन पुरस्कारों के लिए आयोजन संबंधी सूचना शीघ्र ही दी जाएगी। पुरस्कृत कहानियाँ
१. प्रोजेक्ट ऑक्सीजन ः कमल
२. शो फ्लॉप ः सुषमा मुनीन्द्र
इसी क्रम में अन्य कहानियाँ इस प्रकार हैं
१. हिंसा और अहिंसा ः रामदेव शुक्ल
२. तिलचट्टे ः अनवर सुहेल
३. यथा स्थिति ः दिनेश पालीवाल
४. बंदकमरे की रोशनी ः हनीफ मदार
५. बाँद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स की मुरली ः राजेन्द्र चंद्रकांत
६. जिन्दा आदमी की शवयात्राा ः मुरारी शर्मा
७. उसकी रोटी ः संजीव जायसवाल ’संजय‘
८. कोहरा ः डॉ. अनुपम माथुर
९. कुछ न कुछ छूट ही जाता है ः डॉ. रजनी गुप्त
१०. रूको... यहाँ भी एक जिन्दगी है ः निशा रवीन्द्रन संपादक वर्तमान साहित्य
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