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Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner पर्वतांचलीय कहानियों का प्रकाशन
कथा में पहाड
अनुपम सौन्दर्य के परिपूर्ण पहाड चिरकाल से आकर्षण का केन्द्र बने रहे हैं मगर इनकी उपत्यकाओं में जीवन बसर कर रहे श्रमशील लोगो के पहाड जैसे दुख-दर्द से बहुत कम लग परिचित हैं। भूमंडलीयकरण के इस दौर में इन्हीं पहाडों और इनमें बसे लोगों ने मानवजाति के लुप्तप्राय मूल्यों, सभ्यताओं, संस्कृतियों के तत्वों और पृथ्वी के परिवेश को बचाए रखा है। विषम होती परिस्थितिकी के इस देशकाल में सबसे अधिक अहित पहाडों का ही हुआ है क्योंकि मनुष्य की लालसाओं ने अपने लाभ के लिए न केवल प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है बल्कि इनमें रह रहे भोलेभाले लोगों का इस्तेमाल भी अपने स्वार्थ और सुख के लिए किया है। हमारा यह प्रयास है कि पर्वतांचलों का यथार्थ हिन्दी कहानी के माध्यम से आप तक पहुंचे और देश की सामाजिकता के एक घटक के रूप में अपने आपको लोकमानस में स्थापित कर सके। पहाडों से जुडे प्रश्नों को इन मुद्दों को पहाड के कथाकारों ने अपनी कहानियों में लगातार उठाया है लेकिन ऐसा अधिकांश गल्प इधर-उधर बिखरा पडा है। हम चाहते हैं कि उसे एक पुस्तकाकार रूप दिया जाए। अतः आपसे अनुरोध है कि पर्वतीय जीवन की स्वलिखित चुनिंदा कम से कम दो श्रेष्ठ कहानियों की प्रतियां चयनार्थ सचित्रा अपने संक्षिप्त परिचय के साथ निम्नलिखित पते पर भेजने की कृपा करें। इसमें उन साहित्यकारों को भी शामिल किया जाएगा जो अब हमारे बीच नहीं हैं। आप उनकी सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध कहानियां भी हमें उपलब्ध करवा पाएं तो आभारी होंगे। कहानियों की संख्या अधिक होने पर इन्हें दो खंडों में भी प्रकाशित किया जा सकता है। संयोजन ः एस.आर. हरनोट ओम भवन, मोरले बैंक एस्टेट, निगर विहार शिमला-१७१००२ संपादक ः श्रीनिवास श्रीकान्त वरिष्ठ आलोचक-कवि
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