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Vartmaan Sahitya ::February, 2007
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बाजषरवाद पर राष्ट्रीय सेमिनार रामयतन यादव
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फतुहा की साहित्यिक संस्था ’जन साहित्य परिषद‘ एवं जन प्रगति संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में पिछले दिनों एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के कई प्रमुख साहित्यकारों, पत्राकारों एवं कलाकारों ने शिरकत की। इस एक दिवसीय सेमिनार का विषय था ’बाजारवाद में शिक्षा, संस्कृति और साहित्य‘। सेमिनार का उद्घाटन करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. राम कुमार घोटड ने कहा कि बाजषरवाद में हमारे संबंधों का मूल्यांकन आर्थिक आधार पर होने लगा है, जो घातक है। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों का अपघटन बाजषरवाद की मूल प्रवृत्ति है। शिक्षाविद् प्रो. राणा प्रताप ने कहा कि उदारीकरण के कारण बाजषर को मुक्त किया जा रहा है। इसी मुक्त बाजषर के कारण शिक्षा, संस्कृति और साहित्य ख्ारीद-बिक्री की वस्तु बन गये है। लखनऊ से पधारे ’शब्दयात्राा‘ के संपादक सुशील सीतापुरी ने कहा कि बाजषरवाद की प्रवृत्ति ने हमारी परंपरा को जिस नए सांचे में ढालना शुरू किया है, उससे सामाजिक-पारिवारिक रिश्ते कमजषेर पडने लगे हैं। सतीशराज पुष्पकरणा ने बढती हुई बेरोजष्गारी और भ्रष्टाचार के लिए बाजषरवाद को जिष्म्मेदार ठहराया। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए शिवपूजन प्रशांत ने कहा कि फतुहा की साहित्यिक संस्था ’जन साहित्य परिषद‘ ने हमारे समग्र के एक बडे सवाल को बीच बहस लाने का प्रयास किया है। दरअसल बाजषरवाद की बुराइयों से हम वाकिफश् नहीं हैं, इसे समझने की जष्रूरत है। विचार सत्रा के अध्यक्ष लखनऊ से पधारे चर्चित साहित्यकार राजेन्द्र वर्मा (संपादक-अविरल मंथन) ने कहा कि बाजषरवाद एक अपरिहार्य बुराई है, इसे एकदम से समाप्त नहीं किया जा सकता। बाजषरवाद के समानान्तर हमें ऐसी व्यवस्था अपनानी होगी जिससे जीवन मूल्य बचे रहे और यह व्यवस्था हमें साहित्य से ही मिल सकती है। संचालन करते हुए रामयतन यादव ने कहा कि बाजषरवादी व्यवस्था में आज बहुत तेजषी से पूंजी के बल पर तकनीक का वर्चस्व कायम हो रहा है और मनुष्य की भूमिका गौण होती जा रही है। पूंजी पर जिन लोगों का अधिकार बढता जा रहा है वे ही हमारी शिक्षा, संस्कृति और साहित्य को अपनी रुचि के अनुरूप ढालने में लगे हैं। समारोह के दूसरे सत्रा में आयोजित कवि सम्मेलन में जहां पूर्णियां के परमेश्वर गोयल ने कविता के नाम पर फूहड चुटकुलों से गंभीर श्रोताओं को पूरी तरह निराश किया, वहीं भारतभूषण पाण्डेय, सुडौल अख्तर, सतीशराज पुष्करणा (पटना), राजकुमारी शर्मा ’राज‘ (गाजिष्याबाद), राजेन्द्र मोहन त्रिावेदी (रायबरेली), चन्द्रप्रकाश मामा (पटना) ने गीत गजष्लों की सरस धारा प्रवाहित कर श्रोताओं को झूमने और सोचने पर विवश कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के अध्यक्ष सिद्धेश्वर ने किया। समारोह-स्थल पर अमरेन्द्र द्वारा लगााई गई कविता-पोस्टर प्रदर्शनी तथा वियज कुमार सिंह के निर्देशन में कलाकार संघ, पटना सिटी की गायन प्रस्तुति भी सराहनीय थी। मकसूदपुर, पो. फतुआ (पटना) पिन-५०३२०१



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