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Vartmaan Sahitya ::February, 2007 Sponsered by : Decor Home, Bikaner ’सज्जाद जष्हीर एक सच्चे इंकश्लाबी थे‘
महमूद अयूबी
जनवादी लेखक संघ ने शनिवार दिनांक २८ अक्टूबर २००६ को सेंट जेवियर्स बॉइजष् एकेडमी-चर्चगेट मुंबई में सज्जाद जष्हीर जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया। समारोह के अध्यक्ष, वरिष्ठ कथाकार महमूद अयूबी ने सज्जाद जष्हीर को सच्चा इंकलाबी बताया। उन्होंने कहा कि सज्जाद जष्हीर और उनके साथियों ने उर्दू साहित्य को नया तेवर प्रदान किया। प्रगतिशील लेखक संघ का गठन इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है, जिसने हिन्दुस्तान के अदीबों को नयी राह दिखाई। इस अवसर पर बोलते हुए जावेद सिद्दीकी ने कहा कि सज्जाद जष्हीर पहले इंसान थे, जो तहरीक बन गये और फिर तारीख बने। हिन्दुस्तान की सूरते-हाल को कैसे बदला जाये? अदब के तकाजष्े क्या हो? अदीब की जिम्मेदारियां क्या हो? आदि प्रश्नों से वे लगातार जूझते रहे। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मासिक ’शबताब‘ के संपादक ’नरेश नदीम‘ ने उस दौर के इतिहास का जिष्क्र किया और कहा कि १९१९ का जलियांवाला बाग हत्याकांड, भगत सिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारियों का ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी और देश के कोने-कोने में बढ रहे असंतोष की पृष्ठभूमि ने सज्जाद जष्हीर के बौद्धिक व्यक्तित्व को आकार दिया। उन्होंने ’जन्नत की बशारत‘, ’दिल्ली की सैर‘ आदि कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दकियानूसियत और रूढवादिता के ख्ालाफ उर्दू साहित्य में इसके पहले भी बहुत कुछ लिखा जा चुका है। ’अंगारे‘ का हमला इस्लाम पर नहीं बल्कि मौलवियत पर था, इसे समझना जरूरी है। लाजपतराय ने सज्जाद जष्हीर की ख्ाूबियों को गिनाते हुए कहा कि सज्जाद जष्हीर एक अच्छे इंसान थे। उनका जीवन उस किसान की तरह था जो मिट्टी को छू दे तो गेंहूं-ज्वार हो जाता है, अर्थात् वे बहुत ही मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्ति थे। कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें संघटनात्मक जिष्म्मेदारी देकर पाकिस्तान भेजा तो वे पाकिस्तान गये और वहां कई वर्ष जेल में गुजारे। अध्यक्ष मंडल के सदस्य राम प्रकाश त्रिापाठी ने कहा कि साम्राज्यवाद की शक्ल जष्रूर बदल गयी है, लेकिन ख्ातरा कई गुना बढ गया है। अमेरीकन साम्राज्यवाद जिस तरह निरंकुश हुआ है, अफश्गानिस्तान, इराक समेत दूसरे देशों की बर्बादी का जो मंजष्र दिखाई दे रहा है, उसे समझना बहुत जष्रूरी है। ख्ातरा सिर्फ देश की सीमा पर ही नहीं है बल्कि शालेय-पाठ्यक्रम से लेकर हमारे ड्राइंग रूम तक इसकी अनुगूंज सुनाई दे रही है। विचारधारात्मक संघर्ष अधिक तेजष् करने की जष्रूरत है। मेहनत जब फन से मिलती है तो कविता कहलाती है। जदीदियत की शक्ल क्या हो इस बारे में सज्जाद जष्हीर हमें रास्ता बताते हैं। इनायत अख्तर ने कहा कि सज्जाद जष्हीर अवाम के लेखक थे। उनका मानना था कि साहित्य लेखन सिर्फ मध्य-वर्ग की ही बपौती नहीं है बल्कि कलम पर मजदूरों का भी उतना ही हकश् बनता है। साजिष्द रशीद ने कहा कि ’अंगारे‘ कथा-संग्रह ने उर्दू कहानी को नयी दिशा दी। आरंभ में शैलेश सिंह ने सज्जाद जष्हीर के ’साहित्य और जीवन‘ लेख का पाठ किया संचालन राम सागर पांडे ने तथा हृदयेश मयंक ने आभार व्यक्त किया। प्रस्तुति ः रामसागर पांडे, सचिव-जलेस, मुम्बई २, भख्तावर बिल्डिंग, स्टेशन रोड, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-४०००५८
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